यूसुफ किरमानी-
राहुल गांधी भ्रष्ट नहीं हैं…सारी बातें एक तरफ…
कांग्रेस की बुजुर्ग नेता सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने कोर्ट में नेशनल हेराल्ड से जुड़े मामले में चार्जशीट फाइल कर दी है। इससे पहले एक दूसरे मामले में सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को ईडी ने बुलाकर पूछताछ की। वो पैदल ही ईडी दफ्तर चले गए।
इस खबर का कुल संकेत यही है कि 11 साल से सत्ता संभाल रही सरकार को जब कुछ नहीं समझ आया तो उसने अपनी खाल बचाने के लिए यह कार्रवाई करनी पड़ी। जरा सोचिए- 11 साल बाद सरकार यह कहने की हिम्मत जुटा सकी कि गांधी परिवार और उनसे जुड़े नजदीकी लोगों पर कथित भ्रष्टाचार के फलां-फलां आरोप हैं। कोई और देश होता तो अब तक सजा वगैरह सब सुनाई जा चुकी होती और आधी सजा की अवधि भी पूरी हो गई होती।
लेकिन यह बात बहुत साफ है कि सरकार एंड कंपनी की जांच एजेंसी के पास कोई सबूत नहीं है। उनके अधिकारियों ने सरकार को चुप कराने के लिए यह दांव खेला है।
आप आज के राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर डालिए। बिहार में चंद महीने बाद चुनाव है। इस बार नीतीश का डिब्बा गोल है तो बीजेपी किसी भी तरह बिहार की सत्ता चाहती है। लेकिन उसमें आरजेडी और कांग्रेस सबसे बड़ी बाधा है।
आज सुबह जैसे ही तेजस्वी यादव ने दिल्ली में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। सरकार एंड कंपनी के कान खड़े हो गए। लालू यादव परिवार पर अनगिनत मुकदमे पहले ही लादे जा चुके हैं। आए दिन परिवार की अदालतों में हाजिरी लगती रहती है।
आज ही एक खबर आई जिसकी कोई चर्चा मुख्यधारा के मीडिया में नहीं है। चुनाव आयोग ने एक आंकड़ा जारी कर बताया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इलेक्ट्रोरल बांड बंद हो गए। लेकिन राजनीतिक दलों को चुनावी चंदा अभी भी मिल रहा है। बीजेपी लाभार्थी नंबर 1 है। जिन पांच बड़ी कंपनियों या उनके ट्रस्ट ने बीजेपी को चंदा दिया है, उन पर ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स में मुकदमे पेंडिंग हैं या जांच बंद हो चुकी है। और वो कह रहे हैं कि राहुल गांधी भ्रष्ट है।
सरकार एंड कंपनी से राहुल गांधी की छवि की काट नहीं हो पा रही है। गांधी परिवार को भी अब मुकदमे में उलझाए रखने के लिए ईडी को फिर से सक्रिय किया गया है। जो सरकार 11 साल में कुछ न साबित कर पाई हो, अब अपने अफसरों पर बरस रही है। अफसरों ने जैसे तैसे करके एक चार्जशीट बना दी और कोर्ट में पेश कर दी। इस पर जब सुनवाई के दौरान बहस होगी तो आपको इस केस की असलियत पता चलेगी। अगर आज तेजस्वी मिलने न गए होते तो कुछ न होता।
पिछले 11 साल में सरकार का कोई एक्शन ऐसा नहीं है जिनका संबंध चुनाव से न हो। विपक्षी दलों के नेताओं पर कथित भ्रष्टाचार के आरोप में 11 साल गुजर गए लेकिन किसी को आपने जेल जाते देखा?
हमने यह भी देखा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव को टोंटी चोर तक कहा गया। लेकिन टोंटी का पेंच या फेस चुराना तक साबित नहीं कर सके। वो रंगे सियार का जुमला था जिसे रंगे सियार के गोदी मीडिया ने तबियत से उछाला। आप सोचकर देखिए कि जिस अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव को लेकर आरएसएस-बीजेपी का सॉफ्ट कॉर्नर रहा हो, भला वो दल अखिलेश को कभी किसी मामूली आरोप में गिरफ्तार करेगी?
