अंतर्राष्ट्रीय चैनल स्काई न्यूज़ की वरिष्ठ पत्रकार यालदा हकीम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहा है। इस वीडियो में एंकर द्वारा पूछे गए एक तीखे सवाल ने पाकिस्तान की विदेश और सुरक्षा नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया।
पाक के डिफेंस मिनिस्टर से जब पूछा गया कि क्या पाकिस्तान आतंकवादियों को ट्रेनिंग और फंडिंग देने के अपने लंबे इतिहास को स्वीकार करता है, तो पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का जवाब चौंकाने वाला था—“हम अमेरिका के लिए गंदे काम तीन दशकों से करते रहे हैं।”
यह बयान न केवल पाकिस्तान की रणनीतिक भूमिका पर सवाल उठाता है, बल्कि वैश्विक राजनीति में उसकी साख और साझेदारियों पर भी नई बहस छेड़ देता है।
जितेंद्र सिंह-
एक ब्रिटिश चैनल से बात करते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री और उप प्रधानमंत्री ख्वाजा आसिफ खुलेआम स्वीकार कर रहे हैं कि हमने 3 दशकों तक कश्मीर में आतंकवाद को पाला पोषा कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया। और यह हमने अमेरिका और ब्रिटेन की मदद से किया।
एशिया को नर्क बनाने वाला खासकर पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, मिडल ईस्ट कश्मीर को नर्क बनाने वाला सबसे बड़ा दुश्मन यदि कोई है तो हेनरी किसिंगर है।
आप लोग गूगल पर बगदाद पैक्ट या CENTO सर्च करिए सोवियत संघ की शक्ति को कमजोर करने के लिए अमेरिका ने हेनरी किसिंजर को एशिया भेजा था।
इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका वियतनाम युद्ध भी हुआ था और वियतनाम में एक दल जो अमेरिका के सपोर्ट में था उसको बढ़ावा देने के लिए हेनरी किसिंजर ने तब बेहद गरीब और पिछड़े चीन को खूब मदद किया, चीन ने भी उस वक्त अमेरिका की मदद का खूब फायदा उठाया।
चीन को मदद देने में अमेरिका का यह स्वार्थ था कि इससे सोवियत संघ कमजोर होगा। चीन अगर मजबूत होगा तो ब्लोड़ीबोस्टक पर दोबारा कब्जा कर लेगा जिसे सोवियत संघ ने चीन से छीना था और आज भी चीन अपने नशे में ब्लडीबोस्टक को अपना बताता है। और ब्लडीबोस्टक की 90% जनसंख्या चीनी मूल की है।
अमेरिका की टेक्नोलॉजी हेल्प से चीन ने अपने आप को इतना मजबूत बनाया कि आज चीन अमेरिका से आगे निकल गया।
इसी बगदाद पैक्ट में यह समझौता हुआ की मिडिल ईस्ट के कुछ देश और पाकिस्तान अमेरिका का साथ देंगे मुजाहिद तैयार करेंगे आतंकवादी तैयार करेंगे अमेरिका इन आतंकवादियों को ट्रेनिंग देगा इनको हथियार देगा और इनको अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ लड़ने के लिए भेजेगा।
बदले में पाकिस्तान के हुक्मरानों को खूब डॉलर मिलेगा और यह दौर था जब पाकिस्तान की आर्थिक इकोनॉमी बहुत तेजी से भाग रही थी लेकिन लोग यह भूल रहे थे कि यह अमेरिका के डॉलरों की मदद है और मदद पर निर्भर इकोनॉमी ज्यादा देर तक कायम नहीं रहती।
फिर सोवियत संघ का पतन हुआ जितने मुजाहिद थे वह खाली बैठे थे। उसमें से कुछ अमेरिका के खिलाफ हो गए जैसे ओसामा बिन लादेन। उसके बाद जनरल जिया उल हक ने यह सोचा कि जब यह मुजाहिद खाली बैठे हैं तो क्यों न इनको भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया जाए। उसके बाद जनरल जिया उल हक ने दो मोर्चे पर काम किया एक खालिस्तान और दूसरा कश्मीर।
और उस वक्त कांग्रेस सरकार की नाकामी की वजह से भारत को जो जख्म मिला उसे भारत कभी नहीं भूल सकता भारत को अपने प्रधानमंत्री तक को खोना पड़ा।
बाद में जनरल जिया उल हक ने बेशर्मी से कहा था कि हम कश्मीर के लिए कुछ भी कर सकते हैं। इसमें गलत क्या है यही बात परवेज मुशर्रफ ने भी बेशर्मी से कहा था कि हम कश्मीर लेने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। हमने क्या गलत किया हमने वही किया जो हमारा सैनिक हमारा फर्ज अनुमति देता है।
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