शीतल पी सिंह-
दुनिया के अनेक देशों में बहुत बड़ी आबादी में ममेरी, फुफेरी, चचेरी बहनों से विवाह (cousin marriages) प्रचलन में है। पाकिस्तान इस मामले में दुनियाँ में अव्वल है, वहाँ लगभग हर दूसरी शादी इसी तरह से होती है। बहुत ही कम, अपवाद की हद तक इस तरह के विवाह तमाम धर्मावलंबियों के बीच पाये जाते हैं लेकिन इसकी बहुतायत मुस्लिम समुदाय की ही है। भारत में भी मुस्लिम समुदाय के बीच इस तरह के विवाह प्रचलन में हैं।

शिव प्रताप सिंह-
निकट संबंधों में शादी जेनेटिकली सही नहीं है। इस तरह की शादियां जो निकटतम खून के रिश्तों में होने से इनब्रीडिंग हो जाती है, जिससे पैदा हुई संतानों में दूरगामी परिणाम नुकसानदायक होते हैं, स्वास्थगत समस्याएं होती हैं। इनब्रीडिंग चाहे इंसानों, पौधों, फसलों अथवा पालतू जानवरों में बेहतर परिणाम कभी नहीं देती। 1, 2 पीढ़ी के बाद इसका प्रतिकूल असर दिखता है। अभी यहां मैं लिखूं की हिंदुओं में प्राचीन काल से अपने से पश्चिम कन्याओं को ब्याहने की प्रथा थी और निकटतम संबंधों में शादी प्रायः नहीं होती थी तो लोग सोचेंगे की हिंदू मुस्लिम का कर रहा। अपवाद को प्रथा नहीं कहा जा सकता, अपवाद तो मिलेंगे ही।
प्रकाश एस वाई-
सर दक्षिण भारत में हिंदुओं में भी ममेरी, फुफेरी बहनों से शादी का प्रचलन है।
मुहम्मद अशफाक-
आंध्र प्रदेश में तो अपने सगी भांजी से भी शादी करते हैं, नाम याद नहीं है लेकिन कोई ब्राह्मण जी थे जिन्होंने अपने लिए बताया था।
रविंद्र रंजन-
हाल ही में यूपी के एक तिवारी ने अपनी सगी बेटी से शादी कर सबको पीछे छोड़ दिया है।
समर खान-
सर एक ये भारत की रिपोर्ट है ब्लड रिलेशन मैरिज की.

असरार खान-
मुसलमानों में और बहुत सारी कमी या बुराई ही सकती है लेकिन इस तरह की शादियों का प्रचलन बहुत सकारात्मक है. रिश्तेदारी में शादी होने से आपसी संबंध और मजबूत हो जाते हैं और लड़का लड़की बचपन से ही दोनों एक दूसरे को पहले से जानते रहते हैं तथा दोनों परिवार और लड़का लड़की बहुत ज्यादा जिम्मेदारी महसूस करते हैं दहेज वगैरह जैसी समस्या को आसानी से हल कर लेते हैं. मुसलमानों में यह एक खूबी है कि उनमें तलाक़ का रेसियो बहुत कम है क्योंकि दोनों परिवारों में अपनत्व की भावना रहती है.
इसके अलावा मुसलमानों में शादी का तरीका अतिउत्तम है लडक़ी लड़का की सहमति लिखित और ओरल दोनों तरह से ली जाती है और गवाहों के हस्ताक्षर भी लिया जाता है यदि कोर्ट मैरिज को छोड़ दिया जाए तो. इससे उत्तम शादी दुनिया में किसी धर्म में नहीं होती विशेष बात यह है कि इसमें आडम्बर के लिए कोई गुंजाइश नहीं है न कोई पूजा पाठ. लेकिन तलाक़ उतना ही जंगली तरीके से होता है जिसे अब भारत समेत तमाम देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया है.
अब्बास अली मुंशी-
ऐसा नहीं है, जबसे मुसलमानों में लिटरेसी स्तर बढ़ा है, युवा शिक्षित होने लगे हैं, कज़िन में रिश्ते बहुत कम होने लगे है।


