
यशवंत सिंह-
नई दिल्ली: 700 साल से सूखी पड़ी दिल्ली की ऐतिहासिक सतपुला झील को आखिरकार नई जिंदगी मिल गई है। यह झील तुगलक वंश के सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में बनी थी, लेकिन समय के साथ यह पूरी तरह सूख गई थी और उपेक्षा का शिकार हो चुकी थी।
हाल ही में साउथ दिल्ली के साईंनाथ रोटरी क्लब और स्थानीय प्रशासन के प्रयासों से इस झील में फिर से पानी आ गया है। अब झील न केवल जीवित हो गई है बल्कि इसमें हरियाली और जैव विविधता भी लौट रही है। इस अभियान के पीछे रोटरी क्लब की बड़ी भूमिका रही है।
रोटरी क्लब की पहल से बदली तस्वीर
रोटरी क्लब के सदस्य अशोक कपूर और वॉटर एक्सपर्ट एके लांबा ने इस कार्य को एक अवसर के रूप में देखा। उन्होंने Intach (Indian National Trust for Art and Cultural Heritage) से मिलकर झील के पुनर्जीवन की दिशा में काम शुरू किया।

प्रोजेक्ट के तहत ‘Aranya Dwip’ नाम की एक अनूठी तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिसमें फ्लोटिंग आइलैंड्स और वॉटर फिल्टर लगाए गए। इससे झील में न केवल पानी भरा, बल्कि वह साफ और जैविक रूप से समृद्ध भी हो गया।
मिला तुगलककालीन खजाना
झील की सफाई और खुदाई के दौरान तुगलक शासन काल के समय की धरोहरें भी मिली हैं, जिसे इतिहासकारों के लिए एक कीमती खजाना बताया जा रहा है। इससे झील का ऐतिहासिक महत्व और बढ़ गया है।
तकनीक और समर्पण का संगम
नेचुरल टेक्नोलॉजी के साथ-साथ वैज्ञानिक सोच और समर्पण ने इस ऐतिहासिक झील को फिर से जीवन दिया है। अब यह न केवल एक पर्यटन स्थल बन सकती है, बल्कि दिल्लीवासियों के लिए एक शुद्ध जल स्रोत और जैव विविधता का केंद्र भी बन सकती है। Intach के डायरेक्टर मुनव्वर हसन ने कहा कि झील बहुत समय से उपेक्षित थी, लेकिन अब इसे बचाने की उम्मीद जगी है।
रोटरी क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरुण कटारुका ने भड़ास से हुई बातचीत में कहा कि, यह लेक डीडीए के अंडर में आती है। डीडीए ने जलबोर्ड से दो साल पहले बीतचीत कर रखी थी। इस झील को जिंदा करने के लिए जो मुख्य योगदान रहा वह लिबर्टी शूज के चेयरमैन संजीव बंसल जी हैं। मेन फंडिंग उनकी ही रही। बाकी हमारे रोटरी क्लब के सदस्यों ने योगदान दिया।
उमाकांत गुप्ता की अध्यक्षता में इसके सुंदरीकरण का जिम्मा मिला। इसके दिनेश जैन जी रोटरी क्लब के पूर्व अध्यक्ष का भी बड़ा योगदान रहा। पहले पानी डालते थे तो 60 फुट गहरी झील सब सोख लेती थी। लेकिन मेहनत रंग लाई और अब बतख तैरती हैं झील में।


उन्होंने कहा कि किसी भी काम को सरकार के जिम्मे छोड़ देने भर से बात नहीं बनती। जनता को भी योगदान करना होता है। ज्यादा लागत के काम को आसान खर्चे में भी किया जा सकता है। इसका जीता जागता उदाहरण आज ये झील है।
वहीं, कमल जैन जी ने हमें बताया कि काफी समय से यह झील अव्यवस्था का शिकार थी। आम आदमी पार्टी की सरकार से बीजेपी सरकार आई तो झील के दिन बहुरे। तमाम अड़चने आईं लेकिन हम लोग कामयाब रहे।


