कंधार हाईजैक पर बनी अनुभव सिन्हा की वेब सीरीज़ IC 814 को लेकर विवाद छिड़ गया है. सीरीज में आतंकवादियों का नाम भोला और शंकर रखने पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने नेटफ़्लिक्स के कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल को समन भेजकर तलब किया है. नीचे पढ़ें इस वेब सीरीज को लेकर कुछ प्रतिक्रियाएं..
गार्गी रावत-
नेटफ्लिक्स इंडिया के कंटेंट प्रमुख को ‘आईसी 814’ वेब सीरीज विवाद, अपहर्ताओं के ‘हिंदू उपनाम’ को लेकर तलब किया गया.
हालांकि सरकार की अपनी वेबसाइट कहती है- “अपहृत स्थान के यात्रियों के लिए इन अपहर्ताओं को क्रमशः (1) चीफ, (2) डॉक्टर, (3) बर्गर, (4) भोला और (5) शंकर के नाम से जाना जाने लगा। वे नाम जिनसे अपहर्ताओं ने हमेशा एक दूसरे को संबोधित किया.
विनोद कापड़ी-
समन छोटा मसला है। IC814 Hijack केस में सबसे पहले तो अनुभव सिंहा पर राष्ट्रद्रोह का मुक़दमा होना चाहिए कि उन्होंने ये Hijacking होने कैसे दी?
सुप्रिया श्रीनेत-
यह IC814 के OTT शो पर बवाल मचा हुआ है क्योंकि सच कड़वा है, लेकिन सच तो सच है. आगे पढ़िए.
काठमांडू से दिल्ली जाने वाली IC814 फ्लाइट को 24 दिसंबर, 1999 को हरकत-उल-मुजाहिद्दीन के 5 आतंकवादियों ने हाईजैक किया.

विमान पर सवार लोगों को छोड़ने के बदले हिंदुस्तान की सरकार ने 3 आतंकवादी रिहा किए.
यह तीन आतंकी मसूद अज़हर, अहमद ओमर सईद और मुश्ताक़ अहमद ज़रगर थे जिनको कांग्रेस की सरकार के दौरान पकड़ा गया था और इन तीन ख़तरनाक आतंकवादियों को BJP ने कंधार में रिहा किया.
यह फ्लाइट पंजाब में 45 मिनट रुकी रही – जहां BJP के घटक दल की सरकार थी – पर वहाँ कोई कार्यवाही नहीं की गई, जिसके बाद यह कंधार पहुँच गई.
भारत सरकार के दस्तावेज़ों में उल्लेख है कि 7 दिन तक चली इस हाईजैकिंग में यह आतंकी एक दूसरे को कोड नाम से बुलाते थे – चीफ, डॉक्टर, बर्गर, भोला और शंकर.
जाँच के बाद इनके असली नाम इब्राहिम अथर, शाहिद अख़्तर सईद,सनी अहमद क़ाज़ी, ज़हूर मिस्त्री और शाकिर था – और यह सब पाकिस्तान के रहने वाले थे.
रिहा होने के बाद उन तीन दुर्दांत आतंकवादियों और उनके आतंकी संगठनों ने 2001 में संसद पर हमला किया, 2002 में पत्रकार डैनियल पर्ल को अगवा कर उनकी हत्या की, 2008 में मुंबई पर हमला किया, 2016 में पठानकोट पर हमला किया और 2019 में पुलवामा के जघन्य आतंकी हमले को अंजाम दिया.
कांग्रेस ने आतंकी पकड़े और BJP ने रिहा किए – यह सच है. और सच पचा पाना कितना भी मुश्किल हो, लेकिन सच तो सच ही है.
रवीश कुमार-
अनुभव सिन्हा ने IC814 पर वेब सीरीज़ बना कर अच्छा किया। कई पत्रकारों को उस समय की पत्रकारिता याद आ रही है। अब अनुभव जी को अगली सीरीज़ पत्रकारिता पर बनानी चाहिए। देखता हूँ पत्रकारिता याद आती है या नहीं!
मानक गुप्ता-
IC 814 की हाइजैकिंग मैंने लगातार 7 दिन LIVE स्टूडियो से देखी और देश-दुनिया को दिखाई थी. तब मैं Zee News में बतौर ऐंकर काम कर रहा था. उस वक़्त देश में सिर्फ़ दो ही न्यूज़ चैनल होते थे – ज़ी न्यूज़ और स्टार न्यूज़. 7 दिन और 7 रातें…24 घंटे की कवरेज थी. 24 दिसंबर से 31 दिसंबर 1999 तक के वो 7 दिन देश पर कितने भारी गुज़रे, इसका अंदाज़ा वही लगा सकता है जो उस दौर में होश संभाल चुका था.
अनुभव सिन्हा की सीरीज़ IC 814 बड़ी उम्मीदों से देखी…न तो उसमें वो गहराई महसूस हुई और न ही उसमें देश और पीड़ितों के साथ न्याय किया गया है.
उस समय की सरकार की नाकामी सही दिखाई गई है लेकिन उन आतंकवादियों में इंसानियत दिखाना बेईमानी है, उनके असली मुस्लिम नाम अंत तक छुपाना और बड़ी बेईमानी है. हां, वो कोड-नेम थे पर आपकी ज़िम्मेदारी थी कि सारे तथ्य बताते…शुरू से बताते. ISI को क्लीन चिट क्यों दी गई है, समझ से परे है…सिर्फ़ इसलिए कि लादेन ने ISI वालों को बाद की पार्टी में नहीं बुलाया, उनके पाप धो दिये गये…!
तब के विदेश मंत्री जसवंत सिंह जी ने ख़ुद लिखा था कि ISI वाले तीनों छुड़वाये गये आतंकियों मौलाना मसूद अजहर, मुश्ताक अहमद जरगर और अहमद उमर सईद शेख के परिवार वालों को कंदहार ले गये थे…छोड़ने पर इन आतंकियों की पहचान करने के लिए…पहचान के बाद ही हमारे यात्रियों को छोड़ा गया.
पूरा प्लॉट पाकिस्तान का ही था. पाकिस्तान-ISI का पूरा सच पता नहीं क्यों नहीं बताया गया…पाक के नॉन-स्टेट ऐक्टर्स की थ्योरी को जान बूझ कर बल दिया गया या अनजाने में?
जब पूरी सीरीज़ में बार-बार कहानी का फ़्लो तोड़ कर तथ्य और बैकग्राउंड बताने के लिए नरेशन का सहारा लिया गया है, तो चीफ़, डॉक्टर, बर्गर, भोला और शंकर के असली नाम भी बताते…बताते चलते कि –
चीफ़ का असली नाम था इब्राहिम अतहर था
डॉक्टर का असली नाम शाहिद अख़्तर सईद था
बर्गर का असली नाम सनी अहमद क़ाज़ी
भोला का असली नाम ज़हूर मिस्त्री था
शंकर का असली नाम शाकिर था
ये भी ढंग से बताते कि सारे के सारे हाईजैकर्स पाकिस्तानी थे…
उल्टे आतंकियों को यात्रियों से अन्ताक्षरी खेलते दिखाया है…यात्रियों की फ़िक्र-मदद करते भी दिखाया है…!
अनुभव सिन्हा को सामने आ कर रिसर्च-तथ्यों पर हर सवाल का जवाब देना चाहिए…इस सीरीज़ में उपयुक्त बदलाव करने चाहियें ताकि आज और आगे की पीढ़ियाँ सही इतिहास जान सकें. पीड़ितों के बारे में भी थोड़ा सोचा होता…बहुत कुछ नहीं बताया.
सोर्स – एक्स (ट्विटर)


