अभिरंजन कुमार-
ट्रंप-जाल में फंसता जा रहा भारत?… ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत की खराब कूटनीति देखकर ऐसा लग रहा है कि सरकार समझ नहीं पा रही कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शातिर चालों का कैसे जवाब दिया जाए।
राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टेलीफोनिक बातचीत के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी द्वारा जारी किए गए बयान की स्क्रिप्ट बेहद बचकाना थी, जिसके मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति को बता रहे थे कि न तो अमेरिका ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कोई मध्यस्थता की, न ही ट्रेड डील पर कोई बातचीत हुई।
मेरा मानना है कि ऐसी कोई बातचीत 35 मिनट तक सौहार्दपूर्ण तरीके से चलना संभव ही नहीं है, जिसमें एक नेता दूसरे नेता को बताए कि आपने जितना बोला है, जितनी बार बोला है, सब झूठ बोला है। और यदि एक नेता दूसरे नेता को ऐसा बोलेगा, तो दूसरा नेता चुपचाप सुनता नहीं रहेगा, खासकर तब जबकि वह पूरी दुनिया का दादा हो।
भारत यह सोच भी कैसे सकता है कि डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक रूप से जिस दावे को अनेक बार कर चुके हैं, उसे वे झूठ मान लेंगे और अमेरिका की सरकार भी अपने ही राष्ट्रपति के बारंबार के बयान से पल्ला झाड़ लेगी?
दरअसल होगा यह कि ट्रंप जितनी बार भारत पाक संघर्षविराम का क्रेडिट लेंगे और भारत जितनी बार अपने छोटे मोटे अधिकारियों से उसका खंडन कराता रहेगा, ट्रंप भारत से उतने ही चिढ़ते जाएंगे। यह वक्त ट्रंप को दबाव में लेने का है, न कि उन्हें चिढ़ाने का है। इस तरह की बचकाना कूटनीति से आप अमेरिका की शातिर चालों का मुकाबला नहीं कर सकते।
ट्रंप ने पाकिस्तानी जनरल आसिम मुनीर को स्पेशल ट्रीटमेंट देकर, हलाल लंच कराकर भारत की मिसरी वाली कूटनीति की हवा निकाल दी है, वह भी महज 24 घंटों के भीतर। ट्रंप चाहें तो आसिम मुनीर को पाकिस्तान का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री भी बनवा सकते हैं, ताकि भारत को थोड़ा और परेशान किया जा सके।

मैंने दो दिन पहले भी कहा था कि कई लोग डोनाल्ड ट्रंप को सनकी नेता की तरह पेश करते हैं, लेकिन वे बेहद चालाक हैं। ट्रंप अभी साढ़े तीन साल और अमेरिका के राष्ट्रपति रहने वाले हैं। और पिछले सभी घटनाक्रम साफ़ तौर पर इस तरफ इशारा कर रहे हैं कि पाकिस्तान को वे अमेरिकी हितों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानते हैं, और भारत की आतंकवाद विरोधी चिंताओं से उन्हें कोई लेना देना नहीं है।
यूं भी ट्रंप के दावों का भारत चाहे लाख खंडन करे, लेकिन यह बात किसी भारतीय के गले भी नहीं उतरने वाली है कि भारत ने पाकिस्तान के महज डीजीएमओ स्तर के अधिकारी की गुहार पर ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया।
फिर सवाल ये भी हैं कि-
- भारत के एलान से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सीजफायर संबंधी ट्वीट कैसे कर दिए?
- पाकिस्तानी डीजीएमओ द्वारा सीजफायर की गुहार लगाए जाने और भारत द्वारा उसे स्वीकार कर लिये जाने के कई घंटों बाद भी भारत के आसमान में पाकिस्तानी ड्रोन क्या कर रहे थे?
- पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में सीजफायर के लिए अमेरिका को खुलकर क्रेडिट क्यों दिया?
दरअसल, अचानक सीजफायर से भारत में सरकार समर्थक लोग भी भौंचक्के, नाखुश और नाराज़ थे, जिस कारण भारत सरकार यह स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है कि अमेरिका ने अपने पुराने पार्टनर पाकिस्तान को पिटते देखकर भारत पर संघर्ष रोकने के लिए दबाव काफी बढ़ा दिया था।
यह सच है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनके अधिकारियों के साथ भारत के प्रधानमंत्री या अन्य प्रासंगिक लोगों की कोई फिजिकल मीटिंग नहीं हुई, लेकिन टेलीफ़ोन पर दोनों देशों के नेता और अधिकारी लगातार संपर्क में थे।
हां, कश्मीर मुद्दे पर भारत अमेरिका या किसी अन्य देश की मध्यस्थता स्वीकार कर ही नहीं सकता, लेकिन यह बात भी ट्रंप ने बड़बोलेपन में नहीं, बल्कि मनमाफ़िक ट्रेड डील करने के लिए भारत पर बड़ा दबाव बनाने की अमेरिकी रणनीति और कूटनीति के तहत कही।
अमेरिका जैसे बड़े और शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति को सनकी, पागल, बड़बोला समझ लेना बेवकूफी होगी। वहां भी राष्ट्रपति के इर्द गिर्द एक से बढ़कर एक अफसरों और कूटनीतिज्ञों का घेरा है।
इसलिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो कुछ भी बोल रहे हैं, वह उनकी और अमेरिका की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है – यह बुनियादी बात हमें भी जल्दी से जल्दी समझ लेनी चाहिए। धन्यवाद।
पाकिस्तान ट्रंप का नया प्यार है। ईरान पर हमले को लेकर भले ही ट्रंप को पाकिस्तान की ज़रूरत है लेकिन भारत कैसे इस बात को नज़रअंदाज़ कर सकता है कि इसी पाकिस्तान पर आतंकवाद को शह देने का आरोप लगाता है। पाकिस्तान के जिस जनरल मुनीर को ट्रंप ने लंच पर बुलाया, उस मुनीर के कट्टर भाषण के कुछ दिन बाद ही पहलगाम में आतंकी हमला होता है। ट्रंप ने कुछ भी कहा है लेकिन अभी तक आतंकवाद को लेकर मुनीर के बारे में कुछ नहीं कहा है। क्या भारत की विदेश नीति क़ाग़ज़ी साबित हो रही है ? केवल दिखावा ही साबित हुई? प्रधानमंत्री मोदी कहते थे कि दुनिया भारत की बात सुनती है लेकिन भारत को अपनी बात कह ही नहीं रहा और दुनिया क्या सुनती है, पता भी नहीं चलता। -रवीश कुमार



Bipin Agarwal
June 21, 2025 at 6:59 pm
Writer ko International News sence nahi hai
Totally one sided Bakwas