Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

‘डीप स्टेट’ मोदी सरकार को गिरा क्यों नहीं पा रहा है?

जगदीश सिंह-

भारत के जनतंत्र को कोई हल्के में न ले। ताकतवर देश चाहते रहते हैं कि विश्व में हर जगह, कमजोर, अस्थिर भ्रष्ट सरकारों का राज हो, जिससे वहाँ के संसाधनों का दोहन कर सकें। वे युद्ध की स्थितियाँ बनाकर, अपने हथियारों को भारी मात्रा में, ऊँचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफ़ा कमाते रहने का श्रोत बनाते हैं।

पाकिस्तान, बांग्लादेश में वे सफल भी हो चुके हैं । पर वे हिंदुस्तान के जनतंत्र की ताक़त को ठीक से नहीं पहचान पा रहे। यहाँ कि जनता ने तो इंदिरा गांधी के सशक्त जबड़े से भी जनतंत्र को खींचकर, वापस ले लिया था। हमारी जनता में स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों का जज़्बा कूट-कूट कर भरा है। किसी में इतना दम नहीं कि हमारी चुनी हुई सरकार को हटाकर, किसी भ्रष्ट, मंदबुद्धि नशेड़ी को गद्दी पर बैठा दे। हाँ वे हमें बीच बीच में परेशानी में डाल सकते हैं, पर हम उनकी धौंस में आकर, अपने देशहित का बलिदान कभी न होने देंगे । हाँ, सजगता और सावधानी ज़रूरी है।

पहले समझें, डीप स्टेट होता क्या है?

सरकार बदलने से डीप स्टेट नहीं बदल जाता। बाइडेन, ओबामा, निक्सन थे तब भी वह था, आज भी वह वैसे ही है। वह कार्पोरेट्स, राजनीतिक दलों, ब्यूरोक्रेट्स, बिचौलियों तथा माफ़ियाँ का अटूट एवं बहुत क्रूर गठबंधन है। सीआईए उसका संचालन करती है। जार्ज सोरोस जैसे लोग उसे धन मुहैया कराते हैं। उसे पूरी दुनियाँ में भ्रष्ट और निकम्मी कमजोर सरकारें चाहिए, जो उनके इशारों पर कठपुतली की तरह नाचें। जो अपने देश को नुक़सान पहुँचा कर, अमेरिकी हथियारों तथा अन्य सामानों को मंहगे दामों पर ख़रीदें; डालर के वर्चस्व को चुनौती न दें; चीन और रूस से दूरी तथा अमेरिका से नज़दीकी बनाकर रखें। उनके लिए वे किसी सरकार को गिराने के लिए हज़ारों करोड़ आराम से खर्च कर सकते हैं।

अपनी नई मनपसंद सरकार बनवा कर वे लाखों करोड़ कमा सकते हैं। यह विशुद्ध व्यापार है। इसमें दया भाव एवं नैतिकता के लिए कोई जगह नहीं। वे दंगे करा सकते हैं, नरसंहार करा सकते हैं। समाज को बाँट कर, गृह युद्ध करा सकते हैं।

भारत में यह डीप स्टेट अभी सफल क्यों नहीं हो पा रहा?

यहाँ संसद में दलों की स्थिति ऐसी है कि मोदी की सरकार गिरा कर भी कांग्रेस की सरकार नहीं बन सकती। मान लीजिए, नायडू को पाँच छ: सौ करोड़ मिले और वे सरकार से सपोर्ट वापस ले लें और कांग्रेस को सपोर्ट कर दें। दिक़्क़त है कि कांग्रेस की सरकार फिर भी नहीं बन सकती। बिहार का राजनीतिक गणित ऐसा है कि जेडीयू अपना समर्थन वापस ले ही नहीं सकती।

तो अगर आज भारत सरकार गिर भी जाए, तो नया चुनाव ही करवाना पड़ेगा। देश की जनता पर एक चुनाव का बोझ पड़ेगा । ऊपर से वह धोखा देने वाले दल का सूपड़ा साफ़ कर देगी। कांग्रेस भी सीटें खोएँगी ही, बढ़ने की संभावना शून्य है। बीजेपी इतनी मज़बूत स्थिति में उभर कर आ जाएगी कि किसी बैसाखी की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी। डीप स्टेट का निवेश बर्बाद हो जाएगा। डीप स्टेट, राहुल, चंद्र बाबू नायडू को यही डर है। यह डर अच्छा है।

लेखक सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
4 Comments

4 Comments

  1. Dayal chand yadav

    August 14, 2025 at 4:38 pm

    आपके लेख से भाजपा समर्थक होने की बू आ रही है. यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहद कमजोर और लिजलिजी सरकार है। इसने भारत की छवि को दुनिया भर कमजोर किया है। यहाँ तक की अटल और सुषमा की विदेश नीति को इसने कूड़ेदान में फेंक दिया है. अब इसका डंका जगह जगह फट गया है।

  2. Amit Nehra

    August 15, 2025 at 6:21 pm

    किसी भ्रष्ट, मंदबुद्धि नशेड़ी?
    कहना क्या चाहते हो?

  3. के पी सिंह

    August 16, 2025 at 5:10 pm

    75के बाद की उम्र को चौथापन कहा गया है जो जीवन का अंतिम चरण है. माना यह जाता है कि इस उम्र को पार करने के बाद जीवन का दिया कब बुझ जाए ठिकाना नहीं होता. इरादा किसी के लिए अमंगल की कामना करने का नहीं है लेकिन चौथेपन में प्रविष्ट अपने कर्ता धर्ता का विकल्प सोचने वालों के दिमाग को कुंद करने का प्रयास वही करेगा जिसे देश प्रेम की ए बी सी डी पता न हो. अगर देश एक व्यक्ति के भरोसे है और उसका कोई विकल्प नहीं है तो अचानक घटना होने पर देश का क्या होगा. किंककर्तव्य विमूढता में देश के लोगों को क्या एक साथ हाराकीरी कर लेने का इन महोदय का सुझाव है.

  4. Kp singh

    August 16, 2025 at 5:24 pm

    वैसे इन महोदय के बारे में भी मेरी जिज्ञासा है कि ये किस पद पर रहे हैं ताकि मैं जान सकूं कि देश की इतनी चिंता करने वाले ने पद पर रहते हुए देश और समाज़ के लिए क्या बघारा था. यह भी कि भ्रष्ट और नशेलची किसे कह रहे हैं. हर नेता के बारे में आलोचक किस्से बताते रहते हैं. मोदी जी ने अपनी व्याहता को जीवन भर अनाथ जिंदगी जीने के लिए मजबूर किया इसके बचाव में क्या नैतिक तर्क हो सकता है. जब वे प्रधानमंत्री बने ही थे तब पी एम आवास पर तैनात एस पी जी के महिला स्टाफ की परेशानी की बात उड़ाई गयी थी. सुब्रमण्यम स्वामी सोनी नाम की एक लड़की को ले कर जाने क्या क्या कहते रहते हैं. किसी सार्वजनिक व्यक्तित्व पर निजी टिप्पणी तब तक नहीं करनी चाहिए जब तक आपकी जानकारी पक्की न हो.लेकिन इन्होने निराधार लक्ष्मण रेखा लांघ कर अपनी कलुषित मानसिकता का प्रदर्शन किया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन