अश्विनी शर्मा-
ज़िंदगी की दौड़ में यूं तो असंख्य लोग मिलते हैं लेकिन ज़्यादातर लोग भूला दिए जाते हैं। कुछ जीवन पर्यंत अपने असरदार व्यवहार से याद आते हैं।
सहारा मीडिया के ग्रुप एडिटर विजय राय भैया भी ऐसी ही शख्सियत थे। मेरी इनसे पहली मुलाकात तकरीबन 30 वर्ष पूर्व तब हुई जब ये BHU में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। उस दौरान इनके पिता वाराणसी के एक रुतबेदार पुलिस अधिकारी की तौर पर विख्यात थे। दिल्ली के वर्तमान सांसद मनोज तिवारी जी भी उस वक्त खुद को बतौर गायक स्थापित करने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे। विजय राय भैया की पीएचडी पार्टी को लेकर अस्सी घाट पर पीएससी ने मनोज भैया के हाथ पर प्लास्टर चढ़वा दिया था। उसके बाद तो मनोज भैया विख्यात गायक के साथ सुपर स्टार अभिनेता बन गए।


मुझे विजय भैया के विवाह समारोह में शामिल होने का सौभाग्य भी हासिल हुआ था। वक्त गुजरता गया, विजय भैया देश के प्रतिष्ठित पत्रकार बने तो मनोज भैया के बीएचयू के दिनों के सबसे गहरे यार विजय भैया के छोटे भाई प्रदीप भैया ने भी वकालत में खूब नाम कमाया। प्रदीप भैया ने देश के कई विख्यात मुकदमों की पैरवी करने के साथ नोएडा में APN न्यूज़ चैनल की नींव भी रखी।
साल 2014 की बात है मैं मुंबई से दिल्ली पहुंचा था तब प्रदीप राय (Pradeep Rai) भैया ने अपने APN चैनल से मुझे अपना छोटा भाई संबोधित कर जुड़ने का मौका दिया। मुझे प्रदीप भैया ने याद दिलाया कि वो भी मेरे वाराणसी के घर BHU में पढ़ाई के दौरान आते थे। उन्होंने मेरे प्रधानाचार्य रहे पिता का हालचाल भी जाना और मुझे निश्चिंत हो चैनल में काम करने को कहा।
APN न्यूज़ चैनल के बाद साल 2016 में जब सहारा नोएडा में श्री उपेंद्र राय (Upendrra Rai) जी ने मुझे काम करने का अवसर दिया तो विजय भैया से वर्षों बाद फ़िर से मुलाकात हुई। आप तब सहारा अखबार के संपादक थे। विजय भैया ने अपनी केबिन के पास ही मेरे बैठने का इंतज़ाम कराया। विजय भैया हर विपरीत परिस्थिति में मेरा हौसला बढ़ाते थे। मुझे याद है जब मेरे पिता का वाराणसी में वर्ष 2018 में निधन हुआ तो विजय भैया ने फोन कर दुख जताने के साथ मेरा हौसला भी बढ़ाया था। मेरा सहारा का सफ़र महज़ छह महीने का ही रहा उसके बाद दूसरों राज्यों में होने की वजह से उनसे दुबारा मिलना नहीं हो सका।
13 दिन पूर्व रविवार को जब नोएडा में हार्ट अटैक से विजय भैया के निधन की सूचना मिली तो मन आहत हो गया। हमेशा किसी की भी मदद के लिए तत्पर रहने वाले विजय भैया का असमय जाना उनके चाहने वालों को अखर गया। मैं भी भाग कर उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचा। उनके शरीर को सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में पंचतत्व में विलीन होते देखा। विजय भैया को जन समूह नम आंखों से विदाई दे रहा था।
गुरुवार को विजय भैया की तेरहवीं थी, मन भारी कर नमन करने देश भर से लोग पहुंचे। मैंने भी उनको श्रद्धा सुमन अर्पित किया। मेरी कई पुराने साथियों से मुलाकात हुई, सब विजय भैया को नम आंखों से याद कर रहे थे। मेरी सांसद मनोज तिवारी भैया से भी मुलाकात हुई। मनोज भैया, विजय भैया का हमेशा पैर छूकर प्रणाम करते थे। आज वो विजय भैया के छोटे भाई और अपने बाल सखा प्रदीप भैया के साथ बेबस खड़े थे। आने जाने वाले तमाम लोग संवेदना जाहिर कर रहे थे।
आप कितने बड़े हैं इससे किसी का क्या वास्ता असल में बड़ा वो होता है जिसका दिल भी बड़ा होता है। वास्तव में चार दिन की ज़िंदगी है जितना हो सके एक दूसरों को खुशियां बांटे। ज़िंदगी की डोर तो थमनी ही है जाने कब थम जाएगी। हाथ पसारे आए हैं हाथ पसारे जाएंगे। मन में किसी के लिए द्वेष काहे का अगर किसी की मदद नहीं कर सकते हैं तो नुकसान भी ना पहुंचाएं। कुंठा, नफ़रत से कुछ नहीं मिलेगा, अपने साथ दूसरों की भी ज़िंदगी खुशनुमा बनाएं।
विजय भैया की आत्मा को ईश्वर शांति दें। उनके परिवार को ईश्वर इस विपदा से उबरने की शक्ति दें।
मूल खबर…


