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सियासत

12 लाख आय पर इनकम टैक्स न लेने का बिल वापस!

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने वह इनकम टैक्स बिल लोकसभा से वापस ले लिया है, जिसमें कथित तौर पर 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर टैक्स न लेने की बात को लेकर चर्चाएं थीं। फरवरी 2025 में पेश किया गया यह बिल दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया था और तब इसे “मिडल क्लास को बड़ी राहत” कहकर प्रचारित किया गया था। अब, इसे बिना लागू किए ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

13 फरवरी 2025 को केंद्र सरकार ने आयकर विधेयक, 2025 लोकसभा में पेश किया। उसी दिन इसे बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली सेलेक्ट कमिटी को भेज दिया गया। कमिटी ने 22 जुलाई 2025 को अपनी रिपोर्ट संसद में जमा की, जिसमें कई संशोधनों का सुझाव दिया गया। सरकार ने लगभग सभी सुझावों को मान लिया और कहा कि अब बिल का अपडेटेड वर्जन लाया जाएगा।

हालांकि, टैक्स स्लैब में बदलाव — खासकर 12 लाख तक आय पर टैक्स छूट — को लेकर आयकर विभाग पहले ही साफ कर चुका था कि यह बिल टैक्स स्लैब बदलने के लिए नहीं, बल्कि भाषा सरल करने और बेकार प्रावधान हटाने के लिए है। यानी, जो “12 लाख तक टैक्स फ्री” का शोर था, वह असल में महज़ अफवाह और चुनावी भ्रम था।

कैसे वापस लिया गया बिल?

विपक्षी दलों के शोर-शराबे के बीच, बिहार में वोटर लिस्ट पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर हंगामे के बीच, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिल वापस लेने की अनुमति मांगी। सदन की मंजूरी के बाद विधेयक औपचारिक रूप से वापस हो गया।

सीतारमण ने कारण बताते हुए कहा: “सेलेक्ट कमिटी की रिपोर्ट के अलावा अन्य स्रोतों से भी सुझाव आए हैं, जिन्हें शामिल करना जरूरी है। इसलिए बिल को वापस लेकर नया विधेयक लाया जाएगा।”

कमिटी की अहम सिफारिशें– टैक्सपेयर्स को ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख के बाद भी बिना पेनल चार्ज के TDS रिफंड क्लेम करने की सुविधा।

  • कई प्रावधानों को सरल भाषा में बदलना।
  • पुराने, अप्रासंगिक सेक्शन हटाना।

लेकिन ध्यान देने वाली बात: कहीं भी 12 लाख रुपये तक टैक्स माफी का कोई ठोस प्रावधान इस रिपोर्ट या बिल में मौजूद नहीं था।

राजनीतिक सवाल:-

  • अगर स्लैब में बदलाव ही नहीं था, तो चुनाव से पहले मीडिया और नेताओं के जरिए “12 लाख तक टैक्स फ्री” की हवा क्यों बनाई गई?
  • क्या यह सिर्फ दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले का चुनावी नैरेटिव था?
  • क्या नया बिल लाने के नाम पर सरकार संवेदनशील टैक्स सुधारों को टाल रही है?
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