पुष्प रंजन-
उत्तराखंड पुलिस की विशेष जांच टीम ने युट्यूबर पत्रकार राजीव प्रताप सिंह की मौत की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है. तथाकथित जांच में सामने आया है, कि राजीव प्रताप की मौत सड़क हादसे से जुड़ी है. जांच में कथित रूप से पाया गया कि राजीव ने 18 सितंबर की रात शराब पी थी, और नशे की हालत में कार चला रहे थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी सड़क हादसे से जुड़ी चोटों की पुष्टि कर दी गई है.
भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के पूर्व छात्र राजीव प्रताप सिंह, ‘दिल्ली उत्तराखंड लाइव’ नामक एक यूट्यूब चैनल चलाते थे। 19 सितंबर को उत्तरकाशी में उनके लापता होने की सूचना मिली थी. परिवार ने बताया कि प्रताप के लोकल रिपोर्टिंग के कारण उनके कई दुश्मन बन गए थे. प्रताप के चाचा कृपाल सिंह ने शिकायत में लिखा कि प्रताप ने अपने मित्र सोबन सिंह की ऑल्टो ली और गैंगौरी-भटवाड़ी की ओर रवाना हुआ; उस रात वहां जाने का उनके लिए कोई स्पष्ट कारण नहीं था, इसलिए परिवार को संदेह है.

प्रताप की उम्र 36 साल बताई गई. उसकी पत्नी मुस्कान ने कहा, कि उन्होंने घटना वाली रात करीब 11 बजे उनसे बात की थी; लेकिन इसके बाद बात नहीं हो पाई. उन्होंने बताया कि राजीव ने 16 सितंबर को अपने यूट्यूब चैनल ‘दिल्ली उत्तराखंड लाइव’ पर उत्तरकाशी जिला अस्पताल और एक स्कूल की रिपोर्ट अपलोड की थी, जिसके बाद उन्हें धमकियां मिलने लगीं.
मुस्कान ने आरोप लगाया, ‘कई लोग उन्हें फोन कर रहे थे और कह रहे थे कि वीडियो नहीं हटाए तो उन्हें मार देंगे. रात 11:50 पर मैंने मैसेज भेजा जो डिलीवर नहीं हुआ. मुझे पूरा यकीन है कि उन्हें किसी ने अगवा किया, वे यूं ही सड़क से नहीं गिरे.’
एसडीआरएफ कमांडेंट अर्पन यादववंशी ने बताया, कि 19 सितंबर को जिला कंट्रोल रूम को भगीरथी नदी में एक डूबा वाहन मिलने की सूचना मिली; बचाव दल ने तत्काल अभियान शुरू किया पर उस समय कोई व्यक्ति बरामद नहीं हुआ. टीम ने कई दिनों तक नदी तथा आस-पास के इलाकों में खोज जारी रखी. अंततः रविवार को जोशियारा बैराज से शव निकाला, और जिला पुलिस को सौंपा.
यह पूरा मामला रहस्यमय और सुनियोजित लगता है. मैं तभी बार-बार कहता हूँ, छोटे शहरों का जो पत्रकार सिस्टम से लड़ता है, वो सचमुच का हीरो है. मेट्रो शहरों में एसी कमरों में बैठे वो लोग नहीं, जो जुगाड़ और पुरस्कार का भौकाल बनाये रखते हैं.


