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सुख-दुख

मनमानी पर उतारू “के न्यूज” अपने रिपोर्टरों का दुःख दर्द नहीं समझता है!

यूपी के कानपुर से संचालित के न्यूज चैनल अब रिपोर्टर का दुःख दर्द समझने में नहीं बल्कि अपनी मनमानी पर उतारू है। जब से इस चैनल में एक महोदय आए हैं तब से उन्होंने रिपोर्टरों को अपनी पर्सनल नौकरी पर समझ लिया है।

हाल ही में एक रिपोर्टर के साथ 6 महीने में दो आकस्मिक घटनाएं घट गईं, जिससे वह समय पर कार्य नहीं कर पा रहा था, फिर जब उसने काम करना शुरू किया तो उस पर एक ही दिन में दो स्टोरी कवर करने का टारगेट तय कर दिया गया, जिसमें रिपोर्टर ने एक स्टोरी कवर करके दे भी दी लेकिन यहां चैनल में बैठे महोदय ने उसे समस्त ग्रुपों से रिमूव करा दिया।

ये एक रिपोर्टर नहीं बल्कि यूपी के तमाम रिपोर्रट रिमूव किये गए हैं.. वो भी बिना कारण बताए।

जिससे प्रतीत होता है कि अब के न्यूज चैनल सिर्फ एक ही महाशय चला रहे हैं जो रिपोर्टरों पर अधिक दवाब बनाते जा रहे हैं, जो टारगेट पूरा नहीं कर पा रहा हैं तो उसे हटा दिया जा रहा है, और जब जिम्मेदार लोगों को फोन कर हटाये जाने का कारण जानना चाहा तो फोन ही उठाना बन्द कर दिया गया।

एक पीड़ित कर्मचारी द्वारा भड़ास को भेजे गए मेल पर आधारित

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