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उत्तर प्रदेश

जिस ठग के पीछे मुंबई पुलिस वर्षों खाक छानती रही उसे यूपी STF ने कुछ दिनों में उठा लिया

त्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UPSTF) ने एक और उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उत्तर प्रदेश STF की प्रतिष्ठा देशभर में इस प्रकार स्थापित हो चुकी है कि जिस कार्य का जिम्मा उसे सौंपा जाता है, वह सफलता के साथ पूरा होता है। इसी कड़ी में मुंबई पुलिस ने एक शातिर अपराधी आनंद सर्वजीत मिश्रा को पकड़ने के लिए UPSTF से सहायता मांगी थी।

अपराधी का परिचय : आनंद सर्वजीत मिश्रा, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के बिष्णुपुर थाना क्षेत्र का निवासी है, मुंबई के मीरा रोड इलाके में रहता था। मिश्रा ने लगभग 20 लोगों के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी की और जून 2022 में मुंबई से फरार हो गया। इसके शिकार हुए कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने अपने घर-बार बेचकर उसे मुनाफा कमाने के लिए पैसा दिया था।

पुलिस की कार्यवाही : मुंबई पुलिस ने अपराधी को पकड़ने के लिए उसकी तलाश उसके गाँव बिष्णुपुर से लेकर नेपाल, दिल्ली जैसी जगहों पर की, लेकिन दो वर्षों तक सफलता नहीं मिली। इसके बाद UPSTF की सहायता ली गई। UPSTF ने सिर्फ एक महीने के भीतर, दिनांक 31 अगस्त 2024 की शाम 7 बजे, वड़ोदरा, गुजरात से आनंद सर्वजीत मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। STF की टीम ने वड़ोदरा में लगभग 8 दिनों तक उसकी तलाश की। बाढ़ के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन STF की टीम ने बाढ़ के बीच बुलडोजर का इस्तेमाल करते हुए अपराधी को पकड़ने में सफलता हासिल की।

गिरफ्तारी की जानकारी : आनंद सर्वजीत मिश्रा अपनी पहचान छुपाकर वड़ोदरा में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रह रहा था और ज़ोमैटो में फूड डिलीवरी का काम कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसने बताया कि उसका बहुत सारा पैसा डूब गया है और उसने लगभग 4 करोड़ रुपये अपने भाई, पिता और ससुराल में रखवा दिए हैं। उसने यह भी खुलासा किया कि उसने चुराए हुए लगभग 1 किलो सोना अपनी पत्नी के जरिए मई 2022 में अपने छोटे भाई विनय कुमार मिश्रा, जो मध्य प्रदेश पुलिस में हैं, के पास रखवाया था। वहां से उसने 3 जुलाई 2022 को लखनऊ अपने भाई शैलेन्द्र शुक्ला के पास, जो लखनऊ में ओला कैब चलाता है, लगभग 60 लाख रुपये नकद रखवाए।

इसके बाद पति-पत्नी नेपाल चले गए, जहां उसने अपने पिता सर्वजीत मिश्रा को गांव में घर बनाने के लिए 35 लाख रुपये दिए और बचा हुआ पैसा व सोना (लगभग 800 ग्राम) अपने पिता चंद्रकेश शुक्ला और मां के हवाले कर दिया। इसके बाद वह गुरुग्राम से होते हुए वड़ोदरा पहुंचा, जहां उसने रवि त्रिपाठी के नाम से नया सिम कार्ड और फोन लिया और बिना किसी एग्रीमेंट के एक फ्लैट में रह रहा था।

UPSTF की टीम : इस ऑपरेशन का नेतृत्व उपनिरीक्षक विनोद सिंह ने किया, जो कुख्यात विकास दुबे के कानपुर एनकाउंटर में भी सबसे आगे थे। उनके साथ उनकी टीम में रवि वर्मा भी शामिल थे। आनंद सर्वजीत मिश्रा के खिलाफ मुंबई में कई FIR दर्ज हैं और अब पुलिस कानूनी कार्रवाई कर रही है।

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