दिलीप खान-
इनसे मिलिए। ये हैं रोहन जेटली, जिनका BCCI में सचिव बनना लगभग तय माना जा रहा है। जय शाह यह कुर्सी छोड़कर ICC जाने वाले हैं इनके लिए। रोहन जेटली, मरहूम अरुण जेटली के पुत्र और बीते कई साल से दिल्ली क्रिकेट असोसिएशन (DDCA) के अध्यक्ष हैं। वही DDCA जो 1990 के आख़िरी वर्षों से लेकर ज़िंदगी के आख़िरी लम्हे तक अरुण जेटली की जेब में रहा।
यह दुर्भाग्य की बात है कि फ़िरोज़शाह कोटला स्टेडियम का नाम बदलकर उस अरुण जेटली के नाम पर रखा गया, जिन पर खुलेआम DDCA में घोटाला करने के दर्जनों आरोप लगे। कई बार जांच कमेटियां बैठीं।
पूर्व क्रिकेटर कीर्ति झा आज़ाद को बीजेपी ने इसी वजह से पार्टी से निकाला था कि वे मोदी सरकार के सबसे ताक़तवर मंत्री अरुण जेटली के ख़िलाफ़ सार्वजनिक तौर पर इस घोटाले को लेकर लगातार बयान देते रहते थे।
DDCA में जेटली के बाद के जितने पदाधिकारी बनें, सब उनके भक्त थे। चाहे वह सीके खन्ना हो या फिर एसपी बंसल। दोनों आपस में ख़ूब लड़ते थे, लेकिन दोनों जेटली के आदमी थे और उनके घुटने छूते थे। जेटली के बग़ैर वहां ढाई दशक तक पत्ता नहीं हिला।
इस दौरान वहां मरम्मत का बजट 24 करोड़ से बढ़कर 130 करोड़ हो जाता था, बिना टेंडर के पैसे आवंटित हो जाते थे, नियमों के ख़िलाफ़ 45-45 लाख के पेमेंट किए जाते थे, कह दिया जाता था कि 44 लाख रुपये से IPL के टिकट ख़रीदे गए और चूंकि सब नक़द में ख़रीदे, इसलिए ट्रांजैक्शन के सबूत नहीं हैं। ये सब जांच समिति की रिपोर्ट में दर्ज है।
जब कीर्ति आज़ाद को भाजपा ने पार्टी से निकाला, तो अरुण जेटली कहा करते थे कि आज़ाद को उनसे कोई निजी खुन्नस है, लेकिन बाद में बिशन सिंह बेदी, मनिंदर सिंह, मदन लाल और सुरिंदर खन्ना ने भी खुलकर जेटली और DDCA के भ्रष्ट बर्ताव के ख़िलाफ़ बयान दिए।
जेटली के राज में हालत ये थी कि वीरेन्द्र सहवाग, आशीष नेहरा, इशांत शर्मा और गौतम गंभीर को खुलेआम कहना पड़ा था कि DDCA भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद में आकंठ डूबा है और मजबूरी में उन्हें दिल्ली की टीम छोड़नी होगी। सबने व्यथित होकर दिल्ली छोड़ने की बात कही थी। गौतम गंभीर अब भारतीय पुरुष टीम के कोच हैं, उन्हें याद ज़रूर होगा।
आपको याद हो कि न याद हो कि 2009 में भारत-श्रीलंका का मैच 24वें ओवर में बीच में ही रद्द करना पड़ा था, क्योंकि पिच इतनी ख़राब थी कि गेंद श्रीलंकाई खिलाड़ियों के मुंह, कंधे, पेट, कोहनी कहीं भी जाकर लग रही थी और खिलाड़ी घायल हो रहे थे। यह हालत तब थी जब भारत को सिर्फ़ डेढ़ साल बाद विश्वकप आयोजित करना था और भारत अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए ऐसी पिच पेश कर रहा था।
1883 में फ़िरोज़शाह कोटला स्टेडियम बना था और 2019 तक इसी नाम से यह ऐतिहासिक स्टेडियम दुनिया भर में मशहूर रहा। फिर 2019 में इस स्टेडियम का नाम बदलकर अरुण जेटली स्टेडियम किया गया और उसके महीने भर बाद रोहन जेटली को DDCA का अध्यक्ष बनाया गया, जिसका मुख्यालय इसी स्टेडियम में है। अब रोहन जेटली BCCI को संभालने का महत्वपूर्ण काम करेंगे।


