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सियासत

पाकिस्तान से ध्यान हटाने के लिए जातीय जनगणना का ऐलान!

अनिल भास्कर-

सब बौराए हैं। पाकिस्तान को ठोक दो। तबाह कर दो। क्यों नहीं ठोक रहे? जातीय जनगणना का ऐलान ध्यान भटकाने के लिए तो नहीं? आखिर अब तक स्ट्राइक हुई क्यों नहीं?

राफेल-सुखोई बेड़ा क्या केवल गणतंत्र दिवस परेड की शोभा बढ़ाने के लिए रखा हुआ है? तमाम सवाल। तमाम कयास। तमाम आशंकाएं। टीआरपी के चक्कर में टीवी चैनल सारी ताकत युद्ध उन्माद को परवान चढ़ाने में झोंके हुए हैं।

सियासी सूरमा माऊथगन से फिज़ा में बारूदी गंध फैला रहे हैं। मगर कोई यह सोचने-समझने को राजी नहीं कि किसी देश से जंग दो मोहल्लों में झगड़े जैसा नहीं कि एक ने मारा तो दूसरा गुट तत्काल अपने साथियों के साथ हमलावर पर पलटवार कर बैठा।

वहीं के वहीं, हाथ के हाथ निपटारा। भाई, सरकार जनआक्रोश या मीडिया प्रायोजित उन्माद के आधार पर सामरिक फैसले नहीं करती। गहन गणना के बाद कोई निर्णय लेती है।

9/11 याद है? दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका के ट्विन टावर पर हमला 11 सितंबर 2001 को हुआ। अमेरिका ने जिम्मेदार के खात्मे का संकल्प किया। मगर इस हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को ठोकने में दस साल लगे। उसे 2 मई 2011 को जहन्नुम नसीब हुआ।

उरी आतंकी हमला 18 सितंबर 2016 को हुआ। हमने बालाकोट एयर स्ट्राइक के जरिये सीमापार तबाही मचाई 26 फ़रवरी 2019 को। इसलिए उफ़नाइए मत।

सब्र कीजिए। सरकार ने सेना को फ्री हैंड की बात सार्वजनिक की है। अब कब, कहां, कैसे? यह फैसला सरकार और सेना पर छोड़ दीजिए। इत्मीनान रखिए, आप सेना पर फ़ख्र करेंगे।

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