लखनऊ : राजधानी के इंदिरा नगर में संदीप डेवलपर्स ने रिंग रोड लखनऊ पर एक 10 मंजिला आवासी भवन का निर्माण किया था. लिफ्ट का पूरा भुगतान लेकर जॉनसन लिफ्ट्स नामक कंपनी द्वार लिफ्ट लगाई गई. बताया जा रहा है कि लिफ्ट में पांच माह बाद ही दिक्कतें आनी शुरू हो गई थीं. कई बार शिकायत के बावजद लिफ्ट नहीं बदली गई.
हद तो तब हो गई जब बीती 29 जून को बिल्डिंग का एक निवासी आधा घंटा तक लिफ्ट में फँसा रहा. इससे पहले 9वें तल पर एक व्यक्ति 45 मिनट तक फंसा रहा. एक हार्ट पेशेंट भी लिफ्ट में काफी देर तक फंसा रहा. लिफ्ट कंपनी से इसकी शिकायत की गई. कुछ न होने पर कंपनी को कानूनी नोटिस भेजी गई, लेकिन कंपनी की तरफ से कोई ध्यान नहीं दिया गया.
नतीजतन, संदीप डेवलपर्स ने विवश होकर कंपनी के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग उत्तर प्रदेश लखनऊ में एक परिवाद दाखिल कर दिया. इसकी सुनवाई सदस्य माननीय राजेंद्र सिंह एवं श्रीमती सुधा उपाध्याय द्वारा की गई.

प्रिसाइडिंग जज माननीय राजेन्द्र सिंह ने मामले के सभी तथ्यों का अवलोकन कर, पाया कि इस मामले में लिफ्ट में कमी के कारण लिफ्ट में बार-बार लोग फंस रहे हैं और उनका जीवन संकटापन्न हो जाता है. जॉनसन लिफ्ट्स के बारे में यह देखा गया कि भारत की अच्छी गुणवत्ता वाली लिफ्टों की श्रेणी में यह छठवें नम्बर पर आती है. लिफ्ट कम्पनी की ओर से कहा गया कि इसमें आटो रेस्क्यू डिवाइस न लगाने के कारण यह हुआ है. आयोग ने पाया कि जो कोटेशन और विशिष्टताऐं दी गई थीं उसमें कहीं भी एआरडी (आटो रेस्क्यू डिवाइस) के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है और न ही कम्पनी ने कभी भी परिवादी से इसे लगवाने के लिए जोर दिया.
राज्य आयोग ने जॉनसन लिफ्ट्स कम्पनी की लिफ्टों के दुर्घटनाग्रस्त होने के कई मामलों पर प्रकाश डाला है, जो विभिन्न जिलों के साथ-साथ लखनऊ में भी घटित हुए हैं. डेक्कन क्रॉनिकल की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा गया कि, 17 दिसंबर 2017 को हैदराबाद में नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी के कॉर्पोरेट ऑफिस मधापुर में लिफ्ट की मरम्मत करते हुए 2 लिफ्ट तकनीशियन की मृत्यु ग्यारहवे तल से लिफ्ट के गिरने के कारण हुई और पुलिस ने NCC और जॉनसन लिफ्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के विरुद्ध मामला दर्ज किया। इसी प्रकार सोहना रोड गुडगाँव में सेंट्रल पार्क -2 में स्थित बहुखंडी बिल्डिंग में एक लिफ्ट दूसरे तल से नीचे गिरी इसपर लिफ्ट कंपनी जॉनसन लिफ्ट्स के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज की गयी.
हिंदुस्तान टाइम्स की 13 जून 2023 की एक रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ के पारिजात अपार्टमेंट और जानकीपुरम में भी जॉनसन लिफ्ट्स की खराबी से घटनाएं हुई. अत: यह राज्य आयोग इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि जॉन्सन लिफ्ट की कमी के कारण लोगों का जीवन संकट में आया और आम आदमी अत्यधिक तनावग्रस्त हुआ। इससे बिल्डिंगों की गुणवत्ता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा.
