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डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुईं आजतक की ऋचा मिश्रा, महाराष्ट्र का नंबर पुलिस ने ट्रेस क्यों नहीं किया?

राजीव रंजन झा-

ज तक की पत्रकार ऋचा मिश्रा ने जिस तरह से डिजिटल ऐरेस्ट की पूरी आपबीती सुनायी है, वह सिहराने वाली है।

लेकिन उससे भी अधिक सिहराने वाली बात है हमारे सिस्टम की बेरुखी। आपको ठगने की कोशिश की गयी, मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया गया कि किसी को अपना जीवन नष्ट जान पड़ने लगा। लेकिन यह हमारे सिस्टम के लिए कोई अपराध ही नहीं है, क्योंकि इसमें एक भी रुपया ठगा नहीं जा सका।

क्या वह कॉल पाकिस्तान से आयी थी? नहीं। किसी और देश से आयी थी? नहीं। वह कॉल 00918380889795 नंबर से आयी। सर्च कीजिए, यह नंबर बहुत-से लोगों ने रिपोर्ट कर रखी है। महाराष्ट्र का नंबर है, वीआई का है।

किसने सिम लिया, कोई कागज दिया या नहीं? पुलिस ने अब तक इस नंबर को ट्रेस क्यों नहीं किया? हफ्ते भर से ज्यादा समय से लोग ट्रू कॉलर पर इसे रिपोर्ट कर चुके हैं। न पुलिस, न फोन कंपनी, किसी को परवाह ही नहीं है क्या?

नया सिम लेने के समय आपको अंगूठा लगा कर अपनी बायोमीट्रिक पहचान देनी पड़ती है या नहीं, जो दुनिया में सिर्फ एक ही व्यक्ति की हो सकती है? अगर सही कागज और बायोमीट्रिक पहचान के साथ वह सिम लिया गया, तो उस तक पहुँचने में पुलिस को कितना समय लगना चाहिए? और अगर आज भी फर्जी कागज, फर्जी पहचान, फर्जी बायोमीट्रिक पर सिमकार्ड लिये जा सकते हैं, तो यह आधार वगैरह का झमेला क्यों पाला है?

हर दिन छोटी-बड़ी हजारों या लाखों ऐसी जालसाजियाँ हो रही हैं, लेकिन यह हमारे देश में कोई मुद्दा ही नहीं है, क्योंकि इसके चलते एक भी वोट इधर से उधर नहीं होने वाला।

सरकारें और उनकी पुलिस जिस दिन चाह लेगी कि साइबर फ्रॉड नहीं होने देना है, उसी दिन से साइबर फ्रॉड पर अंकुश लग जायेगा। या तो सरकारों (केंद्र और राज्य सभी) को इनसे कोई लेना-देना ही नहीं है, या फिर लोगों को ठीक ही शक-सुबहा होता है।

बहरहाल, ठगी का शिकार होना एक अलग बात है, पर क्या इसमें मानसिक प्रताड़ना, छद्म व्यक्तित्व जैसी कितनी ही गंभीर धाराएँ नहीं बनेंगी? पर कोई साधारण थाना हो या साइबर फ्रॉड के लिए बनी हेल्पलाइन, सबके लिए इन सब चीजों का कोई मतलब ही नहीं है। जैसे कि ठगे नहीं गये, तो कुछ हुआ ही नहीं। मानसिक प्रताड़ना हुई, उसका कोई संज्ञान नहीं।

जिन ठगों को पकड़ने के लिए आपका विभाग बनाया गया, उन ठगों के बारे में कोई आपको सूचना दे रहा है, पर कोई मतलब नहीं। आज तक एक मजबूत संस्थान है। आशा की जा सकती है वह इस मामले को यूँ ही गुजर जाने नहीं देगा, इसे ऐसे तार्किक परिणाम तक पहुँचायेगा जो आम लोगों के लिए भी एक उदाहरण बने।

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