प्रशांत टंडन-
बचपन में खेलते हुये कपड़े गंदे हो जाते थे तो दोस्तों से लिपट कर किसी के साफ़ नहीं रहने देता था. मोदी ने चंद्रचूड़ के साथ यही कर दिया.
चंद्रचूड़ एक महीन इमेज बिल्डिंग गेम खेल रहे थे. सैटरडे सेमीनार में क्रांतिकारी जज और बेंच में बैठ कर समझौतावादी. मोदी ने 10 मिनट में ये खेल खत्म कर दिया. रिटायर होने से पहले गोगोई बना दिया.
चीफ़ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ 10 नवंबर 2024 को आधिकारिक रूप से रिटायर होंगे लेकिन नैतिक रूप से 11 सितंबर, 2024 एक जज के तौर पर उनका आखिरी दिन था. संवैधानिक मर्यादा वो खो चुके हैं.
कैमरों के साथ चंद्रचूड़ के घर जाकर मोदी ने संदेश दिया है कि देखो कानून मेरी जेब में है.
मोदी अपने राजनीतिक करियर के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं – इस दौर में वो ऐसी तमाम घटनाओं को अंजाम देंगे.
इंडिया गठबंधन और राहुल गांधी को इसके लिये तैयार रहना चाहिये. किसी के लिये भी अस्तित्व की लड़ाई उसका अंतिम संघर्ष होता है. इस दौर में वो सारे नियम तोड़ता है, ज़्यादा हमलावर होता है.
Himanshu Kumar-
10 सवाल जिनका जवाब भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ को देना चाहिए:
नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करने की पहल किसकी थी? उनकी या प्रधानमंत्री कार्यालय की?
क्या विपक्षी नेताओं, जिसमें विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल हैं, को आमंत्रित किया गया था? अगर नहीं, तो क्यों?
क्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित किया गया था? अगर नहीं, तो इसके खिलाफ फैसला किसने लिया?
दो साल के मुख्य न्यायाधीश कार्यकाल में क्या अन्य राजनेताओं के साथ “सौहार्दपूर्ण” संबंध रहे हैं?
क्या उन्होंने “सत्ता के विभाजन” को सिर्फ इसलिए नजरअंदाज किया क्योंकि उनका कार्यकाल जल्द खत्म हो रहा है?
एक निजी हिंदू अनुष्ठान को फोटो-ऑप के रूप में पेश करने का विचार किसका था? बीजेपी आईटी सेल का?
क्या महाराष्ट्रीयन ‘टोपी’ पहले से उपलब्ध थी या प्रधानमंत्री इसे अपने साथ लाए थे?
क्या उन्हें इस बात का एहसास नहीं था कि महाराष्ट्र चुनाव जल्द होने वाले हैं?
क्या गैर-हिंदू वादी अब उनके सामने निष्पक्ष न्याय की उम्मीद कर सकते हैं, खासकर इस स्पष्ट कदम के बाद?
क्या उन्होंने इस राष्ट्रीय आक्रोश के बाद अपने पद से इस्तीफा देने पर विचार किया है?
निजी अनुष्ठान की वीडियो रिकॉर्डिंग करने का idea किसका था.


