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सुख-दुख

23 की उम्र में इंदिरा गांधी जैसी पीएम को झुका देने वाले छात्रनेता थे सीताराम येचुरी

अमिताभ श्रीवास्तव-

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी एक विलक्षण शख्सियत थे। बेहद सुदर्शन, शालीन, हाजिरजवाब राजनेता जो छात्र राजनीति के दौरान जे एनयू के अध्यक्ष रहे और इंदिरा गांधी को जेएनयू के चांसलर पद से इस्तीफ़ा देने के लिए आंदोलन किया। वो तस्वीर देश के तमाम छात्र नेताओं के लिए एक सुनहरी नज़ीर है जिसमें युवा सीताराम येचुरी इंदिरा गांधी को ज्ञापन पढ़ कर सुनाते दिख रहे हैं और उनके बग़ल में खड़ी इंदिरा गांधी मुस्कुराती हुई उन्हें देख रही हैं।

क्या दौर था वह, क्या लोग थे वो! ऐसे छात्र नेता थे जो प्रधानमंत्री को झुका दें, घेर लें और ऐसे प्रधानमंत्री भी जो छात्रों की बात सिर झुका कर मुस्कुरा कर सुन लें।

आज ऐसी संभावनाओं के बारे में सोचना भी अजीब लगता है।

घने घुंघराले बालों वाले, मुस्कुराते, खुल कर हंसते, सिगरेट के कश लगाते, नफ़ासत पसंद इन्सान, बातचीत में राजनीति के अलावा क्रिकेट और सिनेमा से भी उद्धरण देने वाले मृदुभाषी सीताराम येचुरी हमारी पीढ़ी के न जाने कितने नौजवानों के हीरो होते थे। उनके व्यक्तित्व में एक जबरदस्त आकर्षण था।

येचुरी कोई जन नेता, जन नायक नहीं थे लेकिन एक बहुत सुलझे हुए व्यवहारिक मार्क्सवादी रणनीतिकार के तौर पर न सिर्फ मार्क्सवादी राजनीति में बल्कि देश में पहले गैर कांग्रेस और बाद में गैर बीजेपी विपक्ष के गठजोड़ खड़े करने और सरकारें बनाने की राजनीति में उनकी एक दमदार मौजूदगी रही।

नब्बे के दशक में यूनाइटेड फ़्रंट, बाद में यूपीए और हाल में इंडिया गठबंधन में वामपंथी उपस्थिति का प्रमुख चेहरा रहे सीताराम येचुरी। यूनाइटेड फ़्रंट के दौर में वामदलों की राजनीति की कवरेज के सिलसिले में सीपीएम के दफ्तर गोपालन भवन और सीपीआई के मुख्यालय अजय भवन जाना रूटीन होता था। तब सीताराम येचुरी, हरकिशन सिंह सुरजीत, ए बी बर्धन, डी राजा, अतुल अनजान इन सबसे बाइट लेने और ख़बर लेने के लिए मुलाक़ातें होती थीं।

पोलित ब्यूरो की बैठक में ज्योति बसु आए तो रिपोर्टरों की मंडली गोपालन भवन के मुख्य दरवाज़े को घेर कर खड़ी हो गई। ज्योति बसु नीचे उतरे तो भीड़ देख कर एकदम आगबबूला। गुस्से से डाँटते हुए बोले- गेट आउट, गेट आउट। सहमे रिपोर्टरों के लिए येचुरी राहत बन कर आए।

सीताराम येचुरी.. पी सी जोशी, ज्योति बसु, बुद्धदेव भट्टाचार्य की कड़ी वाले वामपंथी नेता थे। कमलेश्वर की अंत्येष्टि पर लोदी रोड के श्मशान गृह में शोक विह्वल प्रभाष जोशी को ढाढ़स बँधाते सीताराम येचुरी, ज्योति बसु के निधन के बाद देहदान के लिए उनके पार्थिव शरीर को ले जाते हुए सूची आँखों से देखते हुए सीताराम येचुरी, संतान की क्षति पर बेहद संयत सीताराम येचुरी की गरिमामय छवियाँ उनके बड़प्पन की याद दिलाती रहेंगी।

सीताराम येचुरी ने भी देहदान का संकल्प लिया था। उनका पार्थिव शरीर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को सौंप दिया जाएगा। उससे पहले 14 सितंबर को दिल्ली के गोल मार्केट स्थित गोपालन भवन में उनके अंतिम दर्शन किये जा सकेंगे।

अब ऐसे नेता होना बहुत मुश्किल है। विनम्र श्र्द्धांजलि।

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