चंडीगढ़ | आज का दिन, १ मई— अंतराष्ट्रीय मजदूर दिवस, मेहनतकशों के सम्मान और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता का प्रतीक है। यह दिन उनके योगदान को सलाम करने का दिन है, जो बिना किसी दिखावे के, पूरी निष्ठा से अपना कार्य करते है।
लेकिन कितना विडम्बनापूर्ण है कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया, चंडीगढ़ शाखा जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में ही, वहाँ के सर्कुलेशन विभाग में अधीनस्थ कर्मचारी सालों से शोषण और अन्याय का सामना कर रहे है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले 7-8 वर्षों से इस विभाग में एक बड़ा वित्तीय घोटाला चल रहा है, जिसका अनुमानित मूल्य 25-30 लाख रुपए तक हो सकता है। आरोप है कि डुप्लीकेट कूपन छपवाकर उन्हें बाज़ार में वेंडरों को बेचा गया, और जब घोटाला सामने आने लगा तो इन्ही कूपनों को “नक़ली” बताकर नकार दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा शिकार वे मासूम कर्मचारी बने हैं जो इस पूरे प्रकरण में कहीं भी दोषी नहीं है, फिर भी उन्हें वेंडरों की फटकार झेलनी पड़ रही है और उनके पास बोलने या कार्रवाई करने का भी कोई अधिकार नहीं है। उनके विभागाध्यक्ष ही उन्हें किसी भी तरह की सहायता देने से साफ़ इनकार करते हैं।
- क्या यह वही मजदूर दिवस है, जिसमें हम श्रमिकों की अधिकारों की बात करते है?
- क्या यह संस्थान है, जिसका नाम “सच्चाई और निपक्षता” का प्रतीक माना जाता रहा है?
समय आ गया है कि ऐसे भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज़ उठाई जाए, ताकि मेहनतकश कर्मचारी अपने अधिकारों की साथ कार्य कर सके और कोई भी उन्हें अन्याय का शिकार न बना सके।
हम उम्मीद करते है कि यह पोस्ट पढ़ने के बाद संबंधित उच्चाधिकारी इस विषय की गहराई से जाँच करेंगे और दोषियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की जायेगी।
आज मजदूर दिवस पर, हम सबको अपने अंतर्मन से यह प्रण लेना चाहिए कि सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए खड़े होंगे जो अन्याय का शिकार हो रहा है।
एक कर्मचारी द्वारा भड़ास4मीडिया को भेजे गए मेल पर आधारित


