संजय शर्मा-
मार्च की कोई तारीख थी जब यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से फ़ोन आया कि वे मुझे बोलने के लिए बुलाना चाहते हैं। मेरे लिए यह बहुत खुशी की बात थी कि अमेरिका के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय ने मुझे आमंत्रित किया है। पर मुझे आने वाले दिनों में होने वाली मुसीबतों का अंदाजा नहीं था।
यूनिवर्सिटी ने अमेरिकी दूतावास को मेरा वीजा जल्दी बनाने का पत्र भेज दिया। मैं कोलकाता पहुंचा, जहां मेरा वीजा के लिए इंटरव्यू होना था। लाइन में लगभग पचास लोग थे, जिनमें से मात्र दस प्रतिशत लोगों के ही पासपोर्ट रखे जा रहे थे, बाकी सभी को वापस कर दिए जा रहे थे। जिनका पासपोर्ट रखा गया, मतलब उनका वीजा अप्रूव हो गया।
मुझसे कुछ सवाल पूछे गए और मुझे बधाई दी गई कि मेरा वीजा हो गया है। पासपोर्ट एक हफ्ते में आ जाएगा। मैंने यूनिवर्सिटी को यह जानकारी दी और उन्होंने ट्वीट कर दिया।
दस दिन बीत गए, लेकिन पासपोर्ट नहीं आया, तो मैंने दूतावास और यूनिवर्सिटी को मेल लिखा कि कार्यक्रम के लिए बीस दिन बचे हैं, कृपया जल्दी पासपोर्ट भेज दें। मिशिगन यूनिवर्सिटी ने भी पत्र भेजे, और मैं हर तीसरे दिन मेल करता रहा कि अब इतने दिन बचे हैं। हर बार वही जवाब आता कि प्रक्रिया में है और जल्दी मिल जाएगा।
आखिरकार, वह दिन निकल गया जब कार्यक्रम था, लेकिन न तो मुझे वीजा मिला और न पासपोर्ट। इसके बाद कई दिन बीत गए, और हम लगातार मेल करते रहे। हर बार वही जवाब मिलता कि प्रक्रिया में है।
अमेरिका में रहने वाले मेरे मित्र भी हैरान थे कि अमेरिकी दूतावास इतने दिन पासपोर्ट नहीं रखता। तब पता चला कि अमेरिका भी भारत सरकार के दबाव में है।
लगभग सात महीने बाद मैंने विदेश मंत्री को पत्र लिखा। मैंने लिखा कि मुझे जानकारी मिली है कि आपकी सरकार के दबाव में मेरा पासपोर्ट अमेरिकी दूतावास में रोका गया है। आपकी सरकार को शक है कि मैं अमेरिका में आपकी सरकार का सच दिखा सकता हूं, जो आपको पसंद नहीं आएगा।
मैंने लिखा कि या तो आप अमेरिकी दूतावास से मेरा पासपोर्ट वापस दिलवाएं, अन्यथा मुझे नया पासपोर्ट जारी करवाएं। अगर ऐसा नहीं होगा, तो मैं इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाऊंगा।
हैरानी की बात यह थी कि जो पासपोर्ट कई मेल के बाद भी नहीं मिला, वह पत्र लिखने के आठ दिन के भीतर ही मिल गया।
इस बीच विदेशों से कई निमंत्रण आए, लेकिन पासपोर्ट न होने के कारण मैं जा नहीं सका। अब जब पासपोर्ट आ गया है, तो कुछ दिनों के लिए अलविदा हिंदुस्तान। अपनी मस्ती की पाठशाला कुछ दिन विदेश में।


