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पीटीआई से भारतीय सूचना सेवा तक एक पत्रकार का सफरनामा पढ़ें!

प्रियभांशु रंजन-

भारतीय सूचना सेवा (Indian Information Service) के सदस्य के तौर पर भारत सरकार की सेवा में आज छह साल पूरे हुए हैं। बीते छह साल में देश के तीन अलग-अलग राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश में तीन अलग-अलग विभागों में काम करने का अवसर मिला।

छह साल की छोटी सी अवधि में तीन अलग-अलग स्थानों और विभागों में काम करने का सौभाग्य बहुत कम अधिकारियों को मिल पाता होगा!

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (नई दिल्ली) में 10 साल चार माह तक पत्रकारिता करने के बाद भारत सरकार की सेवा में आया तो शुरुआत मध्य प्रदेश से हुई, जहां केन्द्रीय संचार ब्यूरो (Central Bureau of Communication) में क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी के तौर पर छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, दमोह और निवाड़ी जिलों में खूब दौरे करने का अवसर मिला। कुछ ऐसे जनजाति बहुल इलाकों में भी काम करने का मौका मिला, जहां कोई सरकारी अधिकारी जाना नहीं चाहता।

मध्य प्रदेश में लगभग एक साल का ही कार्यकाल पूरा हो सका था कि बीच में ही कोरोना महामारी ने दस्तक दे दी, दौरों पर ब्रेक लग गया और फिर ‘बाय चॉइस’ अरुणाचल प्रदेश में पोस्टिंग ले ली।

कोरोना के प्रकोप के बीच अरुणाचल प्रदेश में दूरदर्शन समाचार के प्रमुख के तौर कार्यभार संभाला। कुछ महीनों के बाद वहां प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) का अतिरिक्त प्रभार भी दे दिया गया। बहरहाल, दूरदर्शन और PIB की जिम्मेदारियों को निभाने के क्रम में अरुणाचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों को देखने-समझने की कोशिश की।

सरकारी दौरों का सिलसिला अरुणाचल प्रदेश में भी जारी रहा। राज्य के बेहद रिमोट लोकेशंस, भारत-चीन सीमा क्षेत्र और भारत-भूटान सीमा क्षेत्र में जाने के मौके मिले। यह दौरे स्थानीय लोगों, उनके रहन-सहन, उनके विचारों और उनकी संस्कृति को समझने में मददगार साबित हुए।

अरुणाचल में बिताए दिन इस मायने में भी शानदार रहे कि वहां सहकर्मी रहे कुछ लोग अब अच्छे दोस्त बन चुके हैं। तीन साल बिताने के बाद अरुणाचल अपना सा लगता है। किसी को अरुणाचल के बारे में बताने या वहां से जुड़ी कोई मदद करते वक्त एक अलग लेवल का कॉन्फिडेंस महसूस होता है।

ईटानगर के बाद अब पिछले दो साल से नई दिल्ली में केन्द्रीय गृह मंत्रालय की सेवा में हूं। गृह मंत्रालय में अपने काम के बारे में बस इतना बता सकता हूं कि यहां काम करने के जैसे सुनहरे अवसर मुझे मिले हैं, वो शायद भविष्य में बहुत कम मिल सकेंगे!

कुल मिलाकर, बीते छह साल बहुत ही संतोषप्रद रहे हैं। सवाल पूछने वाले पत्रकार से लेकर सरकार से जुड़े सवालों के जवाब देने वाले मीडिया अधिकारी बनने तक का सफर निश्चित तौर पर‌ रोमांचित करने वाला रहा है। भविष्य में लंबा सफर तय करना है। उम्मीद है आगे की यात्रा भी रोमांचक रहेगी!

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