सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ढाई मिनट की वीडियो क्लिप वायरल हो रही है। इस वीडियो में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा चित्रा रोते हुए अपनी दास्तान सुना रही है। वह कहती है कि “डीयू इन दिनों गुंडों के द्वारा चलाई जाती है, प्रोफेसर के रूम में कितनी देर जाकर बैठोगे उस हिसाब से नंबर दिए जाते है।” इस मामले में तमाम लोग अपनी अपनी टिप्पणियां कर रहे हैं।
नीचे पढ़ें और छात्रा का बयान भी सुनें….
इस मामले में पत्रकार अजय शुक्ला ने लिखा है-
यह चित्रा हैं, दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की छात्रा। एक प्रोफेसर ने कुछ खास सेवा की मांग पर उन्हें परेशान किया। उन्होंने उस प्रोफेसर के बारे में एक रील बनाई और उसे इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दिया।
जब डिपार्टमेंट हेड को रील के बारे में पता चला, तो उन्होंने उस पर उसे डिलीट करने का दबाव डाला। लेकिन यह लड़की डरी नहीं; उसने इसे डिलीट करने से साफ मना कर दिया, तो उसे परेशान किया जा रहा है!
यह बेटी पूछ रही है “कैसे बचेगी बेटी, कैसे पढ़ेगी बेटी”!
समाजवादी एके नाम के यूजर का ट्वीट-
ये दिल्ली विश्वविद्यालय में की छात्रा “चित्रा” हैं इन्हें किसी प्रोफेसर ने किसी मामले को लेकर परेशान किया! उस प्रोफेसर के बारे में इन्होने रील बनाकर इंस्टाग्राम पर डाल दी!
जब विभागाध्यक्ष को रील्स के बारे में पता चलता है तो डिलीट करने का दवाब बनाते हैं। लेकिन ये लड़की डरी नहीं, उसने रील delete करने से साफ मना कर दिया!
डीयू प्रशासन छात्रा के साथ न्याय करे..परेशान करने वाले प्रोफेसर पर कार्यवाही होनी चाहिए!
HOD लड़की को धमका रहा था तब लड़की ने हिम्मत दिखाते हुए उसे रिकॉर्ड कर लिया! वही ऑडियो है इसमें! ध्यान से सुनिए और डीयू की सच्चाई को पहचानिये!
लड़की को सपोर्ट कीजिये.. डीयू में पढ़ने वाली बहन बेटियों की ढाल बनिये। अन्याय और शोषण के खिलाफ मिलकर आवाज उठाइये।
एनएसयूआई राजस्थान के प्रेजिडेंट विनोद जाखड़ लिखते हैं-
ABVP के संरक्षण में दिल्ली विश्वविद्यालय में जिस तरह मनमानी भर्तियाँ की गईं, उसका स्तर इतना गिर चुका है कि आज स्थिति यह है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली बेटियों की सुरक्षा तक सवालों के घेरे में आ गई है। जब पद योग्यता के बजाय राजनीतिक निष्ठा के आधार पर भरे जाएँगे, तब शिक्षा का माहौल दूषित होना ही है।
DU जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की गरिमा को बचाना है तो ऐसे संदिग्ध प्रोफेसरों का विरोध करना अनिवार्य है। चित्रा जैसी साहसी छात्राएँ, जो हौसले और सपनों के साथ दिल्ली पढ़ने आती हैं, उन्हें डर नहीं सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन को जवाब देना होगा कि आखिर बेटियों की सुरक्षा पर समझौता क्यों किया जा रहा है?
संदिग्ध प्रोफेसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? और छात्राओं की शिकायतों को दबाने की कोशिश क्यों की जा रही है?


