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आज के अखबार : हिंदुत्व, हेडलाइन और हकीकत से प्रभावित उपराष्ट्रपति चुनाव की अधूरी तस्वीर

आखिरी पंक्ति में मोदी – मीडिया की पहली पसंद और चुनाव चोरी पर चुप्पी का लोकतंत्र

संजय कुमार सिंह-

चुनाव चोरी, उपराष्ट्रपति चुनाव, बारिश-बाढ़, अमेरिकी टैरिफ आदि के बीच आज इंडियन एक्सप्रेस के आईडिया एक्सचेंज में एकनाथ शिन्दे से बात-चीत है। पहले पन्ने पर छपी इसकी सूचना के अनुसार इसमें शिन्दे ने सवाल किया है, लोकसभा चुनाव में क्या हमने कहा कि उन्होंने वोट चुराए हैं? उन्हें ज्यादा सीटें मिली थीं, मिली थीं ना? कहने की जरूरत नहीं है कि वोट चोरी के आरोपों के बीच इस तर्क और दलील का क्या मतलब है और यह किस स्तर का बचाव है। यह उनकी राजनीति है और इससे दिक्कत हो तो ऐसे लोगों को वोट नहीं देने का विकल्प हमारे पास है और चुनाव चोरी का मामला इसी लिये गंभीर होता जा रहा है पर मेरी चिन्ता अखबारों की खबरें और रिपोर्टिंग है। जब हिन्दुत्व और भ्रष्टाचार दूर करने के नाम पर सत्ता में आई पार्टी वोट चोरी करती पकड़ी गई (या आरोप लगा) तो निष्पक्ष मीडिया से पाठक-दर्शक क्या उम्मीद करेगा? यही ना कि वे इसका सच बतायेंगे। हालांकि, निष्पक्ष पत्रकारिता का तकाजा है कि दूसरा पक्ष भी बताया जाये। से में इस समय कौन क्या कर रहा है इसे देखना-समझना पाठकों का काम है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि वोट चोरी के आरोपी को अपना मंच देना, उनके तर्कों-कुतर्कों को प्रचार देना भी पत्रकारिता ही है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है, विपक्ष घुसपैठिया बचाओ आंदोलन चला रहा है। यह देशबन्धु में पहले पन्ने पर दो कॉलम का शीर्षक है। टॉप का। बेशक कहा है तो खबर है और कैसे कितनी बड़ी छपेगी – यह संपादकीय विवेक का मामला है।

चुनाव चोरी का आरोप देश के लोकतंत्र के लिए गंभीर मामला है। मंदिर बनाने जैसी सेवा देने के नाम पर हिन्दुत्व भड़का कर सत्ता पाने वाले लोग अगर चुनाव आयोग की मिलीभगत से चुनाव चोरी करने लगे तो सबके कान खड़े हो जाने चाहिये थे। सत्तारूढ़ पार्टी के कर्ता-धर्ता, परिवार, उसके मुखिया और बच्चों यानी बच्चा संगठनों के भी। लेकिन हो क्या रहा है – चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में जबरदस्ती के खिलाफ शिकायत सुप्रीम कोर्ट में है और चुनाव आयोग मनमाना एसआईआर करा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में मामला होने के बावजूद देश भर में करवाने की तैयारी है। पूरे विरोध के बावजूद एसआईआर में चुनाव आयोग की मनमानियों जारी हैं। चुनाव चोरी और मिलीभगत के कितने ही उदाहरणों के बावजूद कोई रोक नहीं, कोई शर्म नहीं, नैतिकता का कोई मामला ही नहीं है। खबर भी पहले पन्ने पर कहीं-कहीं, कभी-कभी ही जगह बना पा रही है। ऐसे में विपक्ष के नेता, मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है, चुनाव आयोग भाजपा को बचा रहा है। यह देशबन्धु में यह लीड है लेकिन दूसरे कई अखबारों में पहले पन्ने पर भी नहीं है। कहने की जरूरत नहीं है कि विपक्ष अगर घुसपैठिया बचाओ आंदोलन चला रहा है, यह गलत है तो सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी क्या कर रही है और क्या सरकार विपक्ष से कमजोर है कि वह रोक नहीं पा रही है। इसलिए संबित पात्रा अपनी राजनीति करें पर यह खबर कैसे है या बयान भी क्यों? देश में घुसपैठिये हैं तो क्यों, कहां से कब आये और क्यों रह रहे हैं, सरकार क्या कर रही है और दस साल से ज्यादा में कुछ नहीं कर पाई तो कब करेगी और अगर हैं तो अखबारों ने क्या किया, खबर क्यों नहीं की?

