सुरेंद्र सिंह चौधरी-
आज लालकिले से प्रधानमंत्री ने हमेशा की ही तरह जहर उगला लेकिन लोकतंत्र, लोकतंत्र का जाप करते-करते लोकतंत्र का मजाक बनाने में कोई कसर भी नहीं छोड़ी। ऊपर तस्वीर पर गौर फरमाइए। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को चौथी पंक्ति में बैठाया गया।
स्वतंत्रता दिवस जैसे लोकतंत्र के महान पर्व पर विपक्ष के नेता को प्रोटोकॉल के तहत पहली पंक्ति में जहां सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, गृहमंत्री, वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों आदि के साथ बैठना था। प्रोटोकॉल राष्ट्रपति भवन से जारी किया जाता है जिसका अनुपालन रक्षा मंत्रालय वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के माध्यम से सुनिश्चित करता है। समारोह के बाद बवाल मचा कि राहुल गांधी को अगली पंक्ति के बजाय चौथी या अंतिम पंक्ति में क्यों बिठाया गया? तो रक्षा मंत्रालय का बयान आया कि ओलंपिक में मेडल पाने वाले खिलाड़ियों को वीआईपी कटैगरी में बिठाने की वजह से जगह की कमी पड़ गई इसलिए नेता विपक्ष को पीछे बिठाना पड़ा।
ये कितना हास्यास्पद बयान है इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि पहली पंक्ति में तो कोई खिलाड़ी बैठाया ही नहीं गया तो जगह की कमी का सवाल कहां पैदा होता है। आखिर किसके इशारे पर नेता विपक्ष को अगली पंक्ति के बजाय अंतिम पंक्ति में बिठाया गया होगा इसका अनुमान तो सभी को होगा।
राहुल गांधी के पीछे 100 सांसद उनकी अपनी पार्टी के हैं और 100 से ज्यादा विपक्ष के सांसदों ने मिलकर उन्हें विपक्ष के नेता पद पर बिठाया है। लोकतंत्र में विपक्ष न हो तानाशाही स्थापित हो जाती है।
बहरहाल, राहुल गांधी को तो खेत, खलिहान, मजदूरों और जूते बनाने वालों के साथ बैठते हुए सारे देश ने देखा है। उनको अंतिम पंक्ति में बैठाने से भला उन्हें क्या एतराज होता। उनकी प्रतिष्ठा का अनुमान इस बात से लगाइए कि उनके पिता स्व. राजीव गांधी, दादी स्व. इंदिरा गांधी और नाना पंडित जवाहरलाल नेहरु इस देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। उनको कहीं भी बिठा दीजिए वो हीरे की तरह अपनी चमक बिखेरते रहेंगे और उनके साथ आज स्वतंत्रता दिवस पर उनके साथ ओछी हरकत करने वालों पर लोग थूकते रहेंगे।
समर अनार्य-
राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं। लेकिन उन्हें स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में पीछे से दूसरी पंक्ति में सीट दी गई। कैबिनेट मंत्री स्तर का पद है। कांग्रेस के शासनकाल में हमेशा वाजपेयी, आडवाणी और जोशी को सबसे आगे की पंक्ति में बैठाया जाता था।
ख़ैर, नीचों से नीचता छोड़ और क्या उम्मीद की जा सकती है। बाक़ी राहुल गांधी ने बड़प्पन दिखाया, बिना किसी एतराज़ के चुपचाप बैठ गये। अब सरकार की नीचता, झूठ के साथ साथ राहुल का बड़प्पन भी खबरों में है!


