मनीष मिश्रा-
किसी साथी ने एक वीडियो क्लिप भेजी जिसमें 24-25 साल पहले हुई एक डॉन पंचायत का जिक्र हो रहा है।
‘कैबिनेट मंत्री के ऑफिस में डॉन पंचायत’
यह खबर मैंने दैनिक जागरण में वर्ष 2001 में लिखी थी। आइए आपको बताते हैं इस डॉन पंचायत की पूरी दास्तां।
वर्ष 2000 से 2002 के बीच यूपी में मा. राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार थी। कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कैबिनेट मंत्री थे। लखनऊ में उस वक्त बाहुबली अजीत सिंह (दिवंगत) का जलवा-जलजला कायम था।
भाजपा से जुड़े और बाद में सपा के एमएलसी रहे अजीत सिंह को बिना नंबर की गाड़ियों के काफिले में चलने का शौक था। नंबर तो छोड़िए नंबर प्लेट भी नहीं लगती थी उसकी गाड़ी में। तुर्रा यह कि नंबर तो गवर्नर की गाड़ी में भी नहीं होता, अजीत सिंह की गाड़ी उससे ऊपर है, इसलिए यह बिना नंबर प्लेट के चलेगी।
चारबाग की रेस्ट कैंप कॉलोनी में रहने वाले अजीत राजधानी को अपनी जागीर मानते थे।वो पूर्वांचल के किसी माफिया को लखनऊ में पांव जमाने नहीं देना चाहते थे। इस बीच मऊ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी (दिवंगत) ने कृष्ण नगर इलाके में चार बीघे के एक प्लॉट का सौदा कर लिया। अजीत को यह बात नागवार गुजरी। उन्होंने अपने असलहा धारियों को प्लॉट पर बैठाना शुरू कर दिया।
इसे लेकर अजीत और मुख्तार गैंग आमने-सामने आ गए। इससे पहले बात बिगड़ती कैबिनेट मंत्री राजा भैया ने विधानसभा स्थित अपने ऑफिस में एक पंचायत बुलाई जिसमें पूर्वांचल के लगभग सभी बहुबलियों और लखनऊ से अजीत सिंह को आमंत्रित किया गया।
पंचायत में गोरखपुर, रायबरेली, अयोध्या, (फैजाबाद), मऊ, आजमगढ़, प्रयागराज और वाराणसी समय कई जिलों के बाहुबली बुलाए गए जिनमें प्रमुख रूप से अखिलेश सिंह, अभय सिंह समेत मंत्री यशवंत सिंह (मुबारकपुर आज़मगढ़) मंत्री शिवेंद्र सिंह (महराजगंज), राजा राजीव कुमार सिंह (दरियाबाद वाले, अब दिवंगत) और बहुचर्चित मंत्री अमरमणि त्रिपाठी शामिल थे।
पंचायत का मुख्य एजेंडा तो कृष्णा नगर वाला प्लॉट था लेकिन इसके जरिए राजा भैया पूर्वांचल के सभी माफियाओं के बीच समन्वय स्थापित कराना चाहते थे।
उनका तर्क था कि मामला चाहे सरकारी ठेके-पट्टे का हो, रेलवे स्क्रैप की नीलामी का हो या जमीन का, हर व्यक्ति को उसके जिले में प्राथमिकता मिले, चूंकि ये झगड़ा लखनऊ का है तो यहां अजीत सिंह की बात मानी जाएगी। डॉन पंचायत के इस फैसले के बाद मुख्तार को वह जमीन औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ी थी।
Navneet mall Bisen- विधान भवन के बाद ये गोष्ठी भदरी निवास लखनऊ, सप्रू मार्ग पे आयोजित हुई….. उस के कुछ दिनों बाद अजीत सिंह कि अकाल मृत्यु हो गई… उसमे भी रमेश कालिया, लल्लू यादव पहलवान (सूरज पाल यादव के फाइली )इत्यादि का नाम प्रशासन ने लगाया,क्यों कि विधान परिषद के निकाय चुनाव मे सपा से अजीत सिंह थे औऱ भाजपा से रमेश कालिया की पत्नी…. जीत हुई अजीत सिंह की…बाकि तो जिसने किया और जिसने करवाया वही जानता है…!!