आज खबर यह भी है कि भाजपा के सांसदों की दो दिवसीय कार्यशाला में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आखिरी कतार में बैठे। यह अमर उजाला में चार कॉलम की खबर है। बेशक, बैठे तो खबर होगी ही लेकिन बैठे क्यों? यह उनका, उनकी पार्टी और उनके सांसदों के बीच का मामला नहीं है? आखिरी कतार में बैठने से उन्हें, देश को पार्टी को या अखबार को क्या फर्क पड़ेगा। इस खबर से कौन सा देश हित या जनहित जुड़ा हुआ है? कोई भी समझ सकता है कि यह हेडलाइन मैनेजमेंट का भाग हो सकता है और खबर वह भी हो ही सकती है। द टेलीग्राफ में आज यही खबर है। निश्चित रूप से यह खबरों की समझ का मामला है। खबर का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, उपराष्ट्रपति चुनाव हांकने के लिए मोदी पिछली सीट पर। यह जेपी यादव की खबर है, उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों को एकजुट करने के लिए अपनी पार्टी द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को आखिरी पंक्ति में बैठे और एक “आम भाजपा कार्यकर्ता” की छवि बनाने की कोशिश की। कार्यशाला में मोदी को “ऐतिहासिक” जीएसटी सुधारों के लिए सम्मानित किया गया और सत्तारूढ़ सांसदों को कुछ ऐसे मुद्दे दिए गए अंतिम पंक्ति में बैठे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भाजपा की ताकत के प्रतीक हैं; प्रत्येक कार्यकर्ता इस संगठन का हिस्सा है।” बाद में, खुद मोदी ने भी आखिरी पंक्ति में बैठे अपनी तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने पोस्ट किया, “दिल्ली में ‘संसद कार्यशाला’ में शामिल हुआ। पूरे भारत से आए सांसद सहयोगियों और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विविध मुद्दों पर बहुमूल्य विचारों का आदान-प्रदान किया।”

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए सत्तारूढ़ दल या गठबंधन की इस बैठक की खबर तो अमर उजाला में पहले पन्ने पर है लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव की कोई खबर इस पन्ने पर नहीं है। आज नवोदय टाइम्स की लीड उपराष्ट्रपति चुनाव है। सभी अपने कील कांटे दुरुस्त करने में जुटे। कहने की जरूरत नहीं है कि भिन्न कारणों से उपराष्ट्र्रपति चुनाव बड़ा मामला है। कल चुनाव होने हैं और आज पहले पन्ने पर तैयारियों या चालों की कोई खबर नहीं होना असामान्य है। उपशीर्षक है, विपक्ष के सांसदों को आज दी जाएगी जानकारी मॉक मतदान होगा। यह चुनाव पूर्व सर्वेक्षण की तैयारियों जैसा लग रहा है। नवोदय टाइम्स में आज एक डरावनी खबर है। इसके अनुसार, तृणमूल नेता और मालदा जिले के अध्यक्ष अब्दुर रहीम बख्शी ने विधानसभा में भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक व विधायक के मुंह में तेजाब डालने की धमकी दी है। इस खबर का शीर्षक है, ये बंगाल है…. तुम्हारे मुंह में तेजाब डाल दूंगा। आप जानते हैं कि बंगाल में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। एसआईआर की तैयारी है और भाजपा विधायक को तृणमूल नेता की यह खुली धमकी भाजपा की चुनावी तैयारियों का हिस्सा भी हो सकता है। बंगाल की खबर दिल्ली में पहले पन्ने पर इस तरह छपना असामान्य है और यह दूसरे अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है। भाजपा के पक्ष में इस तरह की खबरें छपना आम है। भाजपा नेताओं के कारनामों को अमूमन इतनी प्रमुखता नहीं मिलती है।

