पुरी- रथ यात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ के रथों को रोककर गौतम अदानी और उनके परिवार को ‘विशेष दर्शन’ कराए जाने की खबर ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीधे सवाल दागा – “क्या अदानी अब भगवान जगन्नाथ से भी बड़े हो गए हैं?”
राहुल गांधी ने कहा कि जिस रथ यात्रा में आम भक्तों की भीड़ रोकी जाती है, वहां एक उद्योगपति के लिए रास्ता साफ़ किया जाता है। यह आस्था नहीं, सत्ता और पूंजी का प्रदर्शन है।
‘शोभायात्रा को रोक दिया गया, क्योंकि सेठ आ रहे थे!’
पुरी के श्रद्धालु भी भौंचक हैं। कई स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों ने सवाल उठाए कि क्या अब भगवान के रथों को कॉरपोरेट सुविधा के अनुसार रोका जाएगा? एक तीर्थयात्री ने गुस्से में कहा- “हमें तीन-तीन घंटे लाइन में खड़े रहना पड़ा, लेकिन सेठजी सीधे रथ के आगे। प्रशासन ने खुद रथ खींचना बंद करवा दिया।”
अदानी के दर्शन या दर्शन के अदानी?
गौतम अदानी अपने परिवार सहित जब रथों के सामने पहुंचे, तो पूरी व्यवस्था जैसे ठहर गई। सोशल मीडिया पर अदानी की तस्वीरें, प्रशासनिक अधिकारियों की तत्परता और “पट्टा वस्त्र” भेंट करते सेवकों की झुकी कमरें वायरल हो गईं।
राहुल गांधी ने इसी पर सवाल उठाया – “एक आम हिंदुस्तानी जो घंटों तपती सड़क पर खड़ा रहता है, क्या उसकी आस्था का मूल्य अब कमतर हो गया? क्या अब पूजा भी वीआईपी सुविधा के बिना अधूरी है?”
राजनीति से पूंजी तक: श्रद्धा पर मंडराता कॉरपोरेट साया?
सवाल यह भी है कि क्या धार्मिक आयोजनों को अब ‘कॉरपोरेट इवेंट’ बना दिया गया है? रिलायंस की ‘अन्न सेवा’ हो या अदानी परिवार का वीआईपी दर्शन – आम भक्त इसे भक्ति नहीं, मार्केटिंग मान रहे हैं।
पुरी के ही एक पंडा ने कहा – “ईश्वर सबका है, लेकिन जब भगवान के दर्शन के लिए भी शक्ति, सम्पत्ति और संपर्क जरूरी हो जाए, तो धर्म नहीं, दिखावा बचता है।”
राहुल गांधी का यह सवाल इस बार सिर्फ विपक्षी बयान नहीं, उस आम श्रद्धालु की आवाज़ भी बन गया है, जो अपने आस्था के त्यौहार में सिर्फ भगवान को देखना चाहता है, न कि ‘सेठों’ के लिए रोकी गई शोभायात्रा।



Suresh Kumar
July 15, 2025 at 8:06 pm
Sach me ab to punjiwad ka saya bhagwan ke darshan me dikhane lga h.