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सियासत

महाराष्ट्र में शिवाजी की मूर्ति धराशाई होने में बलि का बकरा कौन बनेगा, तलाश जारी!

शीतल पी सिंह-

शिवाजी महाराज, जो अपने वक्त में औरंगजेब के नेतृत्व वाले दिल्ली दरबार से नहीं हारे, नहीं झुके. उनकी प्रतिमा को मोदीजी के भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे पालतू ठेकेदारों ने इस तरह टुकड़े-टुकड़े करके मैदान में बिखेर दिया!

पिछले साल खुद मोदीजी ने इस प्रतिमा का अनावरण किया था। इन फ्रॉड लोगों को आप लोग हिंदू धर्म और हिंदुस्तान का रक्षक समझते हो?


सुप्रिया श्रीनेत-

70 साल का हिसाब. छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति का अनावरण पंडित नेहरू ने 30 नवंबर, 1957 को प्रतापगढ़ किले पर किया था. 67 साल के बाद भी बुलंद… बनाम, दूसरी मूर्ति का अनावरण नरेंद्र मोदी ने 4 दिसंबर, 2023 को सिंधुदुर्ग में किया था. 9 महीने में ही उसे ध्वस्त देख कर कलेजा फटता है.


सौमित्र राय-

महाराष्ट्र के मालवण में सिंधुदुर्ग पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा बनवानी थी. सूबे की डबल इंजन सत्ता के सीएम एकनाथ शिंदे ने यह बात अपने घर पर कही होगी. तुरंत उनके बेटे ने उछलकर अपने दोस्त जयदीप आप्टे का नाम सुझा दिया होगा.

महज़ 24 साल का जयदीप आप्टे कल्याण में रहता है. उसने इससे पहले कभी कोई प्रतिमा नहीं बनाई थी. लेकिन अगर सीएम का बेटा फरमाइश करे तो काम करना ही होगा. सो उसने एक खोखली प्रतिमा बना दी. खूब माल कमाया और लुटाया.

फिर डबल इंजन सत्ता के खरीददार प्रधान सेवक बीते 4 दिसंबर को पधारे. चुनाव से पहले मराठाओं का वोट लूटने के चक्कर में प्रतिमा का अनावरण कर दिया. अब प्रतिमा के गिरने पर बलि का बकरा ढूंढा जा रहा है. सीएम? या उनका बेटा? या फिर हड़बड़ाए हुए पीएम? कोई नहीं. ये सब अच्छे काम के लिए अवतरित हुए हैं.

असल खिलाड़ी तो जयदीप आप्टे है. वही बलि का बकरा निकलेगा. महाराष्ट्र के मराठा इन गुनहगारों को बखूबी पहचानते हैं. वे अपने राजे के अपमान का बदला जरूर लेंगे.

याद रखें–महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने मिडिल क्लास के टैक्स के 3600 करोड़ छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा में फूंक दिए।

सिर्फ अपने बेटे की मांग पर। 8 महीने (266 दिन) में प्रतिमा जमींदोज हो गई। और एकनाथ ने सारा दोष नौसेना पर मढ़ दिया। अब ये 3600 करोड़ महाराष्ट्र की जनता क्यों भरेगी? वह तो एकनाथ का हिसाब करेगी। इसे ही संघी राष्ट्रवाद कहते हैं।


सुरेश चिपलुनकर-

नए नए बने पुल गिरे जा रहे हैं. करोड़ों खर्च करके बने नए हाईवे उखड़ रहे हैं. उज्जैन के महाकाल लोक से लेकर छत्रपति शिवाजी की मूर्तियाँ टूटकर बिखर रही हैं.

लेकिन, सरकारी हिन्दू लोग. “कांग्रेस के समय भी तो ऐसा होता था” तथा “सभी दूर करप्शन है, तो मोदी क्या करें” जैसे फूहड़ तर्क से लगातार बचाव कर रहे हैं. और उधर मोदी कहते हैं कि उनके ड्रोन देश के करप्शन पर निगाह रखे हुए हैं. न खाऊँगा न खाने दूंगा.

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