Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

यादें : दूरदर्शन और जनसत्ता को भी हड़काने पहुंच गए थे स्व. अरुण जेटली!

जेटली साहब मुँह फुलाए बैठे थे। कार्यक्रम के प्रोड्यूसर को संदेश भेजा गया। मुझसे कहा गया कि आप मिलकर समझो और मामला सुलटाओ नहीं तो कार्यक्रम ही न बंद हो जाए…

डॉ मुकेश कुमार-

अरुण जेटली राहुल को धमकाने जा सकते हैं ये मैं यक़ीन के साथ इसलिए कह सकता हूँ क्योंकि मैं भी उसका भुक्तभोगी हूँ। उन दिनों दूरदर्शन पर एक बहुत ही लोकप्रिय ब्रेकफास्ट शो आता था सुबह सवेरे। मैं उसमें एंकरिंग किया करता था।

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय अरुण जेटली के पास था। जेटली सुबह सवेरे की राजनीतिक चर्चाओं से खफ़ा थे, क्योंकि उसमें हर दिन सरकार और संघ की रगड़ाई होती थी।

जेटली साहब को ये नापसंद था। उन्हें लगता था कि दूरदर्शन को तो सरकार का प्रोपेगंडा करना चाहिए। ऐसे में सुबह सवेरे कैसे सरकार की रीति-नीति पर सवाल कर सकता है, उसकी बखिया उधेड़ सकता है।

कार्यक्रम के प्रोड्यूसर को संदेश भेजा गया। मुझसे कहा गया कि आप मिलकर समझो और मामला सुलटाओ नहीं तो कार्यक्रम ही न बंद हो जाए।

अपन गए और जेटली साहब से मिले। वे मुँह फुलाए बैठे थे। फिर इशारों-इशारों में बताने लगे कि क्या करना है और क्या नहीं। ये भी कहा कि प्रभाष जोशी को आप न बुलाएं।

प्रभाष जी उन दिनों सरकार और संघ पर विशेष कृपा कर रहे थे। सुबह सवेरे की चर्चाओं में बीजेपी के प्रवक्ताओं की वाट लगाते थे।

अपन ने सुना और चले आए। न उनकी किसी बात पर गौर किया। प्रभाष जी वैसे ही आते रहे, चर्चाओं के तेवर पहले जैसे रहे। यही कांड फिर सुषमा स्वराज के कार्यकाल में दोहराया गया।

तो जब मुझ जैसे अदने से पत्रकार को धमका सकते हैं, सुबह सवेरे जैसे एक मामूली शो पर पर टेढ़ी नज़र कर सकते हैं तो राहुल गाँधी तो उनकी राह का रोड़ा बन रहे थे।

जेटली और सुषमा स्वराज तो फिर भी उदार थे। वे धमकाने तक रुक गए, उन्होंने उसके आगे कुछ नहीं किया। मोदी ऐसे नहीं हैं। उन्होंने जेटली को कहकर भेजा होगा कि अच्छे से धमकाकर आना।


अंबरीश कुमार-

जनसत्ता को जब जेटली ने धमकी दी… जेटली भले आदमी थे धमकी कैसे दे सकते थे यह तर्क जो लोग दे रहें है उन्हें बता दूं कि एक्सप्रेस समूह के अखबार जनसत्ता को उसके गॉसिप कालम में छपी एक जानकारी को लेकर अरुण जेटली ने न सिर्फ धमकाया बल्कि भारी हर्जाने की नोटिस दी।

तब जनसत्ता के ब्यूरो चीफ सुशील कुमार सिंह थे। उन्हें गॉसिप के लिए लोग तरह-तरह की जानकारी देते थे। तब तत्कालीन संपादक समाचार राय साहब ने एक जानकारी अरुण जेटली के परिवार के सदस्य के बारे में दी, विदेश में पढ़ाई आदि से संबंधित। यह गॉसिप कालम में छपी।

उसके बाद जेटली ने एक्सप्रेस समूह के शीर्ष लोगों को फोन किया। धमकाया कि इसका खंडन किया जाए। मामला बना नहीं तो नोटिस दी। यही वह घटना थी जिससे ब्यूरो चीफ की जनसत्ता से विदाई की जमीन तैयार हो गई। दो और ख़बरों ने इसे और पुख्ता कर दिया।

एक खबर जो अमर सिंह की जन्म दिन की पार्टी में रंजन भट्टाचार्य की उपस्थिति की थी और दूसरी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की माफिया नेता रोमेश शर्मा की पार्टी में उपस्थिति की जो खबर प्रमोद महाजन के दबाव में रोक दी गई थी।

ऐसा न मानिए कि ये लोग धमकाते नहीं थे। इनकी वज़ह से ही अपने ब्यूरो चीफ को छोड़ने के हालात पैदा किए गए और वे जनसत्ता छोड़ गए। आज उन्हीं पूर्व ब्यूरो चीफ सुशील कुमार सिंह से बात हुई तो उन खबरों की चर्चा हुई जिससे विवाद शुरू हुआ था।

नोट- धमकी कैसे-कैसे दी जाती है यह मुझे ठीक से पता है। हमने नेताओं, मुख्यमंत्रियों की धमकी भी झेली है और हमला भी।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन