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सियासत

महाकुंभ 2025 की आड़ में भक्तों को खुलेआम लूट रहीं हवाई कम्पनियां!

जियाउर्रहमान-

महाकुंभ 2025 का आयोजन यूपी के प्रयागराज में भव्य तरीके से चल रहा है । दुनिया भर से सनातन प्रेमी प्रयागराज पहुंच रहे हैं । यूं तो योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार दोनों महाकुंभ का क्रेडिट लेने के लिए हर रास्ता अपना रहीं हैं लेकिन किसी का ध्यान महाकुंभ की आड़ में भक्तों को लूट रहीं हवाई कंपनियों पर नहीं है। या ये कह सकते हैं कि दोनों ही भाजपा सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू कीजरपू के संरक्षण में यह लूट खुलेआम चल रही है।

मेरे एक मित्र का आज कॉल और कहा कि महाकुंभ चलते हैं तो मैने ऐसे ही दिल्ली से प्रयागराज के लिए हवाई टिकट के रेट देखने के लिए फोन उठाया तो मैं हैरत में रह गया। मोदी जी ने एक भाषण में कहा था कि मैं हवाई चप्पल वालों को हवाई जहाज में देखना चाहता हूं लेकिन महाकुंभ के अवसर पर हकीकत में तस्वीर इसके ठीक उलट है। दिल्ली से प्रयागराज का हवाई जहाज का 23 जनवरी का एक यात्री का किराया करीब 40 हजार से शुरू है और 60 हजार तक है। मैने फिर मुंबई से प्रयागराज का किराया चेक किया तो वहां से भी 23 जनवरी का प्रति यात्री किराया करीब 33 हजार से शुरू होकर करीब 66 हजार तक है।

देहरादून से प्रयागराज का 24 जनवरी का किराया प्रति यात्री करीब 50 हजार है। वहीं, भोपाल से प्रयागराज का 24 जनवरी का किराया 50 हजार से शुरू होकर करीब 70 हजार तक है। 24 जनवरी का ही हैदराबाद से प्रयागराज का प्रति यात्री किराया करीब 42 हजार से शुरू होकर 60 हजार तक है।

सरेआम भक्तों की जेब पर डाका डाल रहीं इन कंपनियों के बारे में नागरिक उड्डयन मंत्रालय और सरकारों को न पता हो, हो ही नहीं सकता। वैसे, रेलवे का भी यही हाल है। अधिकांश ट्रेन फुल हैं या फिर ब्लैक में टिकट कई गुने दामों पर मिल रहे हैं। आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि आम आदमी या मोदी जी की भाषा में कहें तो हवाई चप्पल वाला आदमी हवाई जहाज में कैसे यात्रा कर सकता है ? लेकिन अफसोस इस बात का है कि केंद्र और अधिकांश प्रदेशों में भाजपा की सरकारों का कोई प्रतिनिधि इस लूट के विषय में बोलने को तैयार नहीं है। ऐसा लगता है जैसे सांसदों, विधायकों और जिम्मेदारों ने अपनी जुबान सिलकर हवाई कंपनियों की इस डकैती को मूक सहमति दे दी है।

खैर जो भी हो, मेरा मानना है कि सनातन प्रेमियों और करोड़ों भारतीयों की आस्था के प्रतीक कुंभ तक पहुंचने के लिए सरकार को सस्ते और सुलभ तरीके अपनाने चाहिए थे। हवाई कंपनियों के किराए पर अंकुश लगता, जायज रेट में हवाई और रेल टिकट की व्यवस्था होनी चाहिए थीं। हवाई कंपनियों को आस्था में अवसर खोजने से रोकने की व्यवस्था होती और हवाई उड़ानों की संख्या भी बढाई जानी चाहिए थी ।

अरे हां, मैं तो भूल ही गया कि देश में यह दौर आस्था और भक्ति के नाम पर लूट करने वालों के अवसर का है। जिम्मेदार जो भी हो लेकिन मेरा मानना है कि करोड़ों लोगों को धर्म और आस्था के नाम पर इस तरह खुलेआम नहीं लूटा जाना चाहिए। आम नागरिकों और सनातन प्रेमियों को भी हर बात भक्ति में लीन होकर स्वीकार नहीं करनी चाहिए । इस लूट के खिलाफ एकजुट होकर विभिन्न सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर ही सही लेकिन आवाज उठानी चाहिए ।

वैसे मीडिया से तो सिर्फ नफरत फैलाने वाले धार्मिकों मुद्दों और सत्ता की चाटुकारिता वाले मुद्दों पर हो खबरें चलाने की उम्मीद है लेकिन फिर भी कहीं किसी संपादक या मीडिया घराने में जरा भी नैतिकता और जनसरोकार के मुद्दे पर आवाज उठाने की हिम्मत बची हो तो सरकार से सवाल जरूर करना चाहिए।

जय हिंद

(लेखक, जियाउर्रहमान यूपी की छात्र और युवा राजनीति का चर्चित चेहरा रहे हैं और कांग्रेस से बुलंदशहर में विधायक प्रत्याशी रहे हैं ।)

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