आंध्र प्रदेश की गृहमंत्री वंगालापुडी अनिता ने चिंतूर पुलिस द्वारा छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के खिलाफ दर्ज किए मामले की फिर से जांच के आदेश दिए हैं. आज गृहमंत्री ने यह फैसला तब लिया जब आंध्र प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के नेताओं ने मंगलवार को सचिवालय में उनसे मुलाकात की थी.
बता दें हाल ही चार राज्यों के पत्रकारों ने बस्तर के मीडियाकर्मियों की फर्जी केस में गिरफ्तारी को लेकर प्रदर्शन किया था. पत्रकारों की डिमांड है कि मीडियाकर्मियों के खिलाफ फर्जी केस दर्ज करने में चिंतूर टीआई की भूमिका की जांच कर मामला खत्म किया जाना चाहिए.
आंध्र प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट के नेताओं ने यह भी कहा कि एसपी को घटना की दोबारा जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया जाए. साथ ही यूनियन ने पिछली सरकार के दौरान पत्रकारों पर दर्ज गैरकानूनी मुकदमों को भी रद्द करने की मांग की.
इसके बाद आंध्रा की गृहमंत्री ने जिले के एसपी अल्लूरी सीतारामाराजू से बात की और घटना पर पूरी रिपोर्ट देने का आदेश दिया है. गृहमंत्री ने पत्रकारों को न्याय का आश्वासन दिया है.
मुलाकात के दौरान आंध्र प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष येचुरी शिवा, संघ के राज्य नेता कृष्ण मोहन, सचिवालय के पत्रकार सत्यनारायण, रामकृष्ण, प्रसन्न कुमार विजय व सुरेंद्र समेत कई लोग शामिल रहे.
वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस कमेटी ने पत्रकारों को लेकर 6 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है. जांच दल में शामिल पूर्व मंत्री मोहन मेरकाम समेत सभी सदस्य आंध्र के राजमुंदरी जेल में बंद पत्रकारों से मिलने पहुंचे.
बीजेपी सरकार पर अवैध रेत खनन का आरोप
कांग्रेस जांच दल ने आरोप लगाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के संरक्षण में कोंटा से अवैध रेत की तस्करी दूसरे प्रदेशों को हो रही है. कोंटा में हजारों टिप्पर रेत डंप है और जब इसकी आवाज पत्रकारों ने उठाई तो उनके वाहनों में फर्जी तरीके से गांजा डालकर फंसा दिया गया. इसके बाद फर्जी मुकदमा लिखकर उन्हें आंध्र के राजमुंदरी जेल में डाल दिया गया है.
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