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जुग जुग जियो असली टीआरपी एंकर रवीश कुमार!

विक्रम नारायण सिंह-

रवीश कुमार एनडीटीवी के दिनों में खुद को जीरो टीआरपी एंकर कहते थे. यूट्यूब में आने के बाद देश को पता चला असली टीआरपी एंकर तो रवीश ही हैं.

आज रवीश कुमार 50 वर्ष के हो गए हैं. हमने उन्हें देखा है मोदी सरकार से लोहा लेते, सरकार से सवाल करते और इस वजह से अपनी नौकरी खोते, चैनल खोते. हत्या की धमकी, बीवी, बच्चियों से दुष्कर्म की धमकी से आज तक अविचलित रवीश कुमार को.

गोदी मीडिया कहता था, कोई रवीश को नहीं सुनता लेकिन उसी रवीश ने करोड़ों बेरोजगार युवाओं की आवाज उठाई, हजारों युवाओं को उनकी रिपोर्ट से जॉब मिला, CAA NRC के खिलाफ आवाज बुलंद किया, UAPA के तहत कैद बेगुनाहों की आवाज उठाई.

हर दिन रात 9 बजे रवीश कुमार धारा प्रवाह बोलते देश को आईना दिखाते थे. बाद में मालिक ने उनके डर से साजिश कर चैनल ही खरीद लिया.

चेहरे में बढ़ती झुर्रियां और पकते बाल ने बताया रवीश ने पत्रकारिता धर्म से कभी समझौता नहीं किया, उनकी आँखे तब भी जुगनू की तरह चमकती थी और आज भी चमकती है.

प्रणय रॉय ने उन्हें तराशा और बिहार की मिट्टी को देश और दुनिया भर में सींचा. और आज अगर पत्रकारिता कहीं किसी रूप में जिंदा है तो उसके पीछे रेमन मैग्सेसे से पुरस्कृत रवीश कुमार हैं. रवीश कुमार होना आसान नहीं हैं. जुग जुग जियो रवीश कुमार..


कनक तिवारी-

आज रवीश को जन्मदिन की बधाई हम आप सबकी ओर से।

पूरा देश ही रवीश का कायल है, उनको छोड़कर जिनके विचार घायल हैं। रवीश को संविधान, कानून और राजनीति की मेरी दृष्टि और समझ अच्छी लगती रहती है। इसलिए कुछ चीज़ों को लेकर हमारी चिंताएं स्वाभाविक और एक साथ हैं।

हमने कई मामलों को, एक दूसरे का आकलन भी जानने की कोशिश की है। वैसे उम्र में तो रवीश मेरे बेटे से छोटे हैं लेकिन अपनी बौद्धिक और नैतिक औकात में कितने बड़े हैं! अभी तो लड़ाई जारी रहेगी हमारी पीढ़ी के बाद भी। लेकिन कायरों की तरह जीना, तर्क के बदले उन्माद, सहनशीलता के बदले आक्रामकता, सेवा के बदले शोषण, हमारे राजनीतिक जीवन का चरित्र बनाए जा रहे हैं। यह जानना बहुत सुकून का हुआ कि रवीश ने कहा कि कभी-कभी मन कहता है सारा काम छोड़कर एक साल की छुट्टी लूं और केवल गांधी को पढ़ता रहूं।

रवीश पर हमले और तेज हो गए हैं। अभी आगे और तेज होने वाले हैं। लेकिन वे अपने रास्ते पर अडिग दीखते हैं। इतिहास उनकी ही पड़ताल करता है। उनके ही साथ रहता है जो इतिहास के साथ रहते हैं, फौरी घटनाओं के साथ नहीं।

रवीश ने कई बार उल्लेख किया कि आज राजनीति में अनैतिकता क्यों बढ़ती जा रही है। सामाजिक चरित्र में नैतिकता होनी चाहिए। गांधी जी यही तो चाहते थे। उनके प्रशंसक और प्रकाशक उन्हें दुर्लभ और बेहतर किताबें भेजते रहते हैं। जो वे पढ़ रहे हैं। मेरी किताब संविधान और हम भारत के लोग पढ़ते-पढ़ते उन्होंने मुझे बताया कि मैं उसे पढ़ रहा हूं।

