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नितिन गडकरी की पीआर चाल : टैक्स के पैसे से चल रहा है ‘पेड प्रमोशन’ का खेल!

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर एक बड़ा आरोप लगा है। सोशल मीडिया पर सामने आई रिपोर्ट्स और पोस्ट्स के अनुसार, गडकरी की पीआर टीम ने एक प्राइवेट एजेंसी को रोजाना वीडियो और प्रमोशनल कंटेंट तैयार करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। बताया जा रहा है कि यह एजेंसी इन वीडियोज़ को दाईं विचारधारा से जुड़े चुनिंदा इंफ्लुएंसर्स और X (पहले ट्विटर) यूज़र्स को भेजती थी — ताकि वे गडकरी की छवि सुधारने वाले पोस्ट्स साझा करें। बदले में इन इंफ्लुएंसर्स को भुगतान भी किया जाता था।

इस पूरे मामले को लेकर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि — क्या टैक्सपेयर्स का पैसा केंद्रीय मंत्री की ‘इमेज मेकओवर’ के लिए इस्तेमाल हो रहा है?

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक सोशल मीडिया एजेंसी को गडकरी के पीआर हैंडलर द्वारा रोजाना “वीडियो पैकेज” बनाने और उन्हें तैयार टेक्स्ट के साथ शेयर करने का काम सौंपा गया था। ये वीडियो मंत्री की नीतियों और सरकार के कामकाज को चमकाने वाले टोन में बनाए जाते थे। कहा जा रहा है कि इस एजेंसी ने कई राइट-विंग इंफ्लुएंसर्स से संपर्क कर इन्हें पोस्ट करवाने के लिए रकम ऑफर की।

कई पत्रकारों और सोशल मीडिया यूज़र्स ने अब सवाल उठाया है कि यह पूरी कवायद “पब्लिक मनी से चलाई जा रही डिजिटल इमेज वॉशिंग कैंपेन” है।

गडकरी का पक्ष

गडकरी ने हाल ही में चल रहे “पेड कैंपेन” और “फेक नैरेटिव” की खबरों को झूठा बताया था। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कुछ लोग “संगठित तरीके से भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं”। मंत्री ने इस पूरी गतिविधि से अपने कार्यालय के जुड़ाव से इनकार किया है।

मुख्य सवाल जो उठ रहे हैं

  • इस एजेंसी को भुगतान किसने किया? क्या मंत्रालय या मंत्री कार्यालय से सीधा या परोक्ष फंड गया?
  • क्या इंफ्लुएंसर्स को भुगतान का स्रोत सरकारी था?
  • क्या इस कैंपेन के लिए ऑडिट या निविदा प्रक्रिया अपनाई गई?

क्या इंफ्लुएंसर्स ने यह स्पष्ट किया कि पोस्ट पेड प्रमोशन था (जैसा कि कानून में अनिवार्य है)?

पारदर्शिता पर गहराए सवाल

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला लोकधन के दुरुपयोग और राजनीतिक प्रचार के लिए सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़ा एक गंभीर उदाहरण बन सकता है। मीडिया पारदर्शिता समूहों ने इस पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।

नितिन गडकरी की ‘इमेज बिल्डिंग’ पर उठे सवाल केवल एक मंत्री की साख तक सीमित नहीं हैं — यह पूरे सरकारी पीआर सिस्टम और सोशल मीडिया के बीच बढ़ती “पेड नैरेटिव इकॉनमी” का आईना हैं। यह तय करने के लिए कि कहीं टैक्सपेयर्स का पैसा राजनीतिक चमकाने में तो नहीं लग रहा — अब सरकार से जवाब मांगा जाना लाजिमी है।


पत्रकार और फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबेर ने दो स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा है-

Wonder how much Union Minister Nitin Gadkari is paying this fraudulent company for his paid Promotion (Image makeover)? This company gets in touch with X influencers and other X users to share the content (Video, Image, Text) they prepare promoting their clients. In most cases, They promote BJP leaders and BJP govts, Govt schemes.

It seems Nitin Gadkari’s PR team has directed the agency they contracted to release videos each day. That agency is then sharing the videos with accompanying text to compensated right-wing influencers for white washing Nitin Gadkari image. This is essentially how your taxpayer money is being used to pay those influencers.


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