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एशियानेट न्यूज के छह पत्रकारों को POCSO एक्ट में राहत, नशीली दवाओं की रिपोर्टिंग से जुड़ा है मामला

तिरुवनंतपुरम। केरल हाईकोर्ट ने मलयालम समाचार चैनल एशियानेट न्यूज के छह पत्रकारों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज केस को खारिज कर दिया है। यह मामला चैनल के एक विशेष प्रसारण ‘नारकोटिक्स एक गंदा धंधा है’ को लेकर दर्ज किया गया था, जिसमें राज्य में युवाओं के बीच बढ़ते नशे के खतरे को उजागर किया गया था।

प्रसारण को लेकर अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि इसमें नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता की आवाज़ से छेड़छाड़ कर उसकी पहचान उजागर की गई और इसके माध्यम से राज्य सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

हालांकि, न्यायमूर्ति ए बदरुद्दीन ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि वीडियो में पीड़िता का चेहरा बदला गया था और उसकी आवाज़ के प्रयोग का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुँचाना या धोखा देना नहीं था। इस आधार पर अदालत ने न केवल POCSO बल्कि भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत लगे जालसाजी के आरोप भी खारिज कर दिए।

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फैसले में न्यायमूर्ति बदरुद्दीन ने कहा कि यह कार्यक्रम राज्य में नशीली दवाओं के प्रसार के खिलाफ एक मजबूत सार्वजनिक चेतावनी के रूप में सामने आया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि शो ने पुलिस स्टेशनों और आबकारी विभाग के कार्यालयों के आसपास नशीले पदार्थों की उपलब्धता को उजागर किया, जिससे इस सामाजिक खतरे के खिलाफ कार्रवाई की ज़रूरत को रेखांकित किया गया।

अदालत ने मीडिया की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पत्रकारिता को सनसनी के बजाय तथ्यों और संतुलन पर आधारित होना चाहिए। न्यायमूर्ति बदरुद्दीन ने रेटिंग की दौड़ में गहराई से रिपोर्टिंग की जगह सतही कवरेज को तरजीह देने वाले मीडिया रुझानों की आलोचना की और पत्रकारों को नैतिकता, जिम्मेदारी और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने की सलाह दी।

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