मामले के सभी तथ्यों पर विचार करते हुए राज्य आयोग ने कम्पनी को निम्नलिखित आदेश दिया :-
- विपक्षी जॉनसन लिफ्ट्स कम्पनी (विपक्षीगण) को संयुक्त एवं पृथक-पृथक रूप से आदेश दिया गया कि वे परिवादी को लिफ्ट का मूल्य 8,40,000/- रु. और इस धनराशि पर दिनांक एक अगस्त 2012 से 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज इस परिवाद के निर्णय के 30 दिन के अन्दर अदा करें और यदि यह धनराशि इस परिवाद के निर्णय के 30 दिन के अन्दर अदा नहीं की जाती है तब ब्याज की दर 15 प्रतिशत वार्षिक होगी, जो एक अगस्त 2012 से इसके वास्तविक भुगतान की तिथि तक देय होगी.
- विपक्षीगण को संयुक्त एवं पृथक-पृथक रूप से आदेश दिया गया कि वे परिवादी को लिफ्ट की आपूर्ति में किए गए विलम्ब के सन्दर्भ में 02.00 लाख रु और इस धनराशि पर एक अगस्त से 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज इस परिवाद के निर्णय के 30 दिन के अन्दर अदा करें और यदि यह धनराशि इस परिवाद के निर्णय के 30 दिन के अन्दर अदा नहीं की जाती है तब ब्याज की दर 15 प्रतिशत वार्षिक होगी, जो एक अगस्त 2012 से इसके वास्तविक भुगतान की तिथि तक देय होगी.
- विपक्षीगण को संयुक्त एवं पृथक-पृथक रूप से आदेश दिया गया कि वे परिवादी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार संव्यवहार के मद में 25.00 लाख रू0 और इस धनराशि पर एक अगस्त 2012 से 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज इस परिवाद के निर्णय के 30 दिन के अन्दर अदा करें और यदि यह धनराशि इस परिवाद के निर्णय के 30 दिन के अन्दर अदा नहीं की जाती है तब ब्याज की दर 15 प्रतिशत वार्षिक होगी, जो एक अगस्त 2012 से इसके वास्तविक भुगतान की तिथि तक देय होगी.
- विपक्षीगण को संयुक्त एवं पृथक-पृथक रूप से आदेश दिया गया कि वे परिवादी को हुई आर्थिक क्षति और उसकी ख्याति में कमी होने के मद में 30.00 लाख रू0 और इस धनराशि पर एक अगस्त 2012 से 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज इस परिवाद के निर्णय के 30 दिन के अन्दर अदा करें और यदि यह धनराशि इस परिवाद के निर्णय के 30 दिन के अन्दर अदा नहीं की जाती है तब ब्याज की दर 15 प्रतिशत वार्षिक होगी, जो एक अगस्त 2012 से इसके वास्तविक भुगतान की तिथि तक देय होगी.
- विपक्षीगण को संयुक्त एवं पृथक-पृथक रूप से आदेश दिया गया कि वे परिवादी को 50,000/- रू0 वाद व्यय के रूप में बिना ब्याज के इस परिवाद के निर्णय के 30 दिन के अन्दर अदा करें.
- विपक्षीगण को संयुक्त एवं पृथक-पृथक रूप से आदेश दिया गया कि वे परिवादी को दूषित लिफ्ट के कारण मानव जीवन संकटापन्न होने और लोगों में भय व दहशत तथा मानसिक यन्त्रणा उत्पन्न होने के कारण 50.00 लाख रू0 और इस धनराशि पर एक अगस्त 2012 से 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज इस परिवाद के निर्णय के 30 दिन के अन्दर अदा करें और यदि यह धनराशि इस परिवाद के निर्णय के 30 दिन के अन्दर अदा नहीं की जाती है तब ब्याज की दर 15 प्रतिशत वार्षिक होगी, जो एक अगस्त 2012 से इसके वास्तविक भुगतान की तिथि तक देय होगी.

यानी ब्याज सहित कुल रकम = 2,82,07000 लिफ्ट कंपनी संदीप डेवलपर्स को देगा. यह, कुल दो करोड़ बयासी लाख सात हज़ार इस निर्णय के तीस दिन के अंदर ही अदा करना है अन्यथा ब्याज की दर 15 प्रतिशत के साथ एक अगस्त 2012 से भुगतान की वास्तविक तिथि तक कुल 3,23,62,000, (कुल तीन करोड़ तेईस लाख बासठ हज़ार) अदा करना होगा.


