राकेश कायस्थ-
ऑपरेशन सिंदूर और उसके नाटकीय पटाक्षेप के बाद मैंने एक लंबा लेख लिखा था। मैंने बिंदुवार तर्कों के आधार पर बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र अब अपने सारे पत्ते फेंक चुके हैं। उनके पास बेचने के लिए कोई नई कहानी नहीं बची है। नीचे जाकर वह लेख पढ़ा जा सकता है।
पिछले आठ-दस दिन के अखबार मेरे इस आकलन को सही साबित कर रहे हैं। ठीक से देखे तो समझ में आता है कि हेडलाइन मैनेजमेंट की किस तरह की जी-तोड़ और नाकाम कोशिश चल रही है।
हर सुबह आंख खुलते ही किसी सी ग्रेड हिंदी सिनेमा का चवन्नी छाप डायलॉग छह या आठ कॉलम में छपा नजर आता है। भाषा की गरिमा पहले भी नहीं थी कि अब तो खैर कहना ही क्या। येन-केन-प्रकारेण कोशिश ये दिखाई देती है कि बिहार चुनाव तक जनता का खून खौलाये रखना है।
कोई कितना बड़ा भक्त क्यों ना हो, वो मन ही मन एक बार जरूर पूछेगा.. भाई और कितना पकाओ? अब सेना के सूत्रों के हवाले से कोई नई कहानी पेश की जा रही है कि यहां इतने ड्रोन मार गिराये गये थे और वहां उतनी चौकियां उड़ा दी गई थीं। विदेश मंत्री बार-बार अपना बयान बदल रहे हैं। कभी कह रहे हैं कि हमने हमले से पहले बता दिया था और कभी कह रहे हैं कि हमला करके बताया था। आप परम प्रतापी हैं पूरा देश ये मान चुका है, फिर इतनी मेहनत से हर रोज आपको नया क्या साबित करना है?
नया शिगूफा चीन को लेकर है। ये गलवान वाला चीन है, जहां ना कोई घुसा था ना कोई घुसा है। साहब बहादुर नाम कैसे लें? संकेतों में चाइनीज माल के बायकॉट का कॉल दे रहे हैं। चीन आज भारत का लगभग उतना ही बड़ा ट्रेड पार्टनर है, जितना अमेरिका है। अमेरिका के साथ भारत का वार्षिक व्यापार 140 बिलियन डॉलर के करीब है तो चीन के साथ यह व्यापार 118 अरब डॉलर है।
केमिकल से लेकर फार्मा तक ना जाने कितने सेक्टर चाइनीज इंपोर्ट पर निर्भर हैं। आयात लगातार बढ़ रहा है और आप देश की गरीब जनता को ज्ञान दे रहे हो कि चीनी झालर, होली के रंग और मूर्तियां मत खरीदों। आप किसे बना रहे हैं?
माई डियर फ्रेंड दोलांड ने कहा मेक अमेरिका ग्रेट अगेन, उन्हीं के मुंह पर साहेब बहादुर ने दोहराया था मेक इंडिया ग्रेट अगेन। अब ट्रंप अपनी बिल्डर छाप व्यापार और विदेश नीति से चीन को घुटने पर लाने निकले हैं। ये अलग बात है कि ऐसा करने की कोशिश में अमेरिका अर्थव्यस्था की सांस फूलने लगी है। फ्रेंड दोलांड की देखा-देखी साहब भी चीनी सामान के बायकॉट का कॉल दे रहे हैं। सच यह है कि भारत अमेरिका नहीं है लेकिन चीन सचमुच चीन है।
खबर ये है कि चीन ने बिना कुछ कहे सतजल की धारा मोड़ दी है। भारत पाकिस्तान को जिस बात की धमकी दे रहा है वो चीन चुपचाप करके दिखा रहा है। क्या सरकार की हिम्मत है कि मुंह खोलकर इस मामले में कुछ बोल दे। अर्थ नीति से लेकर विदेश नीति का सस्ता राजनीतिकरण सिर्फ इसलिए चल रहा है ताकि कोई चुनावी फायदा मिल जाएगा। इस चक्कर में देश का क्या हो रहा है, ये सोचने की फुर्सत किसे है?
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अब दुश्मन को मिटाने और दुनिया भर में डंका बजाने जैसी कोई नई कहानी बेच पाना मोदीजी के लिए असंभव होगा!


