मोदी सरकार का तनखैया बनने के बाद दिलीप मंडल अब खुलकर अपने भगवा रंग में आ गये हैं। निष्ठा निभाते हुए उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला सोशल मीडिया पर बोला है। आईबी मिनिस्ट्री में सलाहकार बनने के बाद दिलीप मण्डल की पहली पोस्ट पढ़िए-
दिलीप मंडल-
धन और धरती बंट कर रहेगा, अपना वाला छोड़कर! – ज़मींदार मार्क्सवादी नेता राहुल गांधी
बिहार और यूपी में एक समय कम्युनिस्ट पार्टी CPI के नेता ये नारा लगाते थे – धन और धरती बंटकर रहेगा, तो नीचे जनता बोलती थी “बंटकर रहेगा-बंटकर रहेगा।”
जनता की आँखों में चमक आ जाती थी।
ज़्यादातर कम्युनिस्ट नेता थे ज़मींदार। सैकड़ों एकड़ के मालिक। एक नेता के घर वालों ने उनसे पूछा कि ये क्या सिखा रहे हो इन छोटे लोगों को। ये माँगने लगेंगे तब क्या होगा।
नेता जी दुनाली बंदूक़ को पोंछते हुए हंसकर बोले। सुनो असली नारा ये है – “धन और धरती बंट कर रहेगा, अपना वाला छोड़कर!”
घर वाले ठहाका लगाकर हंस पड़े।
अब इस कथा को सुनने के बाद ये पढ़िए।
सत्ता जाने के बाद से राहुल गांधी अक्सर सामाजिक न्याय, विविधता और संसाधनों के समान वितरण के बारे में जोरदार ढंग से बोलते हैं।
2024 का उनका मुख्य नारा था – सबको गिनेंगे और बराबर बराबर बाँट देंगे! उनके गुरु पित्रोदा ने कहा – ख़ानदानी संपत्ति भी बाँट देंगे। विविधता ला देंगे, बहुत ग़ैर बराबरी है!
हालांकि, राहुल के परिवार द्वारा संचालित अरबपति राजीव गांधी फाउंडेशन पर नज़र डालने पर उनके बोले गए विचारों और सच के बीच एक बड़ा अंतर दिखाई देता है।
संसद भवन के पास इस फ़ाउंडेशन का दफ़्तर जिस ज़मीन पर है, वही कम से दस हज़ार करोड़ का है।
करोड़ों रुपये के देसी और कुछ समय पहले तक आ रहे विदेशी फंड का प्रबंधन करने के बावजूद, इस फाउंडेशन के बोर्ड और प्रबंधन टीम में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या यहां तक कि जाट, मराठा, कापू, पाटीदार जैसी प्रमुख मध्य जातियों से किसी भी समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं है।
राहुल गांधी के फाउंडेशन की नेतृत्व टीम में सामाजिक विविधता की कमी विशेष रूप से तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब राहुल सार्वजनिक रूप से डायवर्सिटी की वकालत करते हैं।
नौ सदस्यों के बोर्ड में से तीन उनके परिवार के हैं, जो योग्यता या सामाजिक न्याय के बजाय परिवारवाद है।
फ़ाउंडेशन में डायवर्सिटी की कमी कांग्रेस के यूपीए-2 सरकार के दौरान मंत्रिमंडल की तरह है, जहां नेतृत्व की भूमिका मुख्य रूप से उच्च जाति के लोगों के पास थी, जिससे ओबीसी और अन्य हाशिए पर रहे समुदायों का बहिष्कार होता रहा।
तब सिर्फ एक ओबीसी कैबिनेट मंत्री थे – बेचारे वीरप्पा मोइली। अब तो ओबीसी मंत्री भरे पड़े हैं।
ऐतिहासिक रूप से, कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व सवर्णों के प्रभुत्व में रहा है, जबकि इसका सबसे ठोस और सबसे बड़ा जनाधार मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय में था। इसने पार्टी में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी की आवाज़ों के लिए बहुत कम जगह छोड़ी।
राहुल गांधी के फाउंडेशन में विविधता की कमी कोई अपवाद नहीं है, बल्कि दशकों से कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व का तरीक़ है।
पार्टी अध्यक्ष खड़गे जी हैं। पर पार्टी को जयराम रमेश और केसी वेणुगेपाल वग़ैरह ही चलाते हैं। टिकट माँगने लोग इनके पास ही जाते हैं।
वोट माँगा दलितों और ओबीसी से, राज्य सभा भेजा स्कैंडल वाले मनु सिंघवी को।
कोई कह सकता है कि ये तो निजी फ़ाउंडेशन है। क्या आपको लगता है कि कांग्रेस के लंबे समय तक चले दबदबे के बिना ही इसे अरबों का चंदा मिला होगा। उतना निजी भी नहीं है।
और जब बंटेगा तो शुरुआत उसी से होगी जो कह रहा है कि – जाति जनगणना करा कर सारा धन बाँट दो, बाँट दो!
