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सियासत

सत्ता की शह पर गैरकानूनी हड़ताल कर रहे हैं डॉक्टर!

शिशिर सोनी-

कोलकाता में महिला डॉक्टर के खिलाफ दिल दहला देने वाली घटना पर जिस तरह की राजनीति शुरू हो गई है वो बेहद घटिया है। कोई भी शासन प्रशासन किसी crime को रोकने में असफल है तो उसकी एकाउंटिबिलिटी तय होनी ही चाहिए। मामले पर कोर्ट ने संज्ञान लिया और सीबीआई (CBI) जाँच का आदेश दिया। यही डॉक्टरों के तमाम संगठनो की मांग थी।

मगर, उसके बाद भी देश भर के डॉक्टर्स जिस तरह मनमाने ढंग से हड़ताल पर हैं वो भी अक्षम्य है। अस्पतालों में मरीज दम तोड़ रहे हैं, जो डॉक्टर प्रदर्शन कर रहे हैं, हड़ताल पर हैं उन्हें खुद नहीं पता कि कोलकाता के हृदय विदारक घटना की जाँच जब सीबीआई कर रही है तो हड़ताल क्यों?

दरअसल, डॉक्टर्स के कंधों का इस्तेमाल कुछ राजनीतिक दल कर रहे हैं। आखिर डॉक्टर्स संगठनों को कौन भड़का रहा है? निजी अस्पतालों के डॉक्टर्स भी अगर हड़ताल में शामिल हो रहे हैं तो इसका सीधा मतलब निकाला जायेगा कि सत्ता की शह पर ही ये गैरकानूनी हड़ताल किया जा रहा है। डॉक्टर्स किसी भी कीमत पर मरीजों को बचाने, इलाज करने की एक प्रतिज्ञा लेकर प्रैक्टिस शुरू करते हैं। क्या जीवन रक्षक जिम्मेदारियों से डॉक्टर्स बच सकते हैं?

कोलकाता की घटना के बहाने अपनी-अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले डॉक्टर्स के खिलाफ संबंधित सरकारों को तुरंत एस्मा लगाना चाहिए। गरीब मरीजों को भगवान भरोसे नहीं छोड़ा का सकता। राजनीतिक रूप से थेथर सरकारें अगर इस गैरकानूनी हड़ताल को खत्म कराने की पहल नहीं करती तो सुप्रीम कोर्ट (चूंकि हड़ताल अब कई राज्यों में फैल चुकी है) को स्वतः संज्ञान लेकर ठोस पहल करनी चाहिए।

बिहार हाईकोर्ट को भी एक के बाद एक पुल गिरने पर suo motuo cognizence लेना चाहिए। ऐसे विषयों पर हाईकोर्ट यूँ आँखें मूंद कर नहीं बैठा रह सकता। बिहार के नागरिकों के टैक्स का पैसा इस तरह जाया हो रहा है। पानी में बहाया जा रहा है। जिम्मेदारी तो तय होनी ही चाहिए।

दिल्ली के राव कोचिंग में छात्रों के डूब कर मर जाने की खबर किसी के समझ नहीं आ रही। चूहे के बिल में अगर पानी जाता है तो वो भी जान बचाने बिल से बाहर भागता है। राव कोचिंग के बसेमेंट में पानी भरने में इतना समय तो लगा ही होगा जितने में छात्र भाग कर सुरक्षित जगह जा सकते थे, वो दूध पीते बच्चों की तरह बेंच पर खड़े होकर पानी भरने का इंतजार क्यों करेंगे? ये सब जाँच CBI कर ही रही होगी, लेकिन बेमौत मारे जाने वाले छात्रों के परिजनों के दुःख को कोई कम नहीं कर सकता। मगर घटना के बाद जिस तरह राव कोचिंग चलाने वाले से लेकर बिल्डिंग मालिकों और तेज गाड़ी चलाने वालों तक तो कानून का चाबुक चला, पर नगर निगम कमिश्नर और अफसरों की पूरी बारात जिसने बेसमेंट में क्या चल रहा है कभी चेक नहीं किया, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

IAS की तैयारी कर रहे छात्र अब बात रहे हैं नब्बे फीसदी से ज्यादा कोचिंग में लाइब्रेरी बसेमेंट में ही चल रहे। मेरा मानना है इससे भी ज्यादा खतरनाक है लक्ष्मी नगर की तंग गलियों में बने पांच मंजिल, चार मंजिल गैर कानूनी बिल्डिंग में चलने वाले कोचिंग सेंटर्स ज्यादा खतरनाक हैं। किसी बिल्डिंग में कोई बड़ी आपदा आई तो न फायर ब्रिगेड को घुसने का रास्ता है, न हज़ारों छात्रों के भागने का रास्ता मिलेगा।

सब प्रशासन के नाक के नीचे उनकी जानकारी में हो रहा है। पर, सब तब तक सोते रहेंगे, माल अंदर करते रहेंगे, सब चंगा सी कहते रहेंगे जब तक कोई बड़ी दुर्घटना न हो जाए। केवल सिस्टम नहीं, हम सब कहीं न कहीं दोषी हैं। ज्यादा पैसे की हवस ने हमें राक्षस बना दिया है। हैवान बना दिया है।

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