कन्हैया शुक्ला-
छत्तीसगढ़ के पिछले विधानसभा चुनाव में महादेव एप मुख्य मसला था. जिसको बीजेपी ने खूब मसाला लगा कर जनता के सामने एक बड़ा मुद्दा बना दिया था. नतीज़न छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार और ख़ासतौर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को खूब बदनाम किया गया. पूर्व सीएम पूरे देश में सट्टा संरक्षक के नाम से कुख्यात हुए. पर ये एप वाला मामला क्या सिर्फ़ बीजेपी का एक चुनावी खेल था? जिसको भूपेश बघेल भांप नहीं पाए।
बहरहाल, राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के 9 महीने बाद खुशियां दुबई से आई हैं. महादेव सट्टा एप का मालिक सौरभ चंद्राकर दुबई में पकड़ लिया गया है. माना जा रहा है कि भारतीय जांच एजेंसियां जल्द ही उसे भारत ले आएंगी.
महादेव एप मामले में बीजेपी ने खूब तांड़व मचाया. छाती पीट-पीट कर जनता को समझाया कि भूपेश ने लूट लिया छत्तीसगढ़ को. यहां तक कि दनादन FIR की गईं. दुबई से वीडियो और बयान आया जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर आरोप लगाया गया. इस मामले में कई छोटे-मोटे चिरकुट्स आरोपी भी पकड़े गए. जिनके ब्यान में कई बड़े अधिकारियों और तत्कालीन सत्ता के मज़बूत लोगों का नाम भी आया की वो भी महादेव एप में डूबकी लगा रहे हैं..पर हुआ क्या?
पिछले 9 महीने में कुछ भी नहीं हुआ, उल्टा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ही बीजेपी की सरकार पर लगातार आरोप दाग रहे हैं कि अब कौन चला रहा है ये ऐप? क्यों नहीं बंद होता है महादेव ऐप? बात तो भाई बघेल की सही है..क्योंकि इस मामले में जिन-जिन के ऊपर आरोप लगे भले वो अधिकारी हों या सत्ता के मज़बूत लोग किसी के ऊपर पिछले 9 महीने से कोई कार्यवाही नहीं हुई.
इतना ही नहीं जिन-जिन के नामों की चर्चा थी उन सब को सायं-सायं वाली सरकार में अभयदान मिला हुआ है. लग रहा है कि छत्तीसगढ़ के तेज़-तर्रार और भ्रष्टाचार को बिल्कुल पसंद न करने वाले माननीय गृहमंत्री विजय शर्मा अपने ही विभाग के उन अधिकारियों को भी गंगा स्नान करवा चुके हैं जिन पर तथाकथित आरोप लगा था कि उन सब तक इस एप का पैसा पहुंचाया जाता था. अब वो सब भी लग रहा है कि शुद्ध हो चुके हैं तो फिर अकेले भूपेश बघेल ही निशाने पर क्यों हैं? है न सवाल..
ये सवाल तो बनता ही है कि क्या इस गिरफ़्तारी के पीछे राजनैतिक लाभ है ..?
असल में आज-कल पूर्व मुख्यमंत्री धरातल पर उतरकर छत्तीसगढ़ सरकार के काम-काज की पोल खोलने में लग गए हैं और लगातार सायं-सायं सरकार की नाकामियों को लेकर सोशल मीडिया में धुआंधार मोर्चा संभाल रहे हैं, तो क्या दुबई से की गई गिरफ्तारी से इनके ऊपर नकेल कसने की तैयारी की जा रही है? या सच मे बीजेपी इस मामले में सच सबके सामने लाएगी..?
वैसे सच सामने आएगा इस पर तो खुद बीजेपी वालों को ही विश्वास नहीं हो रहा, क्योंकि आज के समय में छत्तीसगढ़ में अगर फिर से चुनाव हो जाये “वैसा तो ऐसा संभव नहीं है” पर पिछले 9 महीने के कार्यकाल की समीक्षा के बाद चुनाव हो तो लोगों का कहना है कि बीजेपी को बीजेपी के लोग ही हरवा देंगे. कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भी इस तरह का सवाल कई बार सोशल मीडिया पर उठा चुके हैं कि इस समय प्रदेश का नेतृत्व कौन कर रहा है..? सुपर सीएम कौन है..? और सीएम कितने हैं..? ये समझ से परे है.. कौन चला रहा है एक पूर्व IAS जो इस समय मंत्री हैं क्या प्रदेश चला रहे है..?
हालांकि, भूपेश बघेल की इस तरह की बातें बीजेपी को चुभने तो लगी हैं. वैसे ये सवाल और चुभन बीजेपी खेमे में भी है. वो बीजेपी वाले जो पिछले 5 साल सिर्फ़ कांग्रेस की सत्ता के विरोध में पार्टी के साथ थे और आज उनकी भी कोई पूछ नहीं है. उनको भी नहीं पता है कि प्रदेश की सत्ता चल कहाँ से रही है?
कुछ लोगों का कहना है कि जो लोग कांग्रेस सरकार के समय दिल्ली में सरकारी नौकर थे अब वो छत्तीसगढ़ में मालिक बन के आ चुके हैं. ख़ास करके इस समय छत्तीसगढ़ प्रदेश में 2005 बैच का जलजला है. बाक़ी सब चुप-चाप जी-हजूरी में लगे हैं. पर शायद छत्तीसगढ़ की बीजेपी को ये समझना चाहिए कि अगली बार अगर फिर से कांग्रेस सरकार आएगी तो ये सब सरकारी नौकर लुटिया डुबो के दिल्ली निकल लेंगे!
बहरहाल, महादेव ऐप के मालिक की गिरफ़्तारी के बाद निशाना किस पर तय होगा, क्या ये भी राजनैतिक लाभ से ही जुड़ा रहेगा..? नहीं तो 9 महीने में कम से कम राज्य की बीजेपी सरकार उन लोगों के ख़िलाफ़ कुछ न कुछ एक्शन जरूर लेती जिस का ढोल जनता में पीट के ये सत्ता में आये हैं!


