सुभाष सिंह सुमन-
इस सरकार में अगर किसी का पीआर बहुत तगड़ा है तो वो हैं गडकरी जी। काम दो बित्ते का और प्रचार चार किलोमीटर का। यह गडकरी जी के काम करने का मूलमंत्र है। इसे अनको उदाहरणों में देखा जा सकता है। अभी ताजा है ई20 वाला। इंटरनेट पर खोजेंगे तो गडकरी जी के दर्जनों बयान मिल जायेंगे, जिनमें दावा मिलेगा कि डीजल-पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से ईंधन सस्ता हो जायेगा, देश को डॉलर की बचत होगी, व्यापार घाटा कम हो जायेगा और अर्थव्यवस्था को बहुत फायदा होगा।
अब ईंधन कितना सस्ता हुआ, इसका डेटा सार्वजनिक है। रही बात देश के डॉलर बचने, व्यापार घाटा कम होने और अर्थव्यवस्था को फायदा होने की, तो इनकी पुष्टि करने वाले आँकड़े गडकरी जी तो क्या ही देंगे, साक्षात चित्रगुप्त नहीं दे पायेंगे। इससे पूर्ति नाम से जुड़ी कुछ डेढ़ दर्जन कंपनियों को जरूर तगड़ा फायदा हो गया होगा।
ई20 पेट्रोल के नुकसान भी थोक के भाव गिनाये जा सकते हैं। सबसे पहले तो माइलेज की लंका लग गयी है। मैं इधर कुछ दिनों से परेशान था कि दोनों गाड़ियाँ एक साथ कम माइलेज कैसे देने लगी हैं, फिर इंटरनेट पर माइलेज का रोना रोते हजारों गाड़ी वाले बंधु मिले। समझ में आया कि दिक्कत गाड़ी में नहीं, मंत्री महोदय की सनक में है।

कई लोग इंजन को नुकसान होने की भी बात कर रहे हैं। इतनी विशेषज्ञता है नहीं कारों की, तो दावे के साथ हम कुछ नहीं कह सकते, लेकिन कई विशेषज्ञ भी नुकसान की बात कह रहे हैं। गडकरी सीना ठोक कर नहीं मान रहे, वह अलग बात है।
यदि सरकार के गिनाये सारे फायदे सच हैं, तब भी ई20 जैसा कोई काम करने से पहले ये 3 काम सरकार को करने चाहिए थे:
- लोगों को सामान्य पेट्रोल भरवाने का विकल्प मिलना चाहिए। जैसे पावर वाले का मिलता है, वैसे ही।
- इथेनॉल वाले की कीमत कायदे से सामान्य पेट्रोल से कम होनी चाहिए थी।
- कार इंश्योरेंस में ईंधन के चलते इंजन के नुकसान का कवरेज अनिवार्य करना चाहिए था।
(गडकरी के तगड़े पीआर का आलम कुछ ऐसा है कि उनके ऊपर कांग्रेस से लेकर केजरीवाल तक मोहित हुए रहते हैं।)
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