यशवंत सिंह-
ये मनोज दुबे जी हैं। आईएनपी टेक्नोलॉजी के मालिक। जौनपुर के मूल निवासी। अब मुंबई में निवास। मुंबई में ही कंपनी का मुख्यालय।
मनोज जी के जीवन को जब गहराई से मैंने समझना शुरू किया तो पाया कि इनके जीवन में जितना उतार चढ़ाव आया, उतना कम लोग ही झेल पाते हैं। इनका बचपन बेहद अभावों में गुजरा। पिताजी विशुद्ध पंडितजी थे। यज्ञ हवन पूजा करना उनका मूल कार्य था। मनोज जी ने भी ये कार्य बचपन में किया है। बाद में भागकर मुंबई चले गए। एक दुकान में होम डिलीवरी का काम मिला। कई कई मंजिला वाले फ्लैट्स में राशन सामान आदि ढो कर पैदल ही पहुंचाते थे। ये सब करते हुए पढ़ाई को पकड़े रखा।
ग़ज़ब की जिजीविषा। जीवन के संघर्षों ने बहुत इम्तिहान लेने के बाद अच्छे दिन की शुरुआत कराई। इसरो में सेलेक्ट हो गए। साइंटिस्ट बन गए। बहुत बड़े पद पर पहुँच गए। देशहित के बहुत सारे बड़े और गोपनीय प्रोजेक्ट्स किए।
इस बीच इनकी पोस्टिंग गुजरात में हो गई। गुजरात की मिट्टी से निकलने वाली बिजनेस की ख़ुशबू इनके नथुनों में फ़ैल गई। रिजाइन देकर खुद का काम शुरू किया। आज आईएनपी टेक्नोलॉजी सैकड़ों करोड़ वाली कंपनी है। कई राज्यों में सरकार के प्रोजेक्ट्स ये कंपनी हैंडल करती है। ई-कोर्ट्स भी इन्हीं की देन है। बहुत सारे काम और बहुत सारे रिकॉर्ड्स इनकी कंपनी के नाम है। मेक इन इंडिया को सही मायने में परिभाषित करती है इनकी कंपनी।
मनोज जी के जीवन का ज्यादातर हिस्सा मीटिंग, होटल और जहाज में गुजरता है। चलते रहना इनका जीवन है। मुंबई से सुबह चलेंगे तो दिल्ली, जयपुर, लखनऊ में सेम डे मीटिंग कर रात में मुंबई वापस पहुँच जाते हैं।
मनोज दुबे जी को अपनी मिट्टी से बहुत प्यार है। अपने गाँव के लिए इन्होंने जितना कुछ कर दिया है और कर रहे हैं, वो अनुकरणीय है। मनोज जी ने अपने हिस्से का भयंकर स्ट्रगल बचपन, किशोर और जवानी में कर लिया। अब ये सक्सेस मोड में हैं। इनका एकमात्र लक्ष्य अपनी कंपनी को बहुत ऊँचाई देना है। जुनून के हद तक ये वर्कोहलिक हैं।
इनको देखकर ईश्वर याद आता है। कठिन परीक्षा लेने के बाद ऊपरवाले ने जमकर कृपा बरसाई। सबक ये है कि मुश्किल वक्त से घबराना नहीं चाहिए। ये अच्छे दिनों की शुरुआत का संकेत भी हो सकता है। जो डर गया वो मर गया।
मनोज जी ईश्वर पुत्र हैं। उन पर ईश्वर की कृपा है। इनको मैं गौर से सुनता हूँ। इनका और इनकी कंपनी का नाम अंग्रेज़ी में लिख कर सर्च मारिये। एक इंप्रेसिव सक्सेस स्टोरी पढ़ेंगे। भगवान ने इन्हें गहन गरीबी से सफलता के शीर्ष तक पहुंचाया है। मनोज दुबे जी के पास बहुत कहानियाँ हैं। आजकल ये दुखी रहते हैं। सरकारों में भयानक बढ़े हुए भ्रष्टाचार को लेकर। मेक इन इंडिया को साइड कर अफ़सर सब एमएनसी या गुजरात की कंपनियों के हिसाब से टेंडर डिज़ाइन करते हैं। इनका भी मोहभंग शुरू है। टैक्स और करप्शन से आजिज़ आ चुके हैं। ये भी अगर दुबई में कंपनी का मुख्यालय बना दें तो आश्चर्य नहीं होगा मुझे। जो ईमानदार परफ़ॉर्मर होता है वो रुकता झुकता नहीं, नये रास्ते बना लेता है।
मनोज जी को जन्मदिन की बहुत शुभकामनाएं। हमें भी ले चलिएगा दुबई। 4पीएम के बाद भड़ास का भी ऑफिस उधर ही खुलेगा।



Rahul
September 21, 2025 at 11:18 am
I hope modi ji will change the system created by corrupted and anti national congress