नाज़िया खान-
अक्सर लोग पूछते हैं कि कई सारी ऑनलाइन ऐप्स आ गई हैं, जो बीपी, SpO2, और बिन सूई चुभोए शुगर की जाँच का दावा करती हैं। ये कितनी सही या ऑथेंटिक हैं।
तो मैं यही कहूँगी कि ज़्यादातर ऑनलाइन ऐप्स जो बिना किसी एक्स्ट्रा हार्डवेयर (जैसे सेंसर या डिवाइस) के ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर (ग्लूकोज़) और SpO2 (ब्लड ऑक्सीजन सैचुरेशन) मापने का दावा करती हैं, वे पूरी तरह से ऑथेंटिक या सटीक नहीं होतीं। ये ऐप्स कैमरा, माइक्रोफोन या फिंगरपल्स जैसे फीचर्स का इस्तेमाल करके अंदाज़े से रीडिंग देती हैं, लेकिन मेडिकल स्टैंडर्ड्स के अनुसार ये विश्वसनीय नहीं हैं। ग़लत रीडिंग से लेने के देने भी पड़ सकते हैं।
बीपी के लिये Omron HeartGuide (FDA क्लियरेंस वाला) या Samsung Galaxy Watch की फिर भी ठीक होती हैं रीडिंग्स।
और शुगर के मुआमले में तो कतई रिस्क न लें। बिना स्किन पियर्स (सुई चुभोए) मापने वाली ऐप्स या स्मार्टवॉच/रिंग्स पूरी तरह अविश्वसनीय हैं। बस CGM (Continuous Glucose Monitoring) डिवाइस जैसे Freestyle Libre (ऐप से कनेक्टेड) FDA-अप्रूव्ड हैं, जो स्किन पर सेंसर लगाते हैं। बाक़ी कोई भी ऐप, जो कैमरा या टच से शुगर मापने का दावा करे, वह फ़र्ज़ी है। फोन शुगर नहीं बता सकता। mySugr या Glooko बस ट्रैकिंग और रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए अच्छी हैं, मापने के लिए नहीं।
डायबेटिक पेशेंट्स के लिये सबसे ज़रूरी है, हर तीन महीने में लैब टेस्ट कराना। फिर घर पर चाहे कभी भी ग्लूकोमीटर से टेस्ट किया हो। लैब रीडिंग की एक्यूरेसी का मुक़ाबला कोई नहीं कर सकता।
फास्टिंग ब्लड शुगर (FBS) के लिये सुबह ख़ाली पेट, या कम से कम 8-10 घंटे तक कुछ न खाने के बाद जाएं। यह आपके बेसलाइन शुगर लेवल को मापता है, जब शरीर में रिसेंटली कोई ग्लूकोज़ इनटेक न हुआ हो।
इसके लिये रात में हल्का खाना खाएं, करें, भारी भोजन या मीठी चीज़ें या ऐसी चीज़ें, जो आमतौर पर नहीं खाते हों, न खाएं। नॉर्मल फुल डाइट लें। पानी पी सकते हैं, लेकिन चाय, कॉफी, जूस आदि से बचें।
खाने के बाद वाली जाँच बहुत ज़रूरी होती है। पोस्टप्रैंडियल ब्लड शुगर (PPBS) खाना खाने के ठीक 2 घंटे बाद करा लें। इससे पता चलता है कि खाने के बाद आपका शरीर ग्लूकोज़ को किस तरह से प्रोसेस कर रहा है। इसके लिये भी नॉर्मल फुल डाइट लें, कुछ एक्स्ट्रा घटाएं या बढ़ाएं नहीं। चावल, स्टार्च, शुगर तो अवॉयड करना है ही।
हाँ, HbA1c (ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन) कभी भी कराया जा सकता है। इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता कि पेट भरा है, ख़ाली है, क्योंकि यह पिछले 2-3 महीने का एवरेज शुगर लेवल दिखाता है। इससे पता चलता है कि डायबिटीज़ का लॉन्ग टर्म कंट्रोल कैसा जा रहा है।
घर पर ग्लूकोमीटर से जाँच रहे हैं तब भी इसी तरह टेस्ट करें तो एक्यूरेसी रहेगी पर यह ज़रूर ध्यान रखें कि ग्लूकोमीटर अच्छी क्वालिटी का हो। FDA, CE या ICMR सर्टिफाइड ब्रांड चुनें, जैसे- Accu-Chek (Roche), OneTouch (LifeScan), Contour Next one (Bayer) Dr. Morepen etc.
हाथ अच्छे से धोकर साफ़ करें। अच्छी तरह सुखाएँ, गंदी उंगलियों (खाना, जूस, या मीठा कुछ लगा हो) से रीडिंग ग़लत हो सकती है। गीली उंगली भी रीडिंग को प्रभावित कर सकती है। अल्कोहल स्वैब से उंगली साफ़ करें और सूखने दें (अल्कोहल रीडिंग को बदल सकता है)।
ग्लूकोमीटर की बैटरी चेक करते रहें।टेस्ट स्ट्रिप्स को ठंडी, सूखी जगह पर स्टोर करें। नमी या गर्मी से ख़राब हो सकती हैं। डेप्थ सेट करने के लिये नए यूज़र्स 1-2 लेवल और 3-4 पुराने पेशेंट्स के लिए।
उंगली के किनारे (साइड) को चुभाएँ, क्योंकि इसमें कम दर्द होता है। लैंसेट डिवाइस से उंगली पर हल्का दबाव डालें, जिससे ब्लड ड्रॉप निकले, लेकिन ज़्यादा ज़ोर से न दबाएँ, इससे टिश्यू फ्लूइड मिल सकता है और रीडिंग ग़लत हो सकती है। उंगलियां बदलते रहें ताकि कैलस फॉर्मेशन न हो।
SpO2 के लिये बस इतना याद रखें कि सस्ते से सस्ता पल्स-ऑक्सिमीटर भी आपके महँगे स्मार्टफोन से बेहतर और सही रीडिंग देगा। ये ऐप्स फोटोप्लेथिस्मोग्राफी (PPG) टेक्नोलॉजी यूज़ करती हैं, जो पल्स तो माप सकती है लेकिन BP, शुगर या SPO2 के लिए काफ़ी नहीं। कैमरा-बेस्ड ऐप्स (जैसे DigiDoc) 97-100% रेंज में ही रीडिंग देती हैं और लो ऑक्सीजन (70-85%) को सही नहीं माप पातीं। स्मार्टवॉच जैसे Apple Watch या Fitbit SpO2 ट्रैक करती हैं, लेकिन ये जनरल वेलनेस के लिए हैं, मेडिकल डायग्नोसिस के लिए नहीं।