मनुष्य ही रवीश की केंद्रीय चिंता का विषय है बल्कि चिंता का केंद्रीय विषय है। । वे बहुत अच्छे श्रोता भी हैं। रवीश कुमार को लगातार प्रेरणा देना कि उन्हें आग की लौ पाले रखना है, जो देश की रोशनी के लिए बहुत ज़रूरी है। उस रास्ते पर कंधे से कंधा मिलाकर थोड़ी बहुत भी अगर अपनी तरफ से कोई सहयोग देने की कोशिश करें तो मैं समझता हूं कि रवीश कुमार की कद काठी के चरित्र के व्यक्तियों को और समाज के सेवकों को एक ऐतिहासिक मदद मिल सकती है।

यह भी दिलचस्प है कि रवीश अपनी बौद्धिक कद काठी के साथ-साथ शारीरिक कद काठी में भी काफी ऊंचे और ताकतवर हैं। 6 फुट का रोबीला व्यक्तित्व और शरीर उनकी लेखनी के भी काम आता है क्या? ऐसा भी सोच कर बहुत रोमांच होता है! मनुष्य के पक्ष में पैरवी करते रवीश कुमार को मैंने कभी उन्मादी बौद्धिक योद्धा नहीं समझा। वह ज़िंदगी की कड़वी सच्चाई के बहुत करीब हैं। कांटे लगते रहने के कारण भी उनमें वह कोमलता नष्ट नहीं होती जो मनुष्य को आगे बढ़ाने का संबल बनती है।

रवीश शायद सबसे आगे हैं, कुछ अन्य लोगों के साथ जो विभाजक रेखा लेखन और वाक् की शक्ति को मिटाते चलते हैं। रवीश कहते भी रहते हैं कि आपने बहुत काम किया है।

पता नहीं अच्छे विचारकों लेखकों और पत्रकारों का इस देश में क्या भविष्य होने वाला है! काश! हमारे मतदाता समझ पाते कि जिन लोगों को वोट देकर वह सत्ता की कुर्सी पर बिठा रहे हैं, कहीं वह अपनी ज़िंदगी का सौदा करने के लिए सुपारी तो नहीं दे रहें हैं। इस आदमी के पास देश को प्यार करने वाला जेहन है। वहीं तो देश भक्ति का ज्वार भाटा है। वहीं तो खून बहता है जो विचारों की कौंध पूरे देश में पैदा करता है.. मैंने अपनी दो किताबें रवीश को समर्पित की हैं।

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2 Comments

2 Comments

  1. Sanjeev Kumar Singh

    December 6, 2024 at 10:30 am

    शुरुआत में हमें लगा था कि यह व्यक्ति टारगेट कर न्यूज़ बनाकर चलाकर सुर्खियों में रहता है। परन्तु बाद में हमें पता चला कि असली विपक्ष की भूमिका यही निभाता है। कांग्रेस को सत्ता से हटाने में और भाजपा को सत्ता में बिठाने में रवीश जी की भूमिका अविस्मरणीय है। अब बीजेपी को सत्ता में रहते हुए खामियां उजागर करने में माहिर है। आज पत्रकार बंधुओं को सीखने की जरूरत है। रवीश जी की पत्रकारिता की आज देश को जरूरत है। एक पत्रकार के रूप में मैं संजीव कुमार सिंह उन्हें जन्म दिन की शुभकामनाएं देता हूँ। धन्यवाद।। संजीवनी बिहार।।

  2. Firoz Akhtar

    December 6, 2024 at 5:37 pm

    आज पूरी दुनिया में रवीश कुमार जी की पहचान एक निडर बेबाक और पीड़ितों की आवाज़ उठाने वाले सच्चे पत्रकार की है।जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

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