उदाहरण के लिए भाजपा के समर्थक एक पत्रकार ने आज फेसबुक पर लिखा है, 2024 के लोक सभा चुनाव में जार्ज सोरोस के पैसे उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ चुने हुए चुनाव क्षेत्रों में खूब बंटे (थे)। 25 मार्च 2025 की एक खबर के अनुसार, सीएम योगी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने जॉर्ज सोरोस के पैसे का इस्तेमाल 2024 लोकसभा चुनावों को प्रभावित करने के लिए किया। तथ्य यह है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा महासचिव विनोद तावड़े पर पैसे बांटने के आरोप लगे थे, एफआईआर हुई थी। तावड़े ने तब इसे साजिश कहा था जबकि ₹5 करोड़ बांटने का दावा था, होटल से ₹9 लाख मिले थे। यह एक मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट उल्लंघन की (नकद व शराब बांटने का) और कैश फॉर वोट का मामला तो था ही मौन अवधि में प्रेस कॉन्फ्रेंस या कार्यकर्ताओं को संबोधित करने का मामला तो था ही। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र चुनाव में गड़बड़ी के कई आरोप लगाये हैं। उसकी खबरें अखबारों में जहां जितनी छपी के अलावा तथ्य यह है कि एक मराठी फिल्म के बारे में कार्यकर्ताओं को बताने के लिए बल्क एसएमएस भेजने की कांग्रेस की मांग को ट्राई ने खारिज कर दिया। 30 मिनट से ऊपर के वीडियो की सूचना एसएमएस से भेजने की मांग 70 मिनट में खारिज हो गई लेकिन पैसे बांटने से जुड़े तीन एफआईआर में से किसी में भी कार्रवाई की खबर नहीं है। आप जानते हैं कि ऐसे महाराष्ट्र में डबल इंजन की सरकार है और चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ पार्टी से मिलीभगत का आरोप है। ऐसे महाराष्ट्र के बारे में आज इंडियन एक्सप्रेस की खबर है, मुंबई में यात्रियों को लूटने वाले रेल पुलिस के लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है और 5 महीनों में 13 को निलंबित किया गया है। यह ना खाउंगा ना खाने दूंगा के बावजूद है और अगर सरकारी काम के रूप में हुई होती तो इसकी घोषणा प्रेस कांफ्रेंस करके दी जाती। यह पुराना रिवाज है और अभी भी यदा कदा दिखता रहता है। लेकिन एक्सप्रेस की खबर बाईलाइन वाली है मतलब दी नहीं गई है। और सरकार को बदनाम करने वाली खबर मानी गई होगी। भ्रष्ट सरकार के जमाने में ऐसी कार्रवाई होती रहती थी और मुझे याद नहीं है कि तब पकड़े जाने वालों के बारे में यह बताया जाता था कि कई महीने से धंधा कर रहे थे।

