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नोएडा के पत्रकार महकार भाटी को मिली राहत, गैंगस्टर एक्ट में फंसाने की साजिश पर हाईकोर्ट की रोक

ट्राइसिटी टुडे के संपादक पंकज पाराशर के साथ काम करने वाले पत्रकार महकार भाटी की गिरफ्तारी को हाईकोर्ट ने रोका

गौतमबुद्धनगर : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के पत्रकार महकार भाटी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। महकार भाटी ने गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें झूठे मामलों के आधार पर फंसाया गया है। याचिका में कहा गया कि जिन दो मामलों के आधार पर पुलिस ने गैंगचार्ट तैयार किया, उनमें उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है।

जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अब्दुल शाहिद की खंडपीठ ने मामले को विचारणीय मानते हुए नोएडा पुलिस को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई या पुलिस रिपोर्ट आने तक महकार भाटी की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।

महकार भाटी के वकील ने अदालत को बताया कि एफआईआर दर्ज करने से पहले कोई उचित जांच या विचार-विमर्श नहीं किया गया और बिना चर्चा के गैंग चार्ट तैयार कर दिया गया, जो कानून की मूल भावना के खिलाफ है। यह मामला पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़ा करता है, क्योंकि इसे सक्रिय और निष्पक्ष पत्रकारों को निशाना बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

अदालत ने साफ कर दिया कि महकार भाटी की गिरफ्तारी अगली सुनवाई या पुलिस रिपोर्ट आने तक नहीं होगी। जिन दो मामलों के आधार पर गैंगचार्ट तैयार किया गया, उनमें महकार भाटी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। वकील ने कोर्ट को बताया कि बिना उचित जांच और चर्चा के गैंग चार्ट तैयार किया गया, जो कानून की मूल भावना के खिलाफ है। यह आदेश उन पत्रकारों के लिए मिसाल है, जिन्हें उनके बेबाक लेखन और खुलासों के कारण निशाना बनाया जाता है।

महकार भाटी ने गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने बताया कि उन्हें गलत तरीके से इस केस में फंसाया गया है, जबकि जिन दो मामलों के आधार पर गैंगचार्ट तैयार किया गया था, उनमें उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में उनका नाम पत्रकार पंकज पाराशर से भी जोड़ा गया था। इस मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि पत्रकारों को उनके काम के कारण निशाना बनाया जा रहा है।

जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अब्दुल शाहिद की बेंच ने मामले को विचारणीय मानते हुए महकार भाटी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने नोएडा पुलिस को दो हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया है।

महकार भाटी के वकील का कहना है कि एफआईआर दर्ज करने से पहले कोई उचित जांच या विचार नहीं किया गया और बिना चर्चा के गैंग चार्ट तैयार कर दिया गया। यह मामला एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि सक्रिय और प्रभावशाली पत्रकारों को उनके काम के कारण निशाना बनाया जा रहा है।

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