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सियासत

बिना लड़े भी पाकिस्तान को घुटने पर ला सकता है भारत!

सुभाष राय-

पाकिस्तान ने बेशक बड़ा अपराध किया है। पहलगाम कोई नयी कथा नहीं है, वह हमेशा ही हिंदुस्तान के दिल पर आघात करता रहा है। हमने उससे मेल-जोल रखने का बार-बार प्रयास किया, साथ मिलकर विकसित होने का मौका दिया, लेकिन उसे मंजूर नहीं हुआ। हमने कई बार उसे माफ किया, चेतावनी भी दी लेकिन उसने हर चेतावनी को नजरंदाज किया। हमने उसे सबक भी दिये। उनके यहां पलते आतंकियों के अड्डों पर सर्जिकल स्ट्राइक की लेकिन तब भी उसकी जेहनियत पर कोई असर नहीं हुआ। उसने कश्मीर के दिल पर नहीं भारत के दिल पर आघात किया है। उसे सजा मिलनी ही चाहिए। सख्त सजा मिलनी चाहिए।

भारत बहुत बड़ा देश है। पाकिस्तान उसके आगे कुछ भी नहीं है। किसी मामले में नहीं ।‌न शिक्षा, न चिकित्सा, न विकास, न सामर्थ्य के मामले में। हमारे पास बड़ी, समुन्नत और समर्थ सेना है। दृढ़ आत्म विश्वास से भरी हुई। हमारे पास अंतर्महाद्वीपीय मारक क्षमता है। उनकी मिसाइलों को आसमान में ही मार गिराने की अकाट्य शक्ति है। हम चाहें तो पाकिस्तान को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसा नुकसान कि वह फिर कभी सर न उठा सके। सरकार ने सेनाओं को कह भी दिया है कि लक्ष्य चुने, वक्त चुनें और दुश्मन को सबक सिखायें। प्रधानमंत्री मोदी ने तो आतंकियों को अकल्पनीय क्षति पहुंचाने तक का संदेश दे दिया है।

देश की जनता भी यही चाहती है। सभी जोश में हैं। कोई कह रहा है कि इस बार अधिकृत कश्मीर को भारत में मिला लेना चाहिए, कोई कह रहा है कि पाकिस्तान का वजूद मिटा देना चाहिए, कोई कह रहा है उसके टुकड़े- टुकड़े कर दिये जाने चाहिए। पाकिस्तान के खिलाफ जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं, नारे लग रहे हैं। बहुत नाराजगी है। यह स्वाभाविक है। किसी के बेटे की, किसी के पति की, किसी के बाप की निर्मम हत्या आखिर कैसे बर्दाश्त होगी। यह बर्दाश्त के बाहर है। दर्द इतना ज्यादा है कि अब हर किसी को शरारती दुश्मन के कठोर इलाज की जरूरत महसूस हो रही है।

पाकिस्तान में खलबली है। वहां के नेता, मंत्री अपने पाव, आधे पाव के ऐटम बम दिखा रहे हैं। भारत का खून बहाने की बात कर रहे हैं। मजा चखाने की चेतावनी दे रहे हैं। आज का समय पाकिस्तान के लिए सबसे कठिन समय है। उनके दो राज्यों, बलूचिस्तान और पख्तून ख्वा, में विद्रोह की परिस्थितियां बनी हुई है । वहां पाकिस्तानी सैनिक मारे जा रहे हैं। अधिकृत कस्मीर में भी बगावत के हालात हैं । पाकिस्तान ने जैसे भारत की जमीन को लहूलुहान किया है, वैसे ही उसने अपनी जमीन के दो तिहाई हिस्से को भी बंदूक की नोक पर रखा है। पाक सत्ता के विरुद्ध लड़ रहे लोग भी चाहते हैं कि भारत हमला करे। यह उनके लिए बहुत मुफीद होगा। इसकी आड़ में वे अपनी स्वतंत्रता का एलान भी कर सकते हैं। ऐसा नहीं भी करते हैं तो वे पाकिस्तानी सत्ता और फौज को अधिकाधिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश तो करेंगे ही।

सारी परिस्थितियाँ भारत के अनुकूल हैं। अतीत के युद्धों में भी भारत ने कई बार पाकिस्तान को धूल चटायी है। उसके दो टुकड़े किये, उसे पहाड़ की चोटी तक पहुंचकर पछाड़ा, उसके घर में घुसकर मारा। किसी भी हालत में पाकिस्तान भारत के सामने ठहरने वाला नहीं। दोनों देशों के सोशल मीडिया और टीवी चैनल तो ऐसे बोल रहे हैं, जैसे युद्ध छिड़ ही गया हो। टीवी स्क्रीन्स पर मिसाइलें और विमान उड़ रहे हैं, उनकी गर्जना सुनायी पड़ रही है। महान विश्लेषक और पत्रकार अपने अद्भुत विश्लेषणों में युद्ध जीतते हुए नजर आ रहे हैं। कुछ रिटायर्ड लोग लड़ने के तरीके बता रहे हैं। कहां, किधर से मारना ठीक होगा। श्रोता यह सब देखकर मुग्ध है। वह जीतता हुआ महसूस कर रहा है। यह सब आभासी है। यहां सारा बड़बोलापन अपने नकलीपन में खप जायेगा। असली युद्ध में यह थोथी बातें काम नहीं आती।

जब युद्ध होता है तब परिस्थितियाँ बदल जाती है। जिन्हें लड़ना होता है, उन्हें ही भुगतने होते हैं युद्ध के खामियाजे। उन देशों को क्षति उठानी होती है, जो लड़ते हैं। उन्हें ही आर्थिक बदहाली झेलनी पड़ती है। उन्हीं की नयी पीढ़ियां इसके दुष्परिणाम झेलती हैं। कोई जापान से पूछे कि परमाणु बम गिरने के बाद क्या होता है। आज भी दुनिया के अनेक हिस्सों में युद्ध चल रहा है। यूक्रेन में लड़ने के लिए लोग नहीं बचे हैं। गाजा में तीन चौथाई मकान ढह चुके हैं। इन युद्धों में हजारों बच्चे मारे गये हैं। लाखों लोग शरणार्थी और भुखमरी का जीवन बिताने को मजबूर हैं। बच्चों का कोई भविष्य नहीं रह गया है। इतिहास में जब भी युद्ध हुआ है, भुखमरी, बेकारी और असहायता बढ़ी हैं। युद्ध से कभी समस्याएं अंतिम रूप से नहीं सुलझीं। युद्ध जीतने का गौरव भले किसी को मिला हो लेकिन जीत के बाद भी बहुत कुछ खो देने का विकराल भाव भी पैदा हुआ है। युद्ध में जीतने वाले की देह पर भी घाव के निशान बहुत दिनों तक रह जाते हैं।

युद्ध कई बार राजनीतिक विवशताओं की परिणति के रूप में भी हमारे सामने आये हैं। ऐसे युद्धों से किसी की श्रेष्ठता और दर्प की‌ महत्वाकांक्षा भले पूरी हुई हो लेकिन आम जन को इसके गहरे घाव झेलने पड़े हैं। दुनिया भर में वक्त-वक्त पर ऐसे तमाम युद्ध लड़े गये। इनमें अनेक देशों की सांस्कृतिक विरासतें, कलाएं और साहित्य नष्ट हुए, देशवासियों का जीवन दूभर हुआ। इसीलिए जब तक युद्ध अपरिहार्य न हो, नहीं लड़े जाने चाहिए। यह तय करना भी बहुत मुश्किल है कि इस अपरिहार्यता की सीमा क्या है। यह जनता नहीं, सरकारें तय करती हैं, उनके विशेषज्ञ तय करते हैं। वही यह भी तय करते हैं कि सीमित लक्ष्य के लिए युद्ध करना है या उसके पार जाना है। अभी भारत ने यह नहीं कहा है कि वह पाकिस्तान से युद्ध करने जा रहा है। उसने इतना ही कहा है कि पहलगाम में जिन्होंने हमारी देह पर घाव किये हैं, उन्हें उसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। किसी भी देश को आत्मरक्षा का अधिकार है और वह हमलावर ताकतों का प्रतिकार अपनी पूरी ताकत से कर सकता है।

अभी यह स्पष्ट नहीं है की भारत की सेना क्या कदम उठाने वाली है, इसलिए इस बारे में कुछ कहना मुश्किल है। लेकिन भारत चाहे तो बिना युद्ध के भी पाकिस्तान को भूखे मार सकता है। इस दिशा में उसने कुछ प्रारम्भिक कदम उठाये भी हैं। अगर पाकिस्तान को विदेशी मदद रोकी जा सके तो उसे अपंग करना बहुत आसान होगा। वैसे भी अभी उसकी आर्थिक हालत बहुत अच्छी नहीं है, अगर बाहर से मदद मिलनी बंद हो जाय तो उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। भारत अगर विश्वमंच पर उसे आतंकवादी देश घोषित करा सके तो उसे विदेशों से मदद मिलनी बंद हो सकती है। एक महत्वपूर्ण मसला है सिंधु नदी के पानी का। हमने संधि तो भंग कर दी है और हमारी सरकार ने यह कहा भी है कि व्यवस्था की जायेगी कि पाकिस्तान को सिंधु का एक बूंद पानी भी न मिले। लेकिन कैसे, अभी स्पष्ट नहीं है।

एक विशेषज्ञ का कहना है कि अगर सिंधु का पानी भारत की ओर मोड़ने में हम कामयाब हो जायं तो यह पाकिस्तान पर ऐटम बम गिराने जैसा होगा। पाकिस्तान अपनी 80 प्रतिशत खेती और व्यापक क्षेत्र में पीने के पानी के लिए सिंधु नदी पर निर्भर है। अगर सिंधु का पानी पाकिस्तान जाने से रोका जा सके तो यह दुश्मन के सिर पर महाबम साबित होगा। प्रश्न बस यही है कि हम यह कैसे करेंगे। इस पर सरकार, उसके सलाहकार और विशेषज्ञ जरुर विचार कर रहे होंगे। अगर हम बिना युद्ध किये पाकिस्तान को घुटने पर ला सकते हैं तो यह कोई बुरा विकल्प नहीं है।

किसी भी निर्णय का सही वक्त वह नहीं होता, जब बहुत दुख हो, बहुत जोश हो, बहुत क्रोध हो, बहुत भावुकता हो, बड़े निर्णय हमेशा संतुलित, शांत और धैर्यवान मन से किये जाने चाहिए। हमें भरोसा है कि हमारी सरकार, हमारे प्रतिरक्षा विशेषज्ञ और हमारी सेनाएं जो भी कदम उठाने जा रही हैं या उठाने वाली हैं, उनका आधार भावुकता या गुस्सा नहीं बल्कि ठोस और अपरिहार्य परिस्थिति है। हम भारत के लोग हमारे लोगों को पहुंचायी गयी घोर पीड़ा की घड़ी में हर तरह से सरकार के साथ है।

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