द हिन्दू में उपराष्ट्रपति चुनाव की खबर नहीं है लेकिन वित्त मंत्री की यह घोषणा (शायद तीसरे दिन) दो कॉलम की खबर है कि जीएसटी सुधारों से खपत बढ़ेगी और इससे अर्थव्यवस्था ठीक होगी। इससे पहले जीएसटी वसूली ज्यादा होती थी तो बताया जाता था कि अर्थव्यवस्था ठीक है तभी तो इतना माल बिक रहा है और इतना पैसा आ रहा है। अब जीएसटी में छूट देकर, कीमतें कम करके ज्यादा बेचने की उम्मीद जताई जा रही है और इससे अर्थव्यवस्था में तेजी आयेगी जो पहले भी तेज थी। जीएसटी की नई दरें 22 सितंबर से लागू होनी है लेकिन इसका प्रचार 15 अगस्त से चल रहा है। हिन्दू में आज भारतीय जनता पार्टी की एक और खबर है। शीर्षक के अनुसार पार्टी ने कहा है, राम मंदिर का सपना पूरा हुआ, मथुरा अगली बार। खबर इस प्रकार है, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल में कहा था कि संघ मथुरा और काशी में मंदिरों के लिए होने वाले आंदोलनों में हिस्सा नहीं लेगा, लेकिन अपने कार्यकर्ताओं को इसमें भाग लेने से नहीं रोकेगा। इसके कुछ दिनों बाद भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक बयान जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि राम मंदिर का सपना पूरा हो गया है, अब मथुरा-वृंदावन की बारी है। पार्टी ने एक समाचार चैनल को दिए गए बाबा बागेश्वर के साक्षात्कार का हवाला दिया है। इसमें उन्होंने कहा था कि “अगला (लक्ष्य) मथुरा-वृंदावन है”। भाजपा ने एक्स पर लिखा है, “भगवान राम भी विराजमान हो गए हैं; अब कृष्ण कन्हैया विराजेंगे… बाबा बागेश्वर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और कहा कि आज देश में आस्था और परंपरा का सम्मान किया जा रहा है। राम मंदिर का सपना पूरा हो गया है; अब मथुरा-वृंदावन की बारी है।” आरएसएस प्रमुख ने 29 अगस्त को दिल्ली में कहा था कि संघ किसी भी मंदिर आंदोलन में भाग नहीं लेगा, चाहे वह मथुरा हो या काशी। उन्होंने कहा था, “संघ ने सक्रिय रूप से राम मंदिर आंदोलन में भाग लिया और उसे चरमोत्कर्ष पर पहुँचाया, लेकिन अब वह किसी भी आंदोलन में सीधे तौर पर भाग नहीं लेगा।” श्री भागवत ने आगे कहा, “मथुरा और काशी के संबंध में हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए, क्योंकि समुदाय के मन में काशी, मथुरा और अयोध्या का गहरा महत्व है – दो जन्मस्थान हैं और एक निवास स्थान।” आरएसएस प्रमुख ने सुझाव दिया था कि मुसलमान मथुरा में शाही ईदगाह और वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद पर अपना दावा छोड़ दें।

दैनिक भास्कर में भी आज उपराष्ट्रपति चुनाव की खबर लीड है। शीर्षक के अनुसार 20 साल में जीत का अंतर दो गुना हो गया है और इस बार मुकाबला करीबी है। लेकिन भाजपा के हैंडल से इस ट्वीट और बाबा बागेश्वर के बयान का अलग महत्व है। पुराने समय में ऐसी खबरें प्रधानमंत्री की शिकायत मानी जाती और धर्म विशेष की ऐसी खबर शायद ही पहले पन्ने पर होती लेकिन कोई राजनीतिक (सत्तारूढ़) दल शायद ही ऐसा ट्वीट करता। हिन्दी अखबारों में यह खबर शायद ही ऐसे लिखी जाये। टाइम्स ऑफ इंडिया में पहली लाइन में बताए गए आज के मुद्दों में किसी पर खबर नहीं है और जो खबरें हैं उनमें ऐसी कोई देसी खबर नहीं है जिसका उल्लेख किया जा सके। हिन्दुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने की स्थिति भी आज ऐसी ही है। दि एशियन एज में भी तमाम खबरें नहीं हैं जो हैं उनमें मोदी बाढ़ प्रभावित पंजाब जाएंगे और बिहार में एसआईआर पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी जैसी रूटीन और साधाराण खबर है। टाइम्स ऑफ इंडिया में पहली लाइन में बताए गए आज के मुद्दों में किसी पर खबर नहीं है और जो खबरें हैं उनमें ऐसी कोई देसी खबर नहीं है जिसका उल्लेख किया जा सके। हिन्दुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने की स्थिति भी आज ऐसी ही है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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