हिमांशु कुमार-
दिलीप मंडल ने एक बार लिखा था कि आदिवासियों के लिए काम करने वाले सवर्ण सामाजिक कार्यकर्ताओं से बहुजन युवकों को दूरी बनाकर रखनी चाहिए
ऐसा उन्होंने बेला भाटिया के संदर्भ में लिखा था जिन्होंने आदिवासियों की सेवा करने के लिए वकालत की पढ़ाई की और अब वह दंतेवाड़ा में रहकर मानव अधिकार के मामलों में आदिवासियों के लिए लड़ती है
जिन पर पुलिस की देखरेख में गुंडो ने हमला किया लेकिन वह हिम्मत के साथ वहां डटी रहीं
दिलीप मंडल ने सामाजिक न्याय और जातिवाद के मुद्दे को गाली गलौज का गंदा खेल बना दिया था
वह यह सब भाजपा के लिए कर रहे थे
जो सामाजिक कार्यकर्ता पूंजीपतियां द्वारा आदिवासी इलाकों में किये जा रहे दमन के खिलाफ काम कर रहे थे उन्हें सवर्ण कह कर दिलीप मंडल उन पर हमला कर रहे थे
दिलीप मंडल खुलकर पूंजीवाद के पक्ष में लिखते थे
ज्यादातर मजदूर दलित और ओबीसी वर्ग के हैं
यह पूंजीवाद मजदूरों का शोषण कर रहा है जिसमें सीधे-सीधे दलित और ओबीसी का शोषण हो रहा है
लेकिन दिलीप मंडल कह रहे थे पूंजीवादी विकास बहुजन युवको के पक्ष में हो रहा है
प्राइवेटाइजेशन के कारण आरक्षण खत्म हो जाता है
मोदी सरकार लगातार प्राइवेटाइजेशन बढ़ा रही है
लेकिन दिलीप मंडल उसका समर्थन कर रहे थे और बहुजन हितों पर हमला कर रहे थे
दिलीप मंडल के सारे लेख और बातें बहुजन समाज के खिलाफ है
लेकिन उनके द्वारा गाली गलौज के कारण बहुत सारे बहुजन युवकों को लगा कि यह हमारा हितैषी है
दिलीप मंडल ने शोषण मुक्त जाति मुक्त समाज बनाने की पूरी चर्चा को भटका दिया
अब वह खुलकर आरएसएस की गोद में जाकर बैठ गया है


एक स्वयंभू बुद्धिजीवी पहले ईडब्ल्यूएस आरक्षण को सुदामा कोटा कहता था. अब कह रहा है कि गरीब सवर्णो का ख्याल पहली बार मोदी जी ने किया और 10% आरक्षण दे दिया.
इस आदमी ने सामाजिक न्याय के विमर्श को विकृत करने का बहुत गलीच काम किया है. इसने सामाजिक न्याय के आंदोलन को गाली गलौज के आंदोलन में बदल दिया था. अच्छा हुआ अब यह खुलकर अपराधियों के साथ मिल गया है.


