नई दिल्ली: भारत में प्राइवेसी को लेकर नई बहस छिड़ गई है। वजह है आयकर विधेयक 2025, जिसके प्रावधानों के तहत आयकर विभाग को करदाताओं के ईमेल, व्हाट्सएप चैट और सोशल मीडिया अकाउंट तक पहुंच का अधिकार मिल जाएगा। आयकर अधिकारियों को यह शक्ति तलाशी और सर्वे की कार्रवाई के दौरान मिलेगी।
आलोचकों ने उठाए सवाल
कानून विशेषज्ञों और विपक्षी दलों का कहना है कि यह कदम नागरिकों की निजी स्वतंत्रता पर गहरा आघात है। उनका तर्क है कि सरकार जब चाहे किसी भी व्यक्ति की निजी बातचीत, चैट और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच कर सकेगी। आलोचकों ने इसे “सरकारी निगरानी का नया दौर” करार दिया है।
विरोधाभास के आरोप
विरोधियों का कहना है कि वोट चोरी जैसे गंभीर मामलों की जांच के लिए CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं कराई जाती, लेकिन आम नागरिकों के व्हाट्सएप चैट और सोशल मीडिया अकाउंट तक सरकारी पहुंच का रास्ता खोल दिया गया है। इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकार का पक्ष
वहीं, सरकार का कहना है कि इस प्रावधान का उद्देश्य केवल टैक्स चोरी रोकना और आयकर जांच को पारदर्शी बनाना है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का तर्क है कि आम करदाता को इससे डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कार्रवाई केवल संदिग्ध मामलों में ही की जाएगी।
आगे क्या?
नई बिल की प्रावधानों ने संसद से लेकर आम जनता तक गहरी बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस कानून में ठोस सुरक्षा प्रावधान नहीं जोड़े गए, तो यह नागरिक अधिकारों और व्यक्तिगत गोपनीयता के लिए खतरनाक मिसाल साबित हो सकता है।
वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने एक वीडियो क्लिप शेयर कर लिखा है-
आयकर के नए कानून के अनुसार सरकार को व्हाट्सएप चैट से लेकर सोशल मीडिया अकाउंट देना पड़ेगा। इससे प्राइवेसी का हनन नहीं होगा। वोट चोरी हो रही है इसकी जाँच के लिए CCTV footage नहीं देंगे। जनता के तन और मन से पर्दा हटा दो और ख़ुद पर्दे में।
बहू बेटियों के नाम पर वोट चोरी का अपराध छुपा रहे हैं और किसी को तंग करना हो तो व्हाट्सएप चैट पढ़ेंगे।