धन और धरती बंटकर रहेगा, राहुल गांधी का भी बंटकर रहेगा।

उपरोक्त पोस्ट पर लोग अवसरवादी मण्डल को आईना दिखा रहे हैं, पढ़ें कुछ चुनिंदा प्रतिक्रियाएँ-
पीएम केयर फंड में जितने भी ट्रस्टी हैं , उसमें कौन कौन मेम्बर हैं ?उसमें जमा करीब 22 हजार करोड़ रुपए सिर्फ कोरोना काल में कहाँ से आ गए ? क्या विपक्ष का सरकार को गिराने एवं विधायकों को खरीदने में इसी फंड का रुपैया को स्तेमाल
किया जाता है ? – नंद किशोर मेहता
हिटलर के साथ उसके प्रचार मंत्री गोयबल्स का हश्र भी याद रखियेगा कमंडल सर जी। -कमल उसरी
टुकड़ा मिल गया तो भौकना फर्ज बनता ही है, नारंगी गैंग देश लूट रहा है वह इस अंधे को नहीं दिखाई दे रहा है। – दुर्गा प्रसाद
सारे एरिपोर्ट बेच कर रहेंगे अपने बाप अडानी को। — मोदी का नया बच्चा कमंडल। -आरीज़ अख़्तर
मण्डल वाला कमीशन सुना था, अब कमीशन वाला मण्डल भी देख लिया। जीवन सफल हुआ मेरा। – कृष्ण शर्मा
दलित-बहुजनों को ज्यादा ज्ञान देने की जरूरत नहीं है अब वे सब अच्छी तरह समझ गये हैं कि कौन-कौन से नकली शेर दलितो-वंचितों के पक्ष में दहाड़ लगा रहें हैं। -सूर्य प्रकाश
कल एडवाइजर बने और आज नमक का हक अदा कर दिए ! -योगेश इंसान
एक बिका हुआ आदमी ऐसा ही पोस्ट कर सकता है। बहुत खूब। ऐसे ही दुम हिलाते रहो। -सुनील प्रसाद
तेरा बाप अडानी का बंटेगा और बीजेपी के सभी काला धन वालों का भी बंटेगा। -कुमार सत्यजीत
आईटी सेल को बिक गए इतनी ही हैसियत थी?? आखिर में पद पैसा के लिए जमीर को बेच ही दिए? आज जो भ्रष्टाचार हो रहा है उस पर नहीं लिखोगे, बात केवल अतीत की ही करोगे, भ्रष्टाचार कभी हुआ था तो दस साल से इनकी बहुमत की सरकार रही हैं जांच कराकर जनता के सामने लाएं और जो दोषी हैं उनको सजा दें लेकिन नहीं इन्हें तो केवल प्रोपोगंडा करना है और झूठ की राजनीति करना है। -ब्रजेश यादव
अब आपका कुछ भी बोलना जस्टीफाईड है क्योकि अब आप मिनिस्ट्री के आदमी है. -आशीष मिश्रा
₹2/- and Rs.8/- total 10 rupees credited in your account for this post :- bjp it cell and india broadcast ministry. -Mohd Zahid
अब आपकी क्रेडिट खल्लास पोरफेसर। लेटरल एंट्री मिल गई न। पोरफेसर भी लेटरल एंट्री से बने थे. – प्रवीण सिंह
कांग्रेस से सिफारिश करो तुम्हें शामिल कर लेगी फाउंडेशन में, लेकिन पहले इस्तीफा दो। -चंपक यादव
दिलीप मंडल को कमजोरों और दलितों के हक लड़ने वाली एक सशक्त आवाज मानता था। मगर जिस तरह से इन्होंने मौकापरस्ती दिखाते हुए, सिर्फ अपने लाभ के लिए विचारधारा को पीठ दिखाई और बीजेपी और मोदी की चाटुकारिता शुरू की मुझे अच्छा नहीं लगा जबकि उनकी पोस्ट पढ़ कर खून खौलता है। -रितेश यादव
दिलीप मंडल तो खुद का फेकू और गप्पू का पेड बोका दास दिहाड़ी बन गया है फिर वह फेकू और गप्पू पर क्यों लिखेगा? – राजेंद्र प्रसाद
अब तो मिनिस्ट्री में ही हो कुछ भी बोल सकते हो। बीजेपी के नेताओं को खाना हजम नहीं होता जब तक राहुल को कोस न लें। तुमने भी वही सुपारी ले ली है। गलती हुई होगी तो उसको सुधारने का भी प्रयास राहुल कर रहा है और राजनीतिक मंचों से उसने इस बात को कई बार बोला है। -सुनील यादव
चढ्ढी जो पहले छुपा कर पहनते थे वो अब खुलयाम हो गया। दलित चिंतक से दलाली तक का सफर ऐसे ही नही है बहुत चाटने के बाद पद मिला है। -जेके सिंह
आईटी सेल के मालवीय जी को हम कोई तव्वजो नही दिए थे,अब आप भी उसी लाइन में आ गए तो आपको कौन पूछता है।बकते रहो। -पीके मेश्राम
नेता द्वारा दल बदलना समान्य है, पर आप का बदलना साफ दोगलापन दिख रहा है. -सैम रॉय
एएमयू और जामिया का लगातार विरोध करने का ईनाम रंगे सियार को मिल गया है। -असग़र अली

बीजेपी ने इस बंदे को सूचना प्रसारण विभाग का मीडिया सलाहकार बनाया है जो हिंदू देवी देवताओं को गाली देता है। विनाशकाले विपरीत बुद्धि। -सोनी कुमारी


