उर्मिलेश-
केरल के लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे और देश के सबसे वरिष्ठ वामपंथी नेता V S Achuthatanandan का आज तिरुवनंतपुरम में निधन हो गया. वह 101 वर्ष के थे. देश के जिन कुछ नेताओं के शब्द और कर्म में मैंने काफी हद तक एकरूपता देखी, अच्युतानंदन उनमें एक थे! आज के दौर में नेताओं की ‘ऐसी प्रजाति’ अब लगभग विलुप्त हो चुकी है. मैंने अपने 42 वर्षों के पत्रकारिता-जीवन में अब तक देश के एक तत्कालीन प्रधानमंत्री सहित तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों, अनेक मुख्यमंत्रियों, बड़े लेखकों, फिल्मकारों और कुछ नोबेल पुरस्कार विजेताओं के भी इंटरव्यू किये हैं. मेरे लिए इनमें एक अविस्मरणीय इंटरव्यू V S Achuthanandan का है.
यह इंटरव्यू पाल्लकाड स्थित उनके किराये के तात्कालिक कैम्प आवास-सह चुनाव कार्यालय से शुरू हुआ और Mallapuzha के रास्ते के बडे हिस्से तक जारी रहा. बात अप्रैल, 2006 की है, जब मैं Hindustan (HT Media House) अखबार का विशेष संवाददाता था और केरल का चुनाव कवर करने भेजा गया था.
इंटरव्यू शुरु करने से पहले मुझे अच्युतानंदन के घर बहुत ही स्वादिष्ट और पौष्टिक नाश्ता भी मिला. वजह ये कि इंटरव्यू के लिए मुझे उनके घर पर सुबह 8 बजे तक पहुंचने को कहा गया था. जिन सज्जन ने इंटरव्यू का समय तय किया था, जहां तक याद आ रहा है उनका नाम शाजहां था. वह अच्युतानंदन के दफ़्तर के प्रभारी जैसे थे. केरल के मशहूर अखबार Mathrubhumi के मेरे एक दोस्त-पत्रकार ने इंटरव्यू तय कराया था.
जिस वक्त मैं अच्युतानंदन साहब के अस्थायी निवास पहुंचा, वह नाश्ता कर रहे थे और उसके तत्काल बाद अपने चुनाव क्षेत्र मालापुज्झा के दौरे पर निकल जाते. उन्हें जैसे ही पता चला कि वो दिल्ली से आया हिंदी पत्रकार आ गया है, उन्होंने मुझे अपने अंदर वाले कमरे में बुला लिया, जिसके ठीक सामने किचन था. एक भद्र और उनसे कुछ कम बुजुर्ग महिला किचन से लाकर उन्हें इलीना कोई अन्य खाद्य परोस रहीं थी. इससे पहले उन्होंने नारियल पानी पिया. मेरे लिए भी उसी तरह का नाश्ता आया. उन्होंने पूछा: कहां रुके हो? मैने बताया: Indraprastha Hotel. फिर पूछा, ‘अभी नाश्ता तो नहीं किया होगा!’ मेरे ‘ना’ कहने के साथ ही उन्होंने उक्त भद्र महिला से मलयालम मे कुछ कहा और फौरन मेरा भी नाश्ता आ गया. नाश्ता करते हुए ही उन्होंने उक्त महिला से मेरा परिचय कराया कि यह मेरी पत्नी, साथी और संरक्षक भी हैं! अभी रिटायर हो चुकी है पर सरकारी विभाग(संभवत: उन्होंने स्वास्थ्य विभाग बताया था) में पदाधिकारी थीं. इनकी सैलरी से ही मेरा और परिवार का कामकाज सुचारु ढंग से चलता रहा है. इस तरह उनकी पत्नी-साथी और संरक्षक श्रीमती के वासुमति से मेरी परिचय हुआ.
कुछ देर बाद कॉफी आ गई और इसी के साथ उनसे हमारे इंटरव्यू का सत्र भी शुरू हो गया. कॉफी का प्याला खत्म होते ही हम लोग चल पड़े. मैंने अपने टैक्सी ड्राइवर से अच्युतानंदन जी की गाडी के पीछे-पीछे चलने को कहा और उनकी गाड़ी में सवार हो गया. बीच में उनकी कुछ नुक्कड़ सभाएं भी देखता रहा. गाड़ी में उनके बैठते ही हम लोगों की बातचीत फिर चालू हो जाती!
केरल प्रवास में ही पता चला, उनकी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का एक प्रभावशाली हिस्सा उन्हें टिकट भी नहीं देना चाहता था. उसे लगता था कि यह विधायक बन गये तो स्वत: ही मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बन जायेंगे. तकरीबन 12 साल तक भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की केरल राज्य कमेटी के ताकतवर सचिव रह चुके थे पर जब भी मुख्यमंत्री बनने की बात आती, केंद्रीय पार्टी संगठन और राज्य स्तर के ताकतवर नेताओं की संयुक्त रणनीतिक चाल से कोई और नेता आगे आ जाता! देश-विदेश में बैठे माकपा-समर्थकों ने अभियान छेड दिया कि इस बार लेफ्ट फ्रंट जीता तो मुख्यमंत्री अच्युतानंदन को ही बनाना पडेगा. इस तरह 2006 के चुनाव के बाद अच्युतानंदन साहब 82 साल की उम्र में केरल के मुख्यमंत्री बने और पूरे पांच साल पद पर रहे. शानदार और जानदार पारी रही.
आज 101 साल की उम्र में अच्युतानंदन साहब का निधन हो गया. एक बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए इस संघर्षशील कम्युनिस्ट नेता को देशवासी केरल के एक क्षेत्रीय नेता के तौर पर देखते-जानते हैं. पर यकीनन अच्युतानंदन के पास राष्ट्रीय और वैश्विक विजन था. बेमिसाल जन-प्रतिबद्धता और उनके शब्द व कर्म में एकरुपता भी थी. काश, ऐसे लोग कभी इस महादेश के प्रधानमंत्री बनते!
केरल के जिन मुख्यमंत्रियों को इतिहास कभी नहीं भूलेगा; उनमें EMS Namboodiripad, C Achut Menon, Oommen Chandey आदि के साथ V S Achuthanandan का नाम भी शामिल रहेगा.
साथी अच्युतानंदन जिंदाबाद! सलाम और श्रद्धांजलि!


