अभिषेक उपाध्याय-
शशिशेखर चतुर्वेदी ने आज इतिहास रच दिया। हिंदुस्तान के प्रधान संपादक महोदय ने योगी आदित्यनाथ का जयजयकार से भरा हाहाकारी इंटरव्यू किया है!
अगर संपादकों का यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में सूचना विभाग भारी छँटनी का शिकार हो सकता है! जब प्रमोशन और PR का सारा काम चतुर्वेदी जी ही कर देंगे, तो फिर सूचना में काम कर रही तमाम एजेंसियाँ किस बात के करोड़ों लेगी?
अगर चतुर्वेदी जी को हिन्दुस्तान टाइम्स का मैनेजमेंट अगला ‘एक्सटेंशन’ देता है तो ठीक, वरना योगी आदित्यनाथ को ख़ाली पड़ी मीडिया एडवाइज़र की पोस्ट के लिए इन्हें अवश्य कंसीडर करना चाहिए!
चतुर्वेदी बेस्ट परफॉर्मर साबित होंगे, उन्होंने आज यह साबित कर दिया!
ये हिंदुस्तान अख़बार के प्रधान संपादक शशि शेखर सीएम योगी आदित्यनाथ से महिला अपराध के मुद्दे पर इस तरह मनुहार कर सवाल पूछ रहे हैं, जैसे अमिताभ बच्चन की पुरानी फ़िल्मों में निरूपा रॉय माँ की भूमिका में बच्चे को लोरी सुना सुनाकर बॉटल से दूध पिलाया करती थीं!
जिस दौर में NCRB के आँकड़ों में यूपी महिला अपराधों के शीर्ष पर है, जिस दौर में यूपी में महिला अपराध के सबसे ज्यादा मामले (66,381) में दर्ज हुए हैं, उस दौर में संपादक जी कलम को फ़ेयर एंड लवली की क्रीम बनाकर सत्ता का चेहरा चमकाने का ब्यूटी पार्लर खोले हुए हैं!!
संपादक जी लंबे वक्त से ‘एक्सटेंशन’ पर हैं! संभवतः उनका यही हुनर उनके ‘एक्सटेंशन’ का ऑक्सीजन है!
शशि शेखर के अधीनस्थ प्रताप सोमवंशी एक कवि भी हैं। वे चाहें तो अपने भविष्य के कविता संग्रह में इस शेर को शामिल कर सकते हैं- “इस दौर का ‘हिंदुस्तान’ ठहरा है ऐसे जंक्शन पर!
पत्रकारिता कोमा में, संपादक ‘एक्सटेंशन’ पर! मैं उनके संपादक की इस महान पत्रकारिता के उत्सव में इस शेर का कॉपीराइट उनके नाम करता हूँ!!
शशिशेखर चतुर्वेदी की हें हें हें हें….!!
चतुर्वेदी जी ने अवस्थी जी को बताया होगा कि आज मेरा जन्मदिन है! अवस्थी जी ने महाराज जी को बता दिया होगा कि आज चतुर्वेदी जी का जन्मदिन है!
महाराज जी ने इंटरव्यू के दौरान चतुर्वेदी जी को जन्मदिन की बधाई दे दी। ऐसा लगा मानो चतुर्वेदी जी बेसब्री से इसी क्षण का इंतज़ार कर रहे थे!
वे ख़ुशी के मारे इस क़दर लहालोट हुए कि देर तक ‘हें हें हें हें…’ करते रहे। अचानक उन्हें समझ आया होगा कि मैनेजमेंट देख रहा है, सो सिद्धार्थ नगर से लखनऊ की ओर दौड़ने वाली यूपी रोडवेज़ की बसों में लगने वाले झटके से टूटने वाली नींद की तरह, एकदम से चौकन्ना हो गए और चेहरे पर गंभीरता ओढ़ ली!
मेरा निवेदन है कि चतुर्वेदी जी के इस हें हें हें हें… को सुनते हुए आप लोग अपनी अपनी जगह पर खड़े हो जाएं, क्योंकि यही इस दौर की पत्रकारिता का राष्ट्रगान है!
हम इसका अपमान कैसे कर सकते हैं!!!



Jai prakash singh
December 9, 2025 at 3:15 pm
ये पत्रकारिता नहीं सेठ कि नौकरी कर रहे हैं