“भारतीय टीवी चैनलों ने मोदी-पुतिन की कार वाली मुलाक़ात को ‘कैमिस्ट्री और फिज़िक्स’ में बदल दिया, जबकि हक़ीक़त में वह महज़ 30 सेकंड की टूटी-फूटी अंग्रेज़ी में हुई औपचारिक बातचीत थी। पुतिन ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ़ कर दिया कि न कोई रहस्य था, न बड़ी वार्ता—लेकिन हमारे चैनलों ने ठहाकों और तस्वीरों से किस्सों का पहाड़ खड़ा कर दिया।”

इस प्रकरण पर वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह ने लिखा है-
भारत में तो प्रधानमंत्री ने किसी भी बात पर प्रेस के सामने सवाल जवाब के जरिए देशवासियों को सूचित करने की रवायत ही ख़त्म कर दी है लेकिन दूसरे देशों में यह कायम है।
उसी से पता चला कि हमारे मीडिया में मोदी-पुतिन कार में हुई बातचीत पर जो अनेक कहानियां गढ़ी गईं वे बेबुनियाद थीं।
इस पर अपने देश लौटने पर प्रेस को जवाब देते हुए पुतिन ने कहा कि “टूटी फूटी अंग्रेजी में बात की। मेरा शब्दकोश सीमित है।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा: “मैं खुश हूं तुम्हें देखकर, प्रिय पड़ोसी” और “मैं खुश हूं तुम्हें जीवित देखकर”।
लिमो में 30 सेकंड की छोटी बात, कोई रहस्य नहीं, अलास्का वार्ता पर भी चर्चा हुई”।
बस इतना भर था। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री की ठहाका लगाती चित्र माला से नोएडा चैनलों ने देश में अनेक किस्से/कैमिस्ट्री/फिजिक्स सब पैदा कर लिये।
यहां पढ़ें पुतिन का बयान और नीचे वीडियो देखें…
पुतिन ने कहा- “बीजिंग में आधिकारिक दौरे के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि दुनिया अब 500 साल पुराने पश्चिमी वर्चस्व से बाहर निकल रही है और बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है।
पुतिन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी मुलाक़ात को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि यूरोप ने रूसी गैस खो दी है और इससे वैश्विक शक्ति संतुलन पर बड़ा असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में पश्चिमी नेताओं में उनका कोई समकक्ष नहीं है। पश्चिमी मीडिया उन्हें जिस तरह “दानव” की छवि में पेश करता है, वह वास्तविकता से बिल्कुल अलग है। पुतिन के अनुसार, वह शांत, संतुलित और सोच-समझकर फैसले लेने वाले नेता हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की बढ़ती तनातनी के नतीजों की गहरी समझ है।”


