कच्छ में जमीन पर अदानी का राज रेगिस्तान में भी अदानी का राज और समंदर में भी अदानी का ही राज, शिकायतों के बावजूद सरकार कोई कार्यवाही नहीं करती…

दतेश भावसर-
अदानी का नाम इस समय पूरे विश्व में पूरी प्रमुखता से लिया जा रहा है लेकिन यह अदानी कैसे अपना साम्राज्य खड़ा कर रहा है उसकी कहानी भी जाननी बेहद जरूरी है। पूरे देश ने अडानी का साम्राज्य कुछ साल पहले से स्थापित हुआ देखा है परंतु गुजरात में तो अदानी पिछले 20 सालों से राज कर रहा है। गुजरात सरकार के चार हाथ होने के कारण कच्छ जिले की सिविल हॉस्पिटल जो की कच्छ में 2001 में आए भयानक भूकंप के बाद प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी की सहायता कोष में से बना था, लेकिन यह हॉस्पिटल अदानी को 99 साल की लीज पर दे दिया गया।
अदानी ने कच्छ जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित किया है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज को अस्पताल की जरूरत होती है, अदानी को खर्च न करना पड़े इसलिए कच्छ की एकमात्र सिविल हॉस्पिटल अदानी को दे दी गई। मेडिकल कॉलेज चलाने के लिए इस अस्पताल के कारण ही अदानी को मेडिकल कॉलेज की अनुमति मिली।

अदानी को सिविल हॉस्पिटल देते समय कई शर्तें रखी गई थीं, उन शर्तों का अदानी खुलेआम उल्लंघन किये जा रहा है। सिविल हॉस्पिटल का दरवाजा होने के कारण किसी भी दाखिल मरीज से पैसे नहीं लिए जा सकते लेकिन अदानी इस अस्पताल में कई तरह के चार्ज ले रहा है।
MRI सीटी स्कैन यहां तक की X-RAY के भी पैसे ले रहा है, जबकि MOU में लिखा हुआ है की अदानी किसी भी दाखिल मरीज से पैसे नहीं ले सकता। अदानी को यह हॉस्पिटल मिलने के बाद सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनना था लेकिन कई वर्षों के बाद भी यह सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल नहीं बना। कई महत्वपूर्ण डॉक्टर आज भी नहीं हैं, दिल के डॉक्टर, कैंसर के डॉक्टर, दिमाग के डॉक्टर आज भी नहीं है इसलिए अदानी ने सिर्फ मेडिकल कॉलेज के नाम पर हॉस्पिटल लिया है पर कच्छ की जनता को सुविधा देने में असफल रहा है।
जब अदानी को हॉस्पिटल सौंपा गया था, तब सरकारी एम्बुलेंस भी उनको दी गई थी, वह सारी एम्बुलेंस कबाड़ हो गई पर अदानी ने नई एम्बुलेंस नहीं खरीदी जबकि उनको नई एम्बुलेंस खरीद कर लोगों की सेवा में रखनी थी अब मरीज निजी एम्बुलेंस में जाते हैं और हजारों रुपए खर्च करते हैं।
सरकार की तरफ से मिलने वाली मुफ्त दवाइयां अदानी द्वारा मरीज को फ्री देनी हैं, किसी कारणवश अगर वह दवाइयां सप्लाई में शॉर्टेज आती हैं तो अदानी वह दवाई बाजार से खरीद कर मरीज को मुफ्त में देगा यह शर्त है, लेकिन सरकार की तरफ से मिलने वाली दवाइयां भी अदानी अस्पताल में फ्री में नहीं मिल रही और मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से हजारों रुपए खर्च करके वह दवाइयां लेनी पड़ती हैं।
जब अदानी को यह हॉस्पिटल सौंपा गया था तब यह शर्त रखी गई थी कि समय अंतर पर यह 300 बेड का हॉस्पिटल है इसको 750 बेड का हॉस्पिटल बनना होगा पर अदानी ने अभी तक एक भी बेड की वृद्धि नहीं की है। जब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का इंस्पेक्शन आता है तब किराए के मरीजों को बुलाकर बिस्तरों में लेटा दिया जाता है, ऐसे कई स्टिंग ऑपरेशन स्थानीय मीडिया ने किए हुए हैं।
नियमों के अनुसार बेसमेंट में सिर्फ पार्किंग या स्टोरेज हो सकता है, सिविल हॉस्पिटल के प्लान में भी बेसमेंट में OPD नहीं है लेकिन अदानी ने कच्छ के सिविल हॉस्पिटल का पूरा ओपीडी विभाग बेसमेंट में शिफ्ट कर दिया है, सामान्य बारिश में भी बेसमेंट में दो से तीन फीट पानी भर जाता है, जबकि ज्यादा बारिश में अगर बेसमेंट पूरा भर गया तो हजारों लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। आयुष्मान कार्ड में जो मरीज आता है उसको वापस घर जाने के लिए किराया देना होता है, लेकिन हर साल करोड़ों रुपए मरीज को किराया न देकर भ्रष्टाचार करता है।
ऐसे विभिन्न 13 मुद्दों को लेकर कच्छ के लोगों ने अदानी के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है। पहले फेस में एक दिन का धरना और ज्ञापन दिया गया, एक माह के बाद अगर कलेक्टर कोई कार्यवाही नहीं करेगा तो भूख हड़ताल शुरू की जाएगी और आमरण अनशन होगा।


कच्छ के लोग अब अदानी से त्रस्त हो चुके हैं अगर अस्पताल में कोई अडानी के खिलाफ आवाज उठाता है तो झूठी FIR करके उन लोगों को पुलिस के द्वारा परेशान किया जाता है। हो सकता है प्रधानमंत्री से नजदीकी के कारण अदानी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जा रही हो।
कच्छ की जनता के लिए यह बड़ी पीड़ा दायक स्थिति हो चुकी है। करीब कच्छ के 30 लाख लोग निजी हॉस्पिटलों में लाखों रुपए खर्च करके इलाज करवा रहे हैं, जबकि अच्छा इलाज सरकार की तरफ से फ्री में मिलना चाहिए और वह भारत के नागरिक का मौलिक अधिकार है पर गुजरात सरकार अदानी के खिलाफ कई शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं करती, यह बहुत बड़े चिंता का विषय है।
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