बीजेपी-आरएसएस मुलायम के बेहद शुक्रगुजार हैं कि अयोध्या के जिस मुद्दे को दोनों ने मिलकर खाद-पानी दिया, वही दोनों दल यानी बीजेपी और सपा आज सत्ता के शिखर पर हैं। दोनों अपने-अपने वोट बैंक के टुकड़ों पर पल रहे हैं। अखिलेश को अगर मुसलमान वोट न दे तो एक दिन भी यादव मंडली के सहारे उनकी पार्टी नहीं चल सकती। बीजेपी को अगर ब्राह्मण, क्षत्रिय और बनिया वोट न मिले तो उसकी स्थिति 1992 से पहले की हालत में पहुंच जाएगी। तो बीजेपी और सपा किन्हीं जातियों या समुदायों के लोगों के टुकड़ों पर पल रहे हैं।
कहने का आशय यह है कि भारत में 1990 के बाद के दशक की राजनीतिक लड़ाइयां बहुत आसानी से समझ में नहीं आने वाली हैं। कौन किसके साथ कब और कहां खड़ा है, कुछ नहीं कहा जा सकता। मायावती का हाल आप देख ही रहे हैं। मात्र भ्रष्टाचार के मुकदमे से डर कर वो चुप हो गईं। आंबेडकर और कांशीराम की एक मजबूत विरासत वाली नेता की ऐसी दुर्गति इतिहास ने दर्ज कर लिया है।
आप को अटपटा लगेगा जब मैं अखिलेश या मायावती के लिए ऐसा लिख रहा हूं। लेकिन यकीन मानिए कि अखिलेश और मायावती कभी भी आरएसएस से लड़ने की बात नहीं कहते और न कहेंगे। अकेले राहुल गांधी में ही यह हिम्मत है। अखिलेश का सेकुलर होना अवसरवाद है, राहुल का सेकुलर होना एक विरासत है। माया की खामोशी …ईडी के अभिलेखागार में दफन चंद फाइलें हैं।
बहरहाल, सरकार एंड कंपनी के इस रवैए का अगर विपक्ष ने जवाब नहीं दिया तो हिम्मत खुल जाएगी। अभी तो बस शुरुआत हुई है। राहुल गांधी पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं है। भारत में किसी भी दल के किसी भी नेता ने आज तक राहुल गांधी के ऊपर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगाया है। मैं यह बात सिर्फ राहुल गांधी के लिए लिख रहा हूं।
सरकार एंड कंपनी राहुल गांधी को परेशान तो कर सकती है लेकिन पराजित नहीं कर सकती। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को अपनी तैयारी शुरू कर देना चाहिए। उनके संघर्ष की असल परीक्षा अब शुरू होगी। उन धनवान कांग्रेस नेताओं से कार्यकर्ताओं को उम्मीद नहीं करना चाहिए जो उसके लिए वक्त जरूरत पर पानी की बोतल भी न भिजवा पाएंगे।
- तो सवाल यह है कि क्या अडानी को टैक्स चोर बताने वाला राहुल गांधी भ्रष्ट हो सकता है।
- क्या सरकार एंड कंपनी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाला राहुल गांधी भ्रष्ट हो सकता है।
मुझे पता है। मेरे तमाम दोस्त, रिश्तेदार, साथ काम करने वाले ने पुराने लोग इस पोस्ट से नाराज हो जाएंगे। लेकिन अगर ये बात मैं अब नहीं कहूंगा तो कब कहूंगा। मैं कांग्रेस पार्टी का कार्यकर्ता या नेता नहीं हूं। लेकिन राहुल गांधी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने को जायज कैसे ठहरा सकता हूं। बाकी देखा जाएगा। अगर कोई इस आधार पर मेरी फेसबुक लिस्ट से हटना चाहे तो उसकी मर्जी है।


