Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

टीवी

कंचन यादव ने शशि शेखर की बोलती बंद कर दी!

प्रभात डबराल-

कंचन यादव और प्रियंका भारती के बारे में; RJD की जो ये दो नई प्रवक्ता हैं ना, कंचन यादव और प्रियंका भारती, ये खुद भी अब उतनी ही बे-अंदाज और बेअदब हो गई लगती हैं जितना बीजेपी के वो प्रवक्ता और एंकर हैं जिन्हें बहसों में ख़ामोश करके ये चर्चा में आई थीं.

पिछले एकाध महीनों में इन दोनों ने बड़ा नाम कमाया. बीजेपी के संबित पात्र टाइप बड़बोले और निहायत ही घटिया प्रवक्ताओं, खासकर गौरव भाटिया और शहजाद पूनावाला जैसों की बोलती बंद करके ये दोनों सोशल मीडिया की लाडली बन गईं.

दोनों JNU की हैं. वहां जो भी दो चार साल पढ़ लिया उसे देश दुनिया की इतनी जानकारी तो हो ही जाती है कि टीवी पर आंय बांय सांय बोल रहे अर्धशिक्षित प्रवक्ताओं/ एंकरों से बराबरी पर आकर चोंच लड़ा सके.

प्रियंका ओर कंचन एक कदम आगे बढ़ गईं. बीजेपी वालों और कई बीजेपीछाप एंकरों के अहंकार और बेअदबी का जबाब उन्हें उनके ही अंदाज़ में देकर इन दोनों ने खूब वाहवाही बटोरी. मैं भी उन लोगों में से हूँ जिन्हें इनका आक्रामक व्यवहार अच्छा लगने लगा.

अब नहीं… अब मुझे लग रहा है ये बेअदबी की सीमा लाँघने लगी हैं – बिलकुल वैसा ही व्यवहार करने लगी हैं जैसा संबित टाइप प्रवक्ता और अर्नब/ रूबिका टाइप एंकर करते हैं- बेअंदाज और बदतमीज़.

कल ही एक क्लिप में देखा कंचन यादव अपने से दोगुनी उम्र के वरिष्ठ पत्रकार शशि शेखर पर ऐसे गुर्रा रही थी जैसे वो कोई सड़कछाप शोहदे हों – बिलकुल अर्नब और रूबिका के अंदाज़ में चीख रही थी.

ऐसे दसियों उदाहरण और दिए जा सकते हैं .

माफ करना कंचन और प्रियंका, मुझे लग रहा है आप दोनों अति उत्साह में आकर सभ्य व्यवहार की सीमा लाँघ रही हो – संबित पात्रा, गौरव भाटिया और पूनावाला जैसी बेअंदाजी की ओर बढ़ रही हो.

तुम्हारे इस व्यवहार से सबसे ज़्यादा ख़ुश वो अर्धशिक्षित एंकर हो रहे होंगे जिन्हें तुमने अपनी वाक्पटुता और सामान्य ज्ञान से ख़ामोश कर रखा था. आक्रामकता और असभ्य व्यवहार का फर्क समझना ज़रूरी है.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
2 Comments

2 Comments

  1. Parkash Paliwal

    October 10, 2025 at 1:38 pm

    शशि शेखर भी तो बड़ा धूर्त टाइप का पत्रकार है. मैंने इसे बैठकों में देखा, ये खुद से ज्यादा पढ़ा लिखा किसी को नहीं समझता.
    कर्म फल हैं आज नहीं तो कल भुगतना ही पड़ेगा.

  2. Khushdeep Sehgal

    October 10, 2025 at 1:53 pm

    क्या वरिष्ठ पत्रकार का कंचन को आदेशात्मक टोन में ‘Keep Quiet’ कहना सही था?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन