कानपुर | नोएडा से संचालित एक टीवी न्यूज चैनल में मेडिकल बीट करने वाले पत्रकार पर तीन दिन पहले थाना स्वरूप नगर में मुकदमा दर्ज हुआ था. हैलट अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के नोडल अधिकारी डॉ मनीष सिंह ने पत्रकार पर हैलट में मरीजों से अवैध वसूली करने, जबरन फोटो खींचकर चैनलों-अखबारों को भेज देने, मरीजों द्वारा डॉक्टरों व अस्पताल प्रबंधन की शिकायत करवाकर जबरन दबाव बनाने जैसे आरोप लगाकर यह मुकदमा दर्ज कराया था.
इस मामले में आरोपी बनाए गए पत्रकार जगदीप अवस्थी उर्फ जग्गू बताते हैं कि, “अस्पताल में पिछले दिनों हुई तीन मौतों की खबर चलवाने के बाद उन पर भड़के डॉ मनीष सिंह ने मुकदमा लिखवाया है. उन तीन मौतों की खबर को दबा दिया गया था. मैंने मनीष सिंह और आरोपी बनाए गए डॉ क्षितिज सिंह का वर्जन लेकर चैनल को भेजा था, जो चला था. इस पर डॉ मनीष भड़क गए और मुझे फोन कर मुकदमा लिखवाने की बात भी कही थी. लेकिन यह नहीं पता था कि वे मुझपर खबर का नहीं बल्कि धोखाधड़ी जैसा मुकदमा लिखाएंगे.”
पूरा मामला क्या है?
लगभग तीन महीने पहले लखनऊ के डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल से संविदा तैनाती पर हैलट न्यूरो विभाग आए डॉ क्षितिज सिंह द्वारा अगस्त के आखिरी दो सप्ताह में तीन मरीजों की ऑपरेशन के बाद मौत हो गई थी. न्यूरो विभाग के एचओडी डॉ मनीष सिंह ने तीन मरीजों की मौत के बाद क्षितिज पर बिना इजाजत मरीजों के क्रिटिकल ऑपरेशन करने और उनको मौत का जिम्मेदार ठहराकर जीएसवीएम उप-प्राचार्य डॉ रिचा गिरी को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था.
जबकि डॉ क्षितिज का कहना था कि, “बिना एचओडी के ऑपरेशन करना दूर की बात है कोई ओटी में प्रवेश तक नहीं कर सकता है. क्षितिज ने कहा कि उन्हें हटवाने के लिए डॉ मनीष सिंह उन्हें जबरन टारगेट कर रहे हैं, और झूठे आरोप लगा रहे हैं.” डॉ क्षितिज ने भी जीएसवीएम प्राचार्य को पत्र लिखा था. यह खबर हिंदुस्तान अखबार में दो सितंबर को प्रकाशित हुई थी.

जगदीप अवस्थी ने इन दोनों डॉक्टरों का बयान लेकर चैनल को भेज दिया. जिसमें दोनों का पक्ष रखा गया. बताया जाता है कि डॉ मनीष सिंह चाहते थे कि इस मामले में सिर्फ उनकी बात ही रखी जाए, जबकि जगदीप ने दोनों का बयान लेकर “डॉक्टरों की आपसी खींचतान में मरीजों की मौत” नामक शीर्षक से खबर चलाई. इसी बात पर डॉ मनीष सिंह भडक गए. उन्होंने जग्गू को फोन भी किया, जिसमें कहा कि, “जग्गू यह ठीक नहीं है, आपस में. मैं तुम्हारे खिलाफ कम्प्लेन करुंगा.” इस बातचीत की रिकॉर्डिंग भड़ास के पास भी मौजूद है.
मामले में 4 सितंबर को मुकदमा होने के बाद ताजा अपडेट यह है कि जगदीप अवस्थी के पास अभी तक आईओ का फोन नहीं आया है. उनका कहना है कि जब आईओ मुझे पूछताछ के लिए बुलाएंगे, तो जाकर जांच में सहयोग करूंगा.
हिंदुस्तान, अमर उजाला जैसे अखबारों की कवरेज से निराशा
जगदीप अवस्थी कहते हैं कि, हिंदुस्तान, अमर उजाला व शहर के अन्य छोटे बड़े अखबारों ने जिस तरह मेरा पक्ष जाने बिना मुझे दोषी ठहरा दिया उससे मैं काफी निराश हुआ हूं. मेरी प्रतिष्ठा धुमिल हुई है. मैं स्टार न्यूज सनसनी के समय से मेडिकल और पोस्टमार्टम हाउस कवर कर रहा हूं. जब ईटीवी चलता था उस वक्त सबसे पहले खबरें ब्रेक कराने के लिए तीन बार सम्मानित हो चुका हूं.
कोरोना काल में मैंने अपनी पत्नी से मास्क बनवाकर अस्पतालों में बांटे. मरीजों, मजलूमों को खाना बांटा है, लेकिन एक पत्रकार के खिलाफ कोई संस्थान अधूरी खबरें प्रसारित-प्रकाशित करे तो अंदर से ग्लानि होती है. कभी-कभी लगता है कि खबरों की किस सड़ांध तक पहुंच गया है मीडिया. मतलब अभी तक मुकदमे में मुझे पुलिस ने संपर्क नहीं किया है और अखबारों ने दोषी बना दिया, बिना मेरा वर्जन जाने. क्या ये लोग मेरी प्रतिष्ठा वापस कर पाएंगे. मैं इसे लेकर अपने वकील से सलाह ले रहा हूं.
देखें अखबारों की कतरन और एफआईआर कॉपी….









Rohit Gupta
September 9, 2024 at 8:13 am
ये तो जाग ज़ाहिर है आज के तारीख में की गांधी जी के छपे हुए चित्र पहुंचे होंगे, बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया, बाकी सब रब राखा।।
आपका अपना